🌙 मुहर्रम की फज़ीलत और आशूरा की नमाज़
मुहर्रम इस्लामी साल का पहला महीना है, जिसे “शहरुल्लाह” यानी अल्लाह का महीना कहा गया है। यह महीना सिर्फ नया साल नहीं लाता, बल्कि हमें हक़, सब्र और कुर्बानी की यादें भी ताज़ा करता है। खासकर 10 मुहर्रम (आशूरा) का दिन इतिहास की कई बड़ी घटनाओं से जुड़ा हुआ है, जिनमें सबसे अहम है — कर्बला की शहादत।
📖 मुहर्रम की फज़ीलत
✅ 1. इस्लामी कैलेंडर की शुरुआत
मुहर्रम हिजरी साल का पहला महीना है। यह उन चार मुकद्दस महीनों (अशहुरे हर्रम) में से एक है, जिनका ज़िक्र कुरआन में है।
“बेशक महीनों की गिनती अल्लाह के यहाँ बारह है, उनमें से चार पवित्र हैं…” (सूरत-उत-तौबा: 36)
✅ 2. अल्लाह का महीना
“रमज़ान के बाद सबसे अफ़ज़ल रोज़े अल्लाह के महीने मुहर्रम के हैं।” (सहीह मुस्लिम: 1163)
✅ 3. आशूरा (10 मुहर्रम) की अहमियत
इस दिन कई ऐतिहासिक घटनाएं हुईं:
- हज़रत मूसा (अ.स.) को फिरऔन से निजात मिली
- हज़रत नूह (अ.स.) की कश्ती जूदी पहाड़ पर ठहरी
- हज़रत आदम (अ.स.) की तौबा क़बूल हुई
“यह दिन एक महान दिन है, इसमें अल्लाह ने मूसा को नजात दी, तो मैंने भी रोज़ा रखा।” (बुख़ारी)
✅ 4. कर्बला की शहादत
इमाम हुसैन (र.अ.), रसूलुल्लाह ﷺ के नवासे, को 10 मुहर्रम को यज़ीद की ज़ालिम हुकूमत के खिलाफ खड़े होने की वजह से शहीद कर दिया गया।
🕌 आशूरा की नमाज़ का तरीका
यह एक नफ़्ल नमाज़ है जिसे कुछ बुजुर्गों से मनक़ूल बताया गया है। इसे सवाब की नीयत से पढ़ा जा सकता है।
📌 नमाज़: 4 रकात (2+2 करके)
- नीयत: “आशूरा के दिन अल्लाह की रज़ा के लिए नफ़्ल नमाज़”
- हर रकात में: सूरह फातिहा के बाद 11 बार सूरह इख़्लास पढ़ें
✅ नमाज़ के बाद पढ़ें:
🥣 आशूरा के दिन के आमाल
| 📆 दिन | 📌 अमल |
|---|---|
| 9 और 10 मुहर्रम या 10 और 11 मुहर्रम | रोज़ा रखना (सहीह हदीस से साबित) |
| 10 मुहर्रम | ग़रीबों को खाना खिलाना, घरवालों पर खर्च करना |
| पूरा महीना | नफ़्ल नमाज़ें, कुरआन की तिलावत, इस्तिग़फार, दुआ |
“जो व्यक्ति आशूरा के दिन अपने घरवालों पर ख़ुशी और खर्च करता है, अल्लाह साल भर उसकी रोज़ी में बरकत अता करता है।” (बैयहकी)
🚫 किन बातों से बचना चाहिए?
- सीना ज़नी, मातम, खुद को नुकसान देना — शरीअत में जायज़ नहीं
- बिदअत (नई रस्में) करने से बचें
- कर्बला को सबक़ बनाएं, रस्म ना बनाएं
🕊️ मुहर्रम का असली पैग़ाम
मुहर्रम हमें तौहीद, सब्र, हक़, और कुर्बानी की तालीम देता है। यह महीना साल की शुरुआत को नेक इरादों, इबादत, और हुसैन (र.अ.) की याद में गुज़ारने का सुनहरा मौका है।

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