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प्यास से तड़पते गांव, सूखी टंकियां और खामोश प्रशासन! कब मिलेगा गैबनशाहवाडी-आनंदवाडी को जीवनदायी जल?

Villages suffering from thirst, dry tanks and silent administration! When will Gaibanshahwadi-Anandwadi get life-giving water?

Water Crisis in Villages | Drought in Maharashtra | Government Negligence

बूंद-बूंद को तरसते ग्रामीण, कब जागेगा प्रशासन?

जालना (24 फरवरी 2025): गैबनशाहवाडी और आनंदवाडी गांवों में पानी संकट (Water Scarcity) ने भयावह रूप धारण कर लिया है। हर सुबह महिलाएं कई किलोमीटर पैदल चलकर पानी लाने (Water Crisis in Rural Areas) को मजबूर हैं, बच्चे प्यास से तड़प रहे हैं, लेकिन प्रशासन अब भी गहरी नींद में सोया हुआ है।

पानी की एक-एक बूंद के लिए जूझ रहे ग्रामीणों का दर्द आखिर कब सुनेगी सरकार? वर्षों पहले बनी जलापूर्ति टंकी आज सिर्फ एक बेकार ढांचा बनकर खड़ी है, लेकिन उसमें पानी आपूर्ति (Drinking Water Supply) ठप है। ग्रामीणों ने कई बार गुहार लगाई, लेकिन उनकी आवाज़ें कागजों में ही दबकर रह गईं।

बूंद-बूंद के लिए संघर्ष, सरकारी वादे हवा में!

गैबनशाहवाडी गांव में लगभग 200 लोग, और आनंदवाडी में 100 से अधिक ग्रामीण निवास करते हैं। दोनों गांवों को समानगांव ग्राम पंचायत में शामिल किया गया है, लेकिन जल आपूर्ति (Water Supply Issues) के नाम पर सिर्फ सरकारी घोषणाएं और कागजी योजनाएं हैं।

ग्रामीणों का आरोप है कि उन्हें बरसों से नियमित जलापूर्ति नहीं मिल रही। महिलाएं और पुरुष हर दिन 1 से 1.5 किलोमीटर दूर से पानी लाने को मजबूर हैं, या फिर उन्हें महंगे दामों पर निजी टैंकर से पानी खरीदना (Buying Water from Private Tankers) पड़ता है।

सूखी पड़ी सरकारी टंकी, प्रशासन की बेरुखी उजागर

वर्ष 2023 में जालना जिला परिषद के ग्रामीण जल आपूर्ति विभाग (Rural Water Supply Department) ने इन गांवों के लिए पानी की टंकी बनाई थी, लेकिन वह सिर्फ एक बार पानी छोड़ने के बाद बेकार पड़ी है। टंकी सूख चुकी है और लोग पेयजल संकट (Drinking Water Crisis) से परेशान हैं।

एस.डी.पी.आई ने प्रशासन को सौंपा ज्ञापन, समाधान की मांग

सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (एस.डी.पी.आई) के जिलाध्यक्ष असदउल्ला अमानउल्ला रजवी के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने जालना जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर इस समस्या के तत्काल समाधान की मांग की।

ज्ञापन में कहा गया कि यदि प्रशासन ने जल्द ही जल संकट (Water Shortage) का समाधान नहीं किया, तो एस.डी.पी.आई लोकतांत्रिक आंदोलन करने को मजबूर होगी। ज्ञापन सौंपते समय असदउल्ला रजवी, शोएब बागवान, एड. खुर्रम खान, शफी बागवान, मसूद बागवान, मुनीर काझी, शेख मिया, सगीर शेख समेत कई कार्यकर्ता और गांववासी मौजूद थे।

क्या सरकार को दिखेगा इस जल संकट का सच?

ज्ञापन में बताया गया कि संविधान के अनुच्छेद 21 (Right to Life) के तहत, स्वच्छ और पीने योग्य पानी हर नागरिक का मौलिक अधिकार है। अनुच्छेद 47 के अनुसार, सरकार का कर्तव्य है कि वह नागरिकों को स्वास्थ्य और स्वच्छता से जुड़े बुनियादी संसाधन उपलब्ध कराए।

जल जीवन मिशन (Jal Jeevan Mission) और महाराष्ट्र ग्रामीण पेयजल योजना (Maharashtra Rural Drinking Water Scheme) के तहत हर गांव को नियमित और स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है। लेकिन आज भी सैकड़ों परिवार प्यासे (Thirsty Villagers) हैं और सरकार का सिस्टम फेल होता दिख रहा है।

“अब नहीं रुकेगी यह आवाज़!” – ग्रामीणों की चेतावनी

गांववासियों ने प्रशासन से इस समस्या को गंभीरता से लेने और जल संकट (Drinking Water Problem) का स्थायी समाधान निकालने की अपील की है। अब सवाल यह है कि क्या प्रशासन इस जल संकट पर आंखें खोलेगा, या फिर ग्रामीणों को आंदोलन के लिए मजबूर होना पड़ेगा?

क्या सरकार सुनेगी सूखे गांवों की चीख? या फिर लोग प्यासे रहकर भी प्रशासन की बेरुखी का शिकार बनते रहेंगे?


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Imran Siddiqui

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