छात्राओं के लिए आत्मरक्षा प्रशिक्षण शिविर जरूरी: उद्योगपति घनश्यामदास गोयल
छत्रपति शिवाजी महाराज जयंती पर आयोजित जिला स्तरीय पत्र लेखन प्रतियोगिता के विजेताओं को किया सम्मानित
जालना | प्रतिनिधि
छत्रपति शिवाजी महाराज के आदर्शों को समाज में प्रभावी रूप से स्थापित करने के लिए विद्यार्थियों को उनके जीवन, विचारों और संघर्षों का संपूर्ण इतिहास पढ़ाया जाना आवश्यक है। साथ ही छात्राओं की सुरक्षा और आत्मविश्वास को मजबूत बनाने के लिए शिवजन्मोत्सव समिति की ओर से आत्मरक्षा प्रशिक्षण शिविरों का आयोजन किया जाना चाहिए। ऐसे सामाजिक और शैक्षणिक उपक्रमों के लिए हर संभव सहयोग दिया जाएगा। यह विचार उद्योगपति घनश्यामदास गोयल ने व्यक्त किए।
छत्रपति शिवाजी महाराज जयंती के अवसर पर श्री शिवछत्रपति सांस्कृतिक मंडल, जालना द्वारा संचालित सर्वदलीय शिवजयंती उत्सव समिति की ओर से आयोजित जिला स्तरीय खुली पत्र लेखन प्रतियोगिता के विजेताओं को शनिवार (7 मार्च) को जे.ई.एस. कॉलेज के सभागार में सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम में समिति के मार्गदर्शक घनश्यामदास गोयल और अंकुशराव राऊत के हाथों विजेता विद्यार्थियों को पुरस्कार और प्रमाणपत्र प्रदान किए गए।
छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन और इतिहास के बारे में अधिक जानकारी के लिए महाराष्ट्र सरकार की आधिकारिक वेबसाइट भी देखी जा सकती है:
https://maharashtra.gov.in
⭐ मुख्य बिंदु (Key Points)
- शिवाजी महाराज जयंती के अवसर पर जालना में जिला स्तरीय पत्र लेखन प्रतियोगिता का आयोजन
- 175 विद्यार्थियों ने प्रतियोगिता में भाग लिया
- विजेताओं को नकद पुरस्कार, स्मृति चिन्ह और प्रमाणपत्र देकर सम्मानित किया गया
- छात्राओं के लिए आत्मरक्षा प्रशिक्षण शिविर आयोजित करने की मांग
- अगले वर्ष शिवजन्मोत्सव पखवाड़ा बड़े स्तर पर मनाने की घोषणा
विद्यार्थियों में इतिहास और संस्कारों के प्रति जागरूकता
कार्यक्रम में उपस्थित वक्ताओं ने कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज का जीवन युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उनकी वीरता, नेतृत्व क्षमता और जनकल्याण की भावना आज भी समाज के लिए मार्गदर्शक है। ऐसे में विद्यार्थियों को उनके जीवन से जुड़े आदर्शों और मूल्यों से परिचित कराना अत्यंत आवश्यक है।
समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि प्रतियोगिताओं और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से विद्यार्थियों में देशभक्ति, नेतृत्व क्षमता और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है।
शिवजयंती की ऐतिहासिक परंपरा
इस अवसर पर अंकुशराव राऊत ने बताया कि जालना शहर में स्वर्गीय रामभाऊजी राऊत, बाबूलाल पंडित और बलीराम यादव सहित उनके सहयोगियों ने सबसे पहले बैलगाड़ी पर शोभायात्रा निकालकर शिवजयंती उत्सव की शुरुआत की थी।
उन्होंने कहा कि उस समय शुरू की गई यह परंपरा आज भी जारी है और नई पीढ़ी इसे उत्साहपूर्वक आगे बढ़ा रही है। उन्होंने प्रतियोगिता में भाग लेने वाले सभी विद्यार्थियों को शुभकामनाएं दीं।

युवाओं को सही दिशा देने का प्रयास
समिति के कार्याध्यक्ष रवींद्र राऊत ने कहा कि वर्तमान समय में युवा पीढ़ी कई प्रकार की चुनौतियों का सामना कर रही है। ऐसे में छत्रपति शिवाजी महाराज के आदर्शों और संस्कारों को युवाओं तक पहुंचाना जरूरी है।
उन्होंने बताया कि समिति अगले वर्ष इस प्रतियोगिता को और भी बड़े स्तर पर आयोजित करेगी, ताकि अधिक से अधिक विद्यार्थियों को इसमें भाग लेने का अवसर मिल सके।
कार्यक्रम में स्वागताध्यक्ष रोहित भुरेवाल और प्रतियोगिता के परीक्षक डॉ. अशोक काकड़े ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
कार्यक्रम का संचालन पवन जोशी ने किया, जबकि समिति के सचिव शिवप्रकाश चितलकर ने सभी उपस्थित लोगों का आभार व्यक्त किया।
175 विद्यार्थियों ने लिया भाग
समिति की ओर से पहली बार आयोजित इस प्रतियोगिता में 175 विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। प्रतियोगिता के विजेताओं को 2100 रुपये, 1100 रुपये और 500 रुपये के नकद पुरस्कार, स्मृति चिन्ह और प्रमाणपत्र देकर सम्मानित किया गया।
प्रतियोगिता के परिणाम
प्राथमिक वर्ग
- प्रथम: मयुरेश राऊत
- द्वितीय: अक्षता नाईक
- तृतीय: समीक्षा घोलप
माध्यमिक वर्ग
- प्रथम: प्रियंका चौधरी
- द्वितीय: रिद्धी कंठाले
- तृतीय: जयश्री फलके
प्रोत्साहन पुरस्कार
कविता नरवडे, साक्षी रोकडे, तृप्ति गिरी, मनाली जोशी, साक्षी देशमुख, प्रेरणा शिंदे, भक्ति जोशी और तन्मय जोशी।
कार्यक्रम में समिति के सदस्य, छात्र-छात्राएं, शिक्षक और अभिभावक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
विशेष: अगले वर्ष शिवजन्मोत्सव पखवाड़ा मनाने की योजना
समिति के अध्यक्ष सुभाषचंद्र देवीदान ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज एक पराक्रमी, त्यागी और जनकल्याण के लिए समर्पित शासक थे। युवाओं और विद्यार्थियों में जागरूकता लाने के उद्देश्य से इस वर्ष समिति द्वारा कई सामाजिक कार्यक्रम आयोजित किए गए।
इन कार्यक्रमों में शिवचरित्र पुस्तकों का वितरण, गोशाला में चारा दान, मरीजों को फल वितरण, महिलाओं को साड़ी वितरण और विशेष विद्यालय के विद्यार्थियों को भोजन कराना जैसे सामाजिक उपक्रम शामिल थे।
उन्होंने बताया कि अगले वर्ष शिवजन्मोत्सव की तैयारी एक माह पहले से शुरू की जाएगी और व्याख्यान, वीरगाथा प्रस्तुतियां, वक्तृत्व प्रतियोगिता, कविता और निबंध लेखन तथा पारंपरिक खेल प्रतियोगिताओं के माध्यम से शिवजन्मोत्सव पखवाड़ा मनाया जाएगा।

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