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रमज़ान के आखिरी लम्हे…


काश हम समझ पाते इन पलों की कीमत!



इबादत की दौलत और रहमत के आखिरी अशरे की अहमियत पर आधारित



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रमज़ान के आखिरी लम्हे… काश हम समझ पाते इन पलों की कीमत!

★ मुफ्ती अनीसुद्दीन अशरफी ने कहा – “आखिरी अशरा छोड़ देना बहुत बड़ी बदनसीबी है”

जालना: रमज़ान का आखिरी अशरा शुरू हो चुका है… वो पाक लम्हे, जिनमें अल्लाह की रहमतें, मगफिरत और जहन्नुम से निजात बरसती हैं। लेकिन अफसोस… कुछ लोग इस बरकत भरे दौर में दीन से दूर हो जाते हैं।

इसी दर्द को बयां करते हुए काज़ी-ए-शरीअत जिला बुलढाणा मुफ्ती अनीसुद्दीन अशरफी ने कहा –
“अंतिम अशरा छोड़ देना, इबादत के माहौल से कट जाना – यह किसी भी मुसलमान के लिए सबसे बड़ी बदनसीबी है।”

जमीयत उलमा जालना द्वारा आयोजित एक खास रूहानी सिलसिला मस्जिद रेलवे स्टेशन, जालना में शुरू किया गया है, जिसमें रोज़ाना तरावीह के बाद रात 10 बजे से कुरान की तफ़्सीर और दिल को झकझोर देने वाले बयान पेश किए जा रहे हैं।

पहली रात:

मुफ्ती फारूक ने सूरतुल क़द्र की तफ़्सीर पेश की – उस रात की, जो हज़ार महीनों से बेहतर है। इसके बाद मुफ्ती अनीसुद्दीन साहब ने आखिरी अशरे की फज़ीलतों पर रोशनी डाली और रोते हुए कहा – “जब अल्लाह का दर खुला हो, रहमतें बरस रही हों, और हम दुनिया की उलझनों में खो जाएं – इससे बड़ा नुकसान क्या होगा?”

कार्यक्रम के अंत में सवाल-जवाब और दुआ का आयोजन हुआ।

यह श्रृंखला जमीयत उलमा महाराष्ट्र के सदर मौलाना नदीम सिद्दीकी की हिदायत तथा जमीयत उलमा जिला जालना के सदर मौलाना हसन मिल्ली नदवी और जनरल सेक्रेटरी मौलाना रईस अहमद मिल्ली की सरपरस्ती में बीते 5 वर्षों से लगातार आयोजित की जा रही है।


★ आगामी कार्यक्रम:

  • 21वीं रमज़ान (शुक्रवार): मुफ्ती शुऐब (दारुल उलूम, सेंधवा) – कुरान की तफ़्सीर। मुफ्ती इमरान अशाअती – “ज़कात – एक इबादत, एक ज़रूरत”
  • 22वीं रात (शनिवार): मौलाना शकील नदवी – सूरतुल-असर की तफ्सीर। मुफ्ती हसनैन महफूज नोमानी – “बातिल फिरकों की पहचान और बचाव के उपाय”
  • 23वीं रात (रविवार): मुफ्ती फहीम – कुरान तफ़्सीर। मुफ्ती एडवोकेट अनवारुल हक़ – “नौजवान तबाही के कगार पर – हमारी जिम्मेदारी”
  • 24वीं रात (सोमवार): मौलाना अरशद नदवी – तफ़्सीर। मुफ्ती आदम – “सूद और जुआ – वर्तमान स्वरूप व विकल्प”
  • 25वीं रात (मंगलवार): मुफ्ती सुहैल अहमद – सूरतुल-काफिरून तफ्सीर। मौलाना मुख्तार मदनी – “हिफाजत दीन व ईमान – मकातिब की भूमिका”
  • 26वीं रात (बुधवार): मौलाना अब्दुर्रऊफ नदवी – सूरतुल-फील तफ़्सीर। मौलाना आरिफ अशरफी – “बंदों के हक़ अदा करना – बंदगी की रूह”
  • 27वीं रात: मुफ्ती अब्दुल रहमान – “शब-ए-क़द्र व खतम-ए-क़ुरान” की फज़ीलतें
  • 28वीं रात (गुरुवार): मौलाना सुहैल नदवी – सूरतुल-मा’ऊन तफ्सीर। मुफ्ती अब्दुर रज़ाक – “खिदमत-ए-खल्क – कुरान व सुन्नत की रोशनी में”
  • 29वीं रात (शुक्रवार, 28 रमज़ान): मुफ्ती एहसानुल हक़ मजाहरी – सूरतुन्नसर तफ़्सीर। मौलाना तफज्जुल हुसैनी – “दौर-ए-दीन – उम्मत की असली जिम्मेदारी”

जानकारी साझा की – मुफ्ती फहीम

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Imran Siddiqui

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