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स्थानीय निकाय चुनावों को मिली सुप्रीम कोर्ट से रफ्तार — एक लाख EVM की कमी, अक्टूबर में दो चरणों में संभावित मतदान

स्थानीय निकाय चुनावों को मिली सुप्रीम कोर्ट से रफ्तार — एक लाख EVM की कमी, अक्टूबर में दो चरणों में संभावित मतदान

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स्थान: मुंबई | दिनांक: 31 मई 2025

विशेष प्रतिनिधि

महाराष्ट्र में वर्षों से लंबित पड़ी स्थानीय स्वराज्य संस्थाओं (नगर परिषद, नगर पालिकाएं, नगर निगम आदि) के चुनावों को अब सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद गति मिल चुकी है। राज्य सरकार ने निर्णय लिया है कि ये चुनाव 2017 की प्रभाग रचना के अनुसार ही कराए जाएंगे।

हालांकि इन चुनावों के लिए एक लाख ईवीएम मशीनों की आवश्यकता है, जबकि वर्तमान में केवल 64,000 मशीनें उपलब्ध हैं। ऐसे में यह संभावना प्रबल है कि चुनाव दो चरणों में आयोजित किए जाएंगे, और उनका आयोजन अक्टूबर 2025 तक किया जा सकता है।

⚖️ सुप्रीम कोर्ट का आदेश बना निर्णायक मोड़

6 मई 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिए कि राज्य में लंबित स्थानीय निकाय चुनाव चार महीनों के भीतर कराए जाएं। कोर्ट के इस आदेश के बाद राज्य चुनाव आयोग और सरकार की तैयारियां तेज़ हो गई हैं।

अब तीन महीने के भीतर प्रभाग रचना और आरक्षण प्रक्रिया (सोडत) को पूरा कर लिया जाएगा, ताकि समयसीमा में मतदान कराया जा सके।

🗳️ चुनावों की पृष्ठभूमि — वर्षों से टालते रहे प्रतिनिधित्व

महाराष्ट्र की 687 स्थानीय निकायों में से अधिकतर के कार्यकाल तीन से पाँच वर्षों पहले समाप्त हो चुके हैं। इन पर फिलहाल प्रशासक नियुक्त हैं, जिससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया बाधित हो रही है।

राज्य सरकार का उद्देश्य है कि प्रभाग रचना के पुराने ढांचे पर ही चुनाव कराए जाएं, जिससे कार्यान्वयन में आसानी हो और अदालती विवादों से बचा जा सके।

⚙️ तकनीकी बाधा — EVM की व्हाइट मेमोरी बन सकती है अड़चन

एक तकनीकी पहलू यह भी है कि केंद्रीय चुनाव आयोग की ईवीएम मशीनों में पिछले चुनावों की जानकारी ‘व्हाइट मेमोरी’ नामक डेटा कार्ड में स्टोर होती है। इन्हें हटाकर नए कार्ड इंस्टॉल किए जाएंगे, ताकि स्थानीय निकायों के चुनाव डेटा को सुरक्षित रखा जा सके।

चुनाव आयोग के सूत्रों के मुताबिक, यह प्रक्रिया पहले से शुरू कर दी गई है और केंद्रीय चुनाव आयोग का तकनीकी सहयोग लिया जा रहा है।

🔢 ईवीएम की भारी कमी — केंद्र से मदद की उम्मीद

राज्य चुनाव आयोग को 1 लाख से अधिक EVM मशीनों की जरूरत है, जबकि उसके पास अभी सिर्फ 64,000 मशीनें हैं। शेष मशीनों के लिए केंद्रीय चुनाव आयोग को औपचारिक मांगपत्र भेजा गया है और जल्द ही इनकी आपूर्ति की उम्मीद है।

चुनाव आयोग के अनुसार, ईवीएम की उपलब्धता तय करेगी कि चुनाव एक साथ होंगे या चरणबद्ध तरीके से।

🧭 पुराने ढांचे का राजनीतिक समीकरण

वर्ष 2017 में जिस प्रभाग रचना के तहत चुनाव हुए थे, उसका सबसे अधिक लाभ महायुती (BJP-शिवसेना गठबंधन) को मिला था। अब जब उसी ढांचे को दोबारा लागू किया जा रहा है, तो यह माना जा रहा है कि मौजूदा सत्ताधारी दलों को फिर से फायदा मिल सकता है।

हालांकि, विपक्षी दल इस रचना पर सवाल उठाते आए हैं और इसमें फेरबदल की मांग भी कर चुके हैं।

🔚 निष्कर्ष:

सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप और चुनाव आयोग की सक्रियता से स्पष्ट संकेत मिल रहे हैं कि महाराष्ट्र में अक्टूबर 2025 तक स्थानीय निकाय चुनाव संपन्न हो सकते हैं। हालांकि EVM की उपलब्धता और आरक्षण प्रक्रिया चुनाव की गति और स्वरूप तय करेगी।

अगर सभी प्रक्रियाएं तय समय पर पूरी होती हैं, तो महाराष्ट्र की 687 स्थानीय स्वराज्य संस्थाओं में वर्षों बाद लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व बहाल हो जाएगा।


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Imran Siddiqui

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