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बच्चों की रूहानी प्रस्तुति: जालना में सीरतुन्नबी ﷺ कार्यक्रम

जालना में सीरतुन्नबी ﷺ का रूहानी व ऐतिहासिक जलसा — बच्चों की मासूम आवाज़ों, नात और दुआओं से गूँज उठा परिसर

जालना, प्रतिनिधि: रबीउल अव्वल के पाक मौके पर जमीयतुल उलेमा (अर्शद मदनी) की ओर से हाजी मखदूम उर्दू प्राथमिक शाला, जालना में सीरतुन्नबी ﷺ का भव्य कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह आयोजन सीरत पाक मोहिम का हिस्सा था, जिसके अंतर्गत जिले के विभिन्न स्कूलों और कॉलेजों में लगातार सीरत संबंधी कार्यक्रम हो रहे हैं।

कार्यक्रम की शुरुआत

जलसे की शुरुआत कुरआन की तिलावत से हुई। बच्चों की मासूम आवाज़ों में अल्लाह के कलाम की गूँज ने वातावरण को रूहानी सुकून से भर दिया। इसके बाद नात-ए-पाक पेश की गईं, जिनकी दिलकश आवाज़ों ने सभी को भावुक कर दिया।

बच्चों की शानदार प्रस्तुतियाँ

विद्यालय के छात्रों ने उर्दू, मराठी, अंग्रेज़ी और अरबी भाषाओं में ओजस्वी भाषण प्रस्तुत किए। बच्चों के जोश, आत्मविश्वास और पैगंबर ﷺ की शिक्षाओं पर आधारित विचारों को श्रोताओं ने तालियों से सराहा। श्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले छात्रों को मंच पर सम्मानित किया गया।

विद्वानों के प्रेरक विचार

  • मुख्याध्यापक मोहम्मद अशफाक सर ने प्रास्ताविक भाषण में जमीयतुल उलेमा की सेवाओं की सराहना की और विद्यार्थियों को उज्ज्वल भविष्य का आशीर्वाद दिया।
  • मौलाना ईसा खान काशफ़ी ने कहा कि पैगंबर ﷺ की शिक्षाएं इंसानियत को अमन, मोहब्बत और भाईचारे की राह दिखाती हैं।
  • मुफ़्ती सय्यद नोमान हुसैनी नदवी और मौलाना एहसान नदवी ने सीरत-ए-पाक को जीवन का असली मार्गदर्शन बताया।
  • अल्हाज मोहम्मद इफ्तेखारुद्दीन सर (सचिव, अंजुमन-ए-इशाअत-ए-तालीम व उपाध्यक्ष, जमीयतुल उलेमा) ने शिक्षा से जुड़ाव, माता-पिता की आज्ञाकारिता और पैगंबर ﷺ की शिक्षाओं पर अमल करने की नसीहत दी।
  • अध्यक्षीय संबोधन में मौलाना सय्यद नसरुल्ला हुसैनी सोहेल नदवी ने कहा, “यह विद्यालय बच्चों को सिर्फ किताबों का ज्ञान नहीं दे रहा, बल्कि उन्हें पैगंबर ﷺ के आदर्श जीवन से जोड़ रहा है — यही सबसे बड़ी नेमत है।”

महिलाओं की भूमिका पर विशेष व्याख्यान

आमीना अलमास बाजी (प्रतिनिधि, जमात-ए-इस्लामी हिंद) ने इस्लाम में महिलाओं की इज़्ज़त, जिम्मेदारियों और समाज-निर्माण में उनकी भागीदारी पर प्रभावशाली विचार रखे।

स्वागत, संचालन और उपस्थिति

अतिथियों का स्वागत शॉल और पुष्पहारों से किया गया। कार्यक्रम का संचालन माजिद सर ने किया और आभार प्रदर्शन अय्यूब खान सर ने किया।

समारोह में मौलाना हक्कानी, हाजी जलील सेठ, अता मोहम्मद बख़्शी, हाफ़िज़ कारी मोहम्मद माज, अहमद नूर कुरैशी, लियाक़त अली खान यासिर, मौलाना आमिर नदवी सहित सामाजिक, धार्मिक और शैक्षणिक क्षेत्र की अनेक हस्तियाँ मौजूद रहीं।

समापन की रूहानी घड़ी

कार्यक्रम का समापन हाफ़िज़ अब्दुल सलाम कुरैशी की दिल को छू लेने वाली दुआ पर हुआ। दुआ के दौरान उठते हाथ, नम होती आँखें और बच्चों की चमकती मुस्कानें — सबने माहौल को रूहानी नूर से भर दिया।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

सीरतुन्नबी ﷺ कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य क्या था?

पैगंबर हजरत मोहम्मद ﷺ की सीरत और शिक्षाओं को आम करना तथा नई पीढ़ी को उनके आदर्श जीवन से जोड़ना। यह कार्यक्रम किस संस्था ने आयोजित किया?

कार्यक्रम जमीयतुल उलेमा (अर्शद मदनी) की ओर से आयोजित किया गया। छात्रों ने कार्यक्रम में क्या प्रस्तुत किया?

कुरआन की तिलावत, नात-ए-पाक और उर्दू, मराठी, अंग्रेज़ी व अरबी भाषाओं में प्रभावशाली भाषण। वक्ताओं ने क्या संदेश दिया?

शिक्षा, अमन, मोहब्बत, भाईचारे, माता-पिता की आज्ञाकारिता और पैगंबर ﷺ की शिक्षाओं पर अमल करने का संदेश। कार्यक्रम का समापन कैसे हुआ?

हाफ़िज़ अब्दुल सलाम कुरैशी की भावपूर्ण दुआ के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

जालना में सीरतुन्नबी ﷺ का जलसा, जिसमें बच्चे ट्रॉफियां लेकर मुस्कुराते हुए नजर आ रहे हैं। कार्यक्रम में हाजी मखदूम उर्दू प्राथमिक स्कूल के छात्र और अन्य लोग शामिल हैं।
छात्र पुरस्कार के साथ मुस्कुराते हुए, सांस्कृतिक कार्यक्रम के दौरान, जालना के हाजी मखदूम उर्दू प्राथमिक शाला में।
एक व्यक्ति एक मंच पर बोलते हुए, उसके पीछे अन्य उपस्थित लोग एक पंक्ति में बैठे हैं। कार्यक्रम का एक बैनर भी मौजूद है, जिसमें 'सीरतुन्नबी ﷺ' का ज़िक्र है।
बच्चे और महिलाएं एक कार्यक्रम में शामिल होते हुए, जिसमें कुरआन की तिलावत और नात-ए-पाक प्रस्तुत की जा रही है।

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