
नियमित जलापूर्ति पर सवाल: “रोज़ और समय पर पानी क्यों नहीं?” — मानवाधिकार आयोग में पहुँचा मामला
जालना: शहर में नियमित और निर्धारित समय पर जलापूर्ति सुनिश्चित करने की मांग को लेकर एडवोकेट अश्विनी महेश धन्नावत ने महाराष्ट्र राज्य मानवाधिकार आयोग में याचिका दायर की है। याचिका में उन्होंने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि अनियमित जलापूर्ति महिलाओं के मानवाधिकारों का उल्लंघन है, जिसका सीधा असर उनके रोजगार, करियर और आर्थिक आत्मनिर्भरता पर पड़ रहा है।
याचिका में जालना शहर की जल समस्या का एक गंभीर और चिंताजनक चित्र प्रस्तुत किया गया है। बताया गया है कि पानी की कोई निश्चित समय-सारिणी न होने के कारण महिलाओं का अधिकांश समय केवल पानी आने की प्रतीक्षा में ही बीत जाता है। इसका प्रतिकूल प्रभाव उनके पेशेवर और निजी जीवन पर साफ दिखाई देता है।
कामकाजी महिलाएं समय पर कार्यालय नहीं पहुंच पातीं, वहीं कई महिलाओं को मजबूरी में बेहतर करियर अवसर छोड़ने पड़ते हैं। याचिका के अनुसार यह स्थिति केवल असुविधा नहीं, बल्कि महिलाओं के मानवाधिकारों और उनके आर्थिक स्वावलंबन पर सीधा आघात है।
महानगरपालिका का दावा, याचिकाकर्ता का तीखा सवाल
मामले की सुनवाई के दौरान जालना महानगरपालिका की ओर से महाराष्ट्र राज्य मानवाधिकार आयोग के समक्ष यह दावा किया गया कि शहर में आठ दिन में एक बार पर्याप्त जलापूर्ति की जाती है। साथ ही यह भी कहा गया कि जलापूर्ति से संबंधित सूचनाएं ‘ऑर्बिट ऐप’ के माध्यम से नागरिकों को दी जाती हैं।
महानगरपालिका के इस तर्क पर याचिकाकर्ता की ओर से एडवोकेट महेश धन्नावत ने कड़ा विरोध दर्ज कराया। उन्होंने आयोग के समक्ष सीधा सवाल उठाते हुए कहा कि यदि महानगरपालिका आठ दिन में एक बार पर्याप्त पानी देने में सक्षम है, तो नागरिकों को रोज़ और समय पर पानी उपलब्ध कराना क्यों संभव नहीं है।
उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि आठ दिन में एक बार जलापूर्ति करना किसी भी तरह से समस्या का समाधान नहीं है, बल्कि इससे नागरिकों की परेशानियां और बढ़ती हैं। रोजमर्रा के जीवन, स्वच्छता और स्वास्थ्य पर इसका गंभीर असर पड़ता है।
आयोग के आदेश की अनदेखी से बढ़ी नाराजगी
प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए महाराष्ट्र राज्य मानवाधिकार आयोग ने जालना महानगरपालिका आयुक्त को अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने और सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद अब तक न तो आयोग में प्रतिज्ञा पत्र दाखिल किया गया है और न ही आयुक्त की उपस्थिति दर्ज हुई है।
इस लापरवाही को लेकर शहर के नागरिकों में भारी नाराजगी देखी जा रही है। लोगों का कहना है कि जब मानवाधिकार आयोग जैसे संवैधानिक संस्थान के आदेशों की भी अनदेखी की जा रही है, तो आम नागरिकों की समस्याओं को गंभीरता से कैसे लिया जाएगा।
वर्तमान में जालना महानगरपालिका के आयुक्त पद का अतिरिक्त प्रभार जिलाधिकारी डॉ. आशिमा मित्तल के पास है। ऐसे में आयोग के समक्ष उपस्थित होकर जवाब देने की जिम्मेदारी भी उन्हीं पर आती है।
अब आयोग की कार्रवाई पर टिकी निगाहें
मानवाधिकार आयोग के आदेश की अनदेखी के बाद अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आयोग जालना महानगरपालिका प्रशासन के खिलाफ कौन-सी सख्त कार्रवाई करता है। शहर की जनता, विशेषकर महिलाएं, इस कानूनी लड़ाई के अंतिम फैसले का बेसब्री से इंतजार कर रही हैं।
नियमित, रोज़ और समय पर जलापूर्ति की मांग अब केवल सुविधा की नहीं, बल्कि महिलाओं के सम्मान, अधिकार और आर्थिक स्वतंत्रता से जुड़ा अहम मुद्दा बन चुकी है।

- U.S. National Parks Prepare for Fall VisitorsU.S. National Parks Prepare for Fall Visitors — latest United States news, key details and current developments.
- U.S. Fall Travel Season Brings Foliage TourismU.S. Fall Travel Season Brings Foliage Tourism — latest United States news, key details and current developments.
- U.S. Space Industry Tracks Starship Flight DataU.S. Space Industry Tracks Starship Flight Data — latest United States news, key details and current developments.
- U.S. Energy Policy Debate Expands Beyond OilU.S. Energy Policy Debate Expands Beyond Oil — latest United States news, key details and current developments.
- U.S. Housing Affordability Faces Interest Rate PressureU.S. Housing Affordability Faces Interest Rate Pressure — latest United States news, key details and current developments.
