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जालना नगर परिषद चुनाव परिणाम: भाजपा का दबदबा कायम, भोकरदन में दानवे गढ़ में एनसीपी की जीत

जालना नगर परिषद चुनाव परिणाम: भाजपा का दबदबा कायम, लेकिन भोकरदन में दानवे गढ़ में गूंजी ‘तुतारी’

जालना: जालना जिले की तीन नगर परिषदों के चुनाव परिणाम सामने आते ही जिले की राजनीति में सरगर्मी तेज हो गई है। इन चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) ने अपनी-अपनी राजनीतिक ताकत का प्रदर्शन किया, जबकि कई वरिष्ठ और प्रभावशाली नेताओं को अप्रत्याशित झटकों का सामना करना पड़ा। तीन नगर परिषदों में से दो पर भाजपा ने अपना वर्चस्व कायम रखा है, वहीं एक नगर परिषद में राष्ट्रवादी कांग्रेस (शरद पवार गुट) ने सत्ता पर कब्जा जमाकर सियासी समीकरण बदल दिए हैं।

परतूर और अंबड में भाजपा का परचम

परतूर नगर परिषद के नतीजों पर पूरे जिले की निगाहें टिकी थीं। यहां भाजपा ने निर्णायक बढ़त हासिल करते हुए कांग्रेस के हाथों से सत्ता छीन ली। भाजपा की नगराध्यक्ष पद की उम्मीदवार प्रियंका राक्षे ने 1800 मतों के भारी अंतर से जीत दर्ज की। उन्होंने राष्ट्रवादी कांग्रेस (अजित पवार गुट) की उम्मीदवार शांताबाई हिवाले को पराजित किया। इस परिणाम को कांग्रेस और राष्ट्रवादी गुट के लिए बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है, जिससे पूर्व विधायक सुरेशकुमार जेथलिया की राजनीतिक स्थिति पर भी असर पड़ने की चर्चा है।

अंबड नगर परिषद में भाजपा ने एक बार फिर अपनी सत्ता बरकरार रखते हुए संगठनात्मक मजबूती का प्रदर्शन किया। यहां भाजपा की उम्मीदवार देवयानी कुलकर्णी विजयी रहीं। अंबड में भाजपा की मजबूत पकड़ ने यह साफ कर दिया कि क्षेत्र में पार्टी का संगठन अभी भी प्रभावी स्थिति में है। इस नतीजे को राष्ट्रवादी कांग्रेस (शरद पवार गुट) के वरिष्ठ नेता राजेश टोपे के लिए बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है।

भोकरदन में बदली सियासी तस्वीर, दानवे परिवार को झटका

हालांकि भोकरदन नगर परिषद के परिणामों ने जिले की राजनीति की तस्वीर पूरी तरह बदल दी। भाजपा के कद्दावर नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री रावसाहेब दानवे के गढ़ माने जाने वाले भोकरदन में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) ने सत्ता हासिल कर ली है। पार्टी की नगराध्यक्ष पद की उम्मीदवार समरीन मिर्झा ने कांग्रेस और भाजपा—दोनों को पीछे छोड़ते हुए शानदार और निर्णायक जीत दर्ज की।

इस परिणाम को न केवल भाजपा, बल्कि कांग्रेस के जिला नेतृत्व के लिए भी बड़ा झटका माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भोकरदन जैसे मजबूत किले में मिली हार ने दानवे परिवार की राजनीतिक पकड़ और रणनीति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

जीत का जश्न, सियासी तापमान चढ़ा

भोकरदन में जीत के बाद राष्ट्रवादी कांग्रेस (शरद पवार गुट) के कार्यकर्ताओं में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। शहर में विजय जुलूस निकाला गया और जगह-जगह आतिशबाजी की गई। खास बात यह रही कि पूर्व विधायक चंद्रकांत दानवे और उनके समर्थकों ने रावसाहेब दानवे के निवास के सामने जमकर जश्न मनाया। गुलाल, ढोल-नगाड़ों और नारों से पूरा इलाका गूंज उठा, जिससे राजनीतिक माहौल और अधिक गरमा गया।

आगे के चुनावों के लिए स्पष्ट संकेत

जालना जिले की इन तीन नगर परिषदों के नतीजों ने आगामी विधानसभा और अन्य स्थानीय स्वराज्य संस्थाओं के चुनावों के लिए स्पष्ट संकेत दे दिए हैं। जहां भाजपा ने दो नगर परिषदों में अपनी संगठनात्मक ताकत साबित की है, वहीं भोकरदन में राष्ट्रवादी कांग्रेस (शरद पवार गुट) की जीत ने यह संदेश दिया है कि जिले की राजनीति में अब मुकाबला और भी दिलचस्प, तीखा और चुनौतीपूर्ण होने वाला है।

एक ग्राफिक जिसमें जालना नगर परिषद चुनाव परिणामों का सारांश प्रस्तुत किया गया है, जिसमें भाजपा का दबदबा और भोकरदन में राष्ट्रवादी कांग्रेस की जीत को दर्शाया गया है।

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