अजमेर दरगाह मामला: ऑल इंडिया सुन्नी जमीयतुल उलमा ने मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की अपील की
1 दिसंबर 2024 को ऑल इंडिया सुन्नी जमीयतुल उलमा और रज़ा अकादमी के प्रतिनिधिमंडल ने राजस्थान के मुख्यमंत्री से मुलाकात के लिए एक औपचारिक पत्र जारी किया। इस पत्र में अजमेर शरीफ दरगाह से जुड़े विवाद पर चर्चा के लिए समय मांगा गया है।
Ajmer Dargah : All India Sunni Jamiatul Ulama appeals to Chief Minister to intervene
पत्र के अनुसार, यह प्रतिनिधिमंडल, हजरत मोइन मियां साहब और सईद नूरी साहब के नेतृत्व में, अजमेर शरीफ में वर्तमान स्थिति और हाल ही में निचली अदालत के फैसले से उत्पन्न समस्याओं पर चर्चा कर रहा है। इसमें अजमेर दरगाह शरीफ, जो एक पवित्र सूफी दरगाह है, से जुड़े मुद्दों पर चिंता व्यक्त की गई है।
1991 के धार्मिक स्थल अधिनियम को लागू करने की अपील
प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि निचली अदालत के हालिया फैसले ने मुस्लिम समुदाय और दरगाह के श्रद्धालुओं के बीच चिंता पैदा कर दी है। उन्होंने मुख्यमंत्री से इस मामले में हस्तक्षेप कर इसे सौहार्दपूर्ण तरीके से हल करने की अपील की।
पत्र में 1991 के धार्मिक स्थल अधिनियम का हवाला देते हुए कहा गया है कि इसे सभी पूजा स्थलों पर सख्ती से लागू किया जाना चाहिए। प्रतिनिधिमंडल ने आगाह किया कि इस अधिनियम की अनदेखी से पूरे देश में अराजकता फैल सकती है, क्योंकि यह विभिन्न धर्मों के पूजा स्थलों को लेकर नए विवाद उत्पन्न कर सकता है।

जल्द बैठक की मांग
प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री से अनुरोध किया कि वे इस संवेदनशील मामले पर जल्द बैठक बुलाकर समाधान तलाशें। उन्होंने कहा कि यह बैठक न केवल विवाद को सुलझाने का मौका देगी बल्कि इससे समुदायों के बीच शांति और विश्वास भी स्थापित होगा।
प्रतिनिधिमंडल ने यह भी स्पष्ट किया कि वे मुख्यमंत्री के सुविधानुसार किसी भी समय बैठक के लिए उपलब्ध हैं।
सईद नूरी ने पत्र में कहा:
“हम यह मानते हैं कि आपकी हस्तक्षेप से इस समस्या का समाधान निकल सकता है और देश में शांति बनी रह सकती है।”
पृष्ठभूमि:
अजमेर शरीफ दरगाह भारत के सबसे पवित्र सूफी तीर्थस्थलों में से एक है। हाल ही में निचली अदालत के फैसले ने वहां के प्रशासन और धार्मिक अनुयायियों के बीच तनाव पैदा कर दिया है। इस विवाद ने राष्ट्रीय स्तर पर ध्यान आकर्षित किया है, और इसे हल करने के लिए राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं।

रज़ा अकैडमी और सुन्नी जमीयत उलमा के प्रतिनिधिमंडल ने जताई गहरी चिंता
अजमेर शरीफ:
दरगाह ख्वाजा गरीब नवाज रहमतुल्लाह अलेह, जो सदियों से विभिन्न धर्मों के श्रद्धालुओं के लिए आस्था और प्रेम का केंद्र रही है, हाल ही में विवादों के घेरे में आ गई है। हिंदू सेना के विष्णु गुप्ता द्वारा दरगाह को शिव मंदिर घोषित करने की साजिश ने धार्मिक सहिष्णुता पर गहरी चोट की है। इस गंभीर मुद्दे को लेकर ऑल इंडिया सुन्नी जमीयत उलमा और रज़ा अकैडमी के सात सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने अजमेर शरीफ में बैठक की।
प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई:
इस प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई हज़रत सैयद मोईनुद्दीन अशरफ अशरफी जिलानी और रज़ा अकैडमी के संस्थापक हाजी मोहम्मद सईद नूरी कर रहे हैं। इन्होंने दरगाह की पवित्रता बनाए रखने और शरारती तत्वों पर कड़ी कार्रवाई करने की मांग को लेकर राजस्थान के मुख्यमंत्री से मुलाकात का समय मांगा है।
कड़ी कार्रवाई की मांग:

हज़रत मोईन मियां साहब ने विष्णु गुप्ता को एक पेशेवर अपराधी बताते हुए उसके खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि दरगाह के श्रद्धालु, चाहे वे हिंदू हों या मुस्लिम, इस प्रकार की हरकतों से आहत हैं।
रज़ा अकैडमी का बयान:
रज़ा अकैडमी के अध्यक्ष हाजी मोहम्मद सईद नूरी ने इस घटना को देश की शांति और सुरक्षा के लिए खतरा बताया। उन्होंने आशंका जताई कि गुप्ता के पीछे किसी बड़े संगठन का हाथ हो सकता है और इस मामले की गहराई से जांच की आवश्यकता है।
मुख्यमंत्री से मुलाकात की तैयारी:

प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि इस गंभीर मामले पर चर्चा के लिए मुख्यमंत्री से मुलाकात कर विष्णु गुप्ता की हरकतों और उसके खिलाफ कार्रवाई की मांग की जाएगी। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर कार्रवाई नहीं हुई तो देशभर में विरोध प्रदर्शन हो सकते हैं।
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