विजन जालना 2030 को मिली ठोस दिशा: स्वच्छता, सीवेज और कचरा प्रबंधन पर चार घंटे का मंथन, शहर के भविष्य की मजबूत नींव
जालना।
जालना को स्वच्छ, हरित और सुनियोजित शहर के रूप में विकसित करने की दिशा में एक निर्णायक पहल करते हुए जालना फर्स्ट, जिला प्रशासन और जालना शहर महानगरपालिका के संयुक्त मंच से शहर के भविष्य का स्पष्ट रोडमैप सामने आया है। बुधवार, 17 दिसंबर को सिद्धार्थ द फर्न होटल में आयोजित “व्हेयर आइडियाज़ बिकम एक्शन” विषयक मंथन परिषद में देश के प्रतिष्ठित पर्यावरण, जल संरक्षण और शहरी विकास विशेषज्ञों ने एक स्वर में कहा कि अब केवल विचारों की नहीं, बल्कि ठोस और समयबद्ध क्रियान्वयन की आवश्यकता है।
स्वच्छता, सीवेज वॉटर ट्रीटमेंट और कचरा प्रबंधन जैसे ज्वलंत विषयों पर लगभग चार घंटे तक चले इस गहन विचार-विमर्श ने “विजन जालना 2030” को न केवल दिशा दी, बल्कि प्रशासन, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों की साझी भागीदारी से शहर में बड़े और स्थायी बदलाव की उम्मीद भी जगा दी।
विजन जालना 2030 पर केंद्रित मंथन
जिला प्रशासन, जालना शहर महानगरपालिका और जालना फर्स्ट के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित यह मंथन परिषद “विजन जालना 2030” की संकल्पना पर आधारित थी। कार्यक्रम की शुरुआत जालना महानगरपालिका के अतिरिक्त आयुक्त अर्जुन गिराम के हाथों वृक्ष पूजन से हुई, जो पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक रहा।
इसके बाद दो तकनीकी सत्र आयोजित किए गए। पहले सत्र में स्रोत स्तर पर कचरे का पृथक्करण, कचरा संग्रहण की प्रभावी व्यवस्था और ठोस कचरा प्रबंधन प्रणाली पर विस्तार से चर्चा हुई। दूसरे सत्र में शहरी जल निकासी व्यवस्था, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) और तरल अपशिष्ट प्रबंधन जैसे विषयों पर विशेषज्ञों ने व्यावहारिक समाधान और सफल मॉडलों की जानकारी साझा की।

समस्याओं से जूझ रहे प्रशासन की ताकत बनें: जी. श्रीकांत
छत्रपति संभाजीनगर महानगरपालिका के आयुक्त एवं प्रशासक जी. श्रीकांत ने अपने प्रेरक संबोधन में कहा कि जिस परिवार की मुखिया महिला होती है, वहां विकास की गति तेज होती है। जालना जिले में भी जिलाधिकारी अशिमा मित्तल और जिला परिषद की मुख्य कार्यकारी अधिकारी मिन्नू पी.एम. जैसी सक्षम महिला अधिकारी जमीनी स्तर पर समस्याओं से जूझते हुए समाधान की दिशा में काम कर रही हैं।
उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे प्रशासन की “तलवार की धार” बनें। संपर्क, संवाद और समाधान के बिना विकास संभव नहीं है। अधिकारी आते-जाते रहते हैं, लेकिन शहर के विकास की निरंतर जिम्मेदारी नागरिकों की ही होती है। उन्होंने छत्रपति संभाजीनगर में शहर और नदी स्वच्छता के लिए अपनाए गए उपायों का उल्लेख करते हुए जालना महानगरपालिका को सेवानिवृत्त स्वच्छता निरीक्षकों, सेवाभावी संस्थाओं और समर्पित नागरिकों का सहयोग लेने की सलाह दी।
क्या हम अगली पीढ़ी को कचरे का बोझ सौंपेंगे? – श्रुति लुटे-कुलकर्णी
कार्पल्स कंसल्टिंग की मैनेजिंग पार्टनर श्रुति लुटे-कुलकर्णी ने गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि हम अपनी अगली पीढ़ी के लिए संपत्ति, धन और ज्ञान छोड़ते हैं, लेकिन यदि समय रहते सचेत नहीं हुए तो कचरे के पहाड़ भी छोड़ जाएंगे।
उन्होंने बताया कि जालना शहर में प्रतिदिन लगभग 150 टन कचरा उत्पन्न हो रहा है। उचित प्रक्रिया और प्रबंधन के अभाव में ठोस और तरल कचरे के ढेर लग रहे हैं, जिससे वायु, जल और भूमि प्रदूषण गंभीर स्तर पर पहुंच चुका है। उन्होंने कचरा प्रबंधन में विचार को क्रियान्वयन में बदलने और इसके लिए नागरिकों से जालना फर्स्ट के साथ समर्पित भाव से जुड़ने का आह्वान किया।
जालना फर्स्ट के प्रयासों को प्रशासन का पूरा सहयोग: अशिमा मित्तल
जिलाधिकारी अशिमा मित्तल ने कहा कि जालना फर्स्ट द्वारा आयोजित मंथन परिषद की संकल्पना अत्यंत सराहनीय है और जिला प्रशासन उनके हर सकारात्मक प्रयास को पूरा सहयोग देगा। उन्होंने यह भी कहा कि जालना की सेवाभावी संस्थाएं शहर के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं, जिस पर पूरे जिले को गर्व है। साथ ही उन्होंने आगामी चुनावों में अधिक से अधिक मतदान कर लोकतंत्र को सशक्त बनाने की अपील भी की।
घनवन परियोजना बनी प्रेरणा: मिन्नू पी.एम.
जिला परिषद की मुख्य कार्यकारी अधिकारी मिन्नू पी.एम. ने जालना फर्स्ट द्वारा जिला परिषद परिसर में विकसित घनवन परियोजना को एक आदर्श और दिशादर्शक पहल बताया। उन्होंने विश्वास जताया कि जालना फर्स्ट के साथ मिलकर जिला परिषद के माध्यम से भविष्य में भी विभिन्न पर्यावरणीय और विकासात्मक उपक्रम चलाए जाएंगे, जिससे शहर के सौंदर्यीकरण और सतत विकास को गति मिलेगी।
नदी, जलवायु और शहर का गहरा संबंध: प्रो. ए.के. गोसाईन
आईआईटी दिल्ली के प्रोफेसर ए.के. गोसाईन ने ऑनलाइन सहभागिता करते हुए कहा कि नदी, जलवायु और शहर एक-दूसरे पर गहराई से निर्भर हैं। जलवायु परिवर्तन का सीधा असर नदियों के प्रवाह पर पड़ता है, जिसका प्रभाव शहरों की जल आपूर्ति, बाढ़ प्रबंधन और पर्यावरण पर दिखाई देता है। अनियोजित शहरीकरण से नदियों के प्राकृतिक प्रवाह में बाधा आती है, जिससे चरम मौसम की घटनाएं और गंभीर हो जाती हैं। सतत शहरी विकास के लिए नदी प्रबंधन और जलवायु की वैज्ञानिक समझ का समन्वय अत्यंत आवश्यक है।
मंत्राज ग्रीन रिसोर्सेज लिमिटेड के चीफ प्रमोटर एवं चेयरमैन डॉ. यू.के. शर्मा ने कहा कि जिस तरह वित्तीय नियोजन के लिए चार्टर्ड अकाउंटेंट और स्वास्थ्य के लिए डॉक्टर जरूरी होते हैं, उसी तरह नगरपालिकाओं को पर्यावरण संरक्षण के लिए विशेषज्ञ सलाहकार नियुक्त करना चाहिए। उन्होंने बताया कि कचरे से सीएनजी, हाइड्रोजन और अन्य ऊर्जा परियोजनाएं संभव हैं तथा भविष्य में कचरे का उपयोग ईंधन और उर्वरक के रूप में भी किया जा सकता है।

पर्यावरण संरक्षण के लिए विशेषज्ञ सलाहकार जरूरी: डॉ. यू.के. शर्मा
जालना युवा फर्स्ट का प्रयास सराहनीय: गौरी मिरासे
इको सत्व की सह-संस्थापक गौरी मिरासे ने कहा कि मौसमी नदियों की वैज्ञानिक पद्धति से सफाई पूरी तरह संभव है। उन्होंने नदियों में आने वाले कपड़े और प्लास्टिक कचरे को समय पर अलग करने और रोकने के व्यावहारिक उपाय बताए। उन्होंने कहा कि आज की युवा पीढ़ी जल और नदी समस्याओं से दूरी बना रही है, लेकिन जालना में जालना फर्स्ट की युवा टीम द्वारा जनजागरूकता और समाधान के लिए किया गया प्रयास अत्यंत प्रशंसनीय है।
आगामी 20 वर्षों को ध्यान में रखकर हों परियोजनाएं: अमोल गजरे
एन्वर्सिस ग्रीनटेक सॉल्यूशंस के निदेशक अमोल गजरे ने कहा कि सीवेज वॉटर ट्रीटमेंट और उसके पुनः उपयोग से जल संरक्षण के साथ-साथ जलजनित बीमारियों पर भी नियंत्रण पाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि भारत में औसतन 37 प्रतिशत पानी का पुनः उपयोग होता है, जबकि महाराष्ट्र में यह आंकड़ा बढ़कर लगभग 70 प्रतिशत तक पहुंच गया है। जालना में भी किसी भी परियोजना की योजना आगामी 20 वर्षों की जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाई जानी चाहिए, जिसके लिए कुशल टीम, नियमित रखरखाव और सुदृढ़ प्रयोगशाला व्यवस्था जरूरी है।
पानी और नदियों का स्वास्थ्य जुड़ा होना चाहिए: डॉ. सुमंत पांडे
वॉटर लिटरेसी सेंटर (यशदा, पुणे) के कार्यकारी निदेशक डॉ. सुमंत पांडे ने कहा कि दूषित पानी गंभीर बीमारियों का कारण बनता है। उन्होंने कुंडलिका–सीना नदी पुनर्जीवन पर कार्य कर रही सेवाभावी संस्थाओं का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि पानी और नदियों का स्वास्थ्य एक-दूसरे से गहराई से जुड़ा है। उन्होंने जालना फर्स्ट को हरसंभव सहयोग का आश्वासन भी दिया।
सामूहिक प्रयास से ही संभव है शहर का विकास
कार्यक्रम के प्रास्ताविक भाषण में जालना फर्स्ट के अध्यक्ष गोविंद गोयल ने कहा कि प्रगति और विकास में समाज के हर घटक का योगदान आवश्यक है। इसी उद्देश्य से जिला प्रशासन, सेवाभावी संस्थाओं और उद्यमियों को एक मंच पर लाने के लिए जालना फर्स्ट की स्थापना की गई है। कार्यक्रम में अर्बन प्लानर एवं डिजाइनशाला कोलैबोरेटिव के फाउंडर व प्रिंसिपल आर्किटेक्ट आशिक जैन और राजेंद्र जावले ने भी मार्गदर्शन किया।
कार्यक्रम की शुरुआत में घनश्याम गोयल, संजय अग्रवाल, काजल पटेल, डी.बी. सोनी, डॉ. सौ. अनिता तवरावाला, डॉ. अनुराधा राख और यश भक्कड़ ने अतिथियों का स्वागत किया। कार्यक्रम का संचालन धवल मिश्रीकोटकर ने किया, जबकि अंत में विनीत पित्ती और रितेश मिश्रा ने उपस्थितों का आभार व्यक्त किया।

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