कुरैशी समाज की हड़ताल को फेडरेशन का समर्थन, सरकार पर भेदभाव और हिंसा पर मौन का आरोप
🗓️ स्थान: जालना | दिनांक: 17 जुलाई 2025
फेडरेशन ऑफ महाराष्ट्र मुस्लिम्स ने प्रदेश में जारी कुरैशी समाज की अनिश्चितकालीन हड़ताल को समर्थन देते हुए राज्य सरकार पर मांस व्यापार के नाम पर हो रही हिंसा और पक्षपात का आरोप लगाया है।
हड़ताल मजबूरी में लिया गया कदम
फेडरेशन के अनुसार, पशु वाहनों को जबरन रोकने, मुस्लिम व्यापारियों पर हमलों और प्रशासन की निष्क्रियता ने कुरैशी समाज को हड़ताल करने पर मजबूर किया है। यह आंदोलन केवल एक समुदाय नहीं बल्कि न्याय और अधिकारों की लड़ाई है।
सरकार पर पक्षपात का आरोप
फेडरेशन के समन्वयक अब्दुल मुजीब ने कहा कि सरकार हर साल दो करोड़ नौकरियों का वादा कर सत्ता में आई थी, लेकिन अब अपनी नीतियों से लाखों लोगों को बेरोजगार कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार मांस व्यापार को अपने चहेतों को सौंपना चाहती है और इसी कारण उग्र संगठनों पर कार्रवाई नहीं की जा रही है।
किसानों पर भी गहराता संकट
हड़ताल का असर मांस व्यापार तक ही सीमित नहीं है। मंडियों में जानवर लेकर पहुंचने वाले किसानों को खरीदार नहीं मिल रहे हैं, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। पहले ही सरकार की नीतियों से जूझ रहे किसान अब और अधिक संकट में हैं।
आत्महत्याओं की आशंका
फेडरेशन ने चेतावनी दी है कि यह स्थिति अगर बनी रही तो आत्महत्याओं की घटनाओं में इजाफा हो सकता है। किसान पहले ही कर्ज और बाज़ार की अस्थिरता से परेशान हैं और अब इस तरह की नीतियां उन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाल रही हैं।
सरकार से त्वरित कार्रवाई की मांग
फेडरेशन ऑफ महाराष्ट्र मुस्लिम्स ने सरकार से मांग की है कि वह मांस व्यापारियों और कुरैशी समाज को सुरक्षा प्रदान करे, उग्रवादी संगठनों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करे और किसानों की समस्याओं का तत्काल समाधान निकाले।
✍️ यह संयुक्त प्रेस विज्ञप्ति महाराष्ट्र मुस्लिम फेडरेशन द्वारा जारी की गई है।
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