चाहे गोलियां भी चलें, हम पीछे नहीं हटेंगे: मनोज जरांगे पाटिल का आज़ाद मैदान में ऐतिहासिक भाषण
मुंबई के आज़ाद मैदान में 29 अगस्त 2025 को मराठा आरक्षण की मांग को लेकर आयोजित प्रदर्शन में सामाजिक कार्यकर्ता मनोज जरांगे पाटिल ने एक जोशीला भाषण दिया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, “चाहे गोलियां भी चलें, हम पीछे नहीं हटेंगे,” जिससे आंदोलन की गंभीरता और दृढ़ता का संदेश मिला।
आंदोलन की पृष्ठभूमि
मनोज जरांगे पाटिल का यह आंदोलन पिछले कुछ समय से चल रहे संघर्ष का हिस्सा है। उन्होंने पहले भी कई बार उपोषण किया है, लेकिन सरकार की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए। इस बार उन्होंने मुंबई में आकर आंदोलन को और तेज करने का निर्णय लिया।
आज़ाद मैदान में भाषण की मुख्य बातें
- शांति और अनुशासन का आह्वान: जरांगे पाटिल ने उपस्थित लोगों से कहा कि कोई भी आगजनी या पत्थरबाजी न करें। उन्होंने जोर देकर कहा कि आंदोलन को हिंसक रूप नहीं दिया जाएगा।
- उपोर्षण की घोषणा: “आज़ाद मैदान पर तय कार्यक्रम के अनुसार हम आए हैं और उपोषण शुरू कर रहे हैं,” उन्होंने कहा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मांगों की पूरी पूर्ति होने तक वे मुंबई नहीं छोड़ेंगे।
- सहयोग और अनुशासन: पुलिस का सहयोग करें। शराब का सेवन न करें और हिंसा न फैलाएँ। समाज का सम्मान बनाए रखें, किसी भी तरह से नीचा मत दिखाएँ। आंदोलन का राजनीतिक लाभ लेने का कोई अवसर न दें।
- मोर्चे की घोषणाएँ: “मराठा समाज को विजय दिलाए बिना, डॉकोपर गुलाल नहीं डालेंगे।” “सरकार ने हमारा सहयोग किया है, अब हमें भी सहयोग करना चाहिए।” “मुझे गोली भी मारी जाए, लेकिन समाज की मांग पूरी होने तक पीछे नहीं हटूंगा।”
आंदोलन का प्रभाव
इस आंदोलन के कारण मुंबई में यातायात व्यवस्था प्रभावित हुई है। मुख्य मार्गों पर भारी जाम लगने से कार्यालय जाने वाले और छात्र-छात्राओं को कठिनाई का सामना करना पड़ा। पुलिस ने यातायात मार्गों में बदलाव और बंदी की घोषणा की है ताकि आंदोलन शांतिपूर्ण रूप से संपन्न हो सके।
सरकार की प्रतिक्रिया
महाराष्ट्र सरकार ने पहले इस आंदोलन के लिए एक दिन की अनुमति दी थी, जिसे मनोज जरांगे पाटिल ने अपमानजनक बताया। उन्होंने कहा कि यह मराठा समाज का अपमान है। सरकार ने बातचीत के लिए तैयार होने की बात कही है, लेकिन जरांगे पाटिल ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।
निष्कर्ष
मनोज जरांगे पाटिल का यह आंदोलन मराठा समुदाय के लिए एक निर्णायक संघर्ष बन गया है। उनकी स्पष्ट और दृढ़ नीतियाँ आंदोलन को एक नई दिशा दे रही हैं। अब यह देखना होगा कि सरकार इस आंदोलन के प्रति अपनी प्रतिक्रिया कैसे देती है और क्या मराठा समुदाय की मांगें पूरी होती हैं।

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