जालना में विज्ञापन राजस्व की पारदर्शिता की मांग: पादचारी पुल का खर्च यदि विज्ञापनों से वसूल हुआ तो पूरे राज्य के लिए ‘आदर्श मॉडल’
जालना: जालना जिला अधिकारी कार्यालय के समीप नागरिकों की सुविधा के लिए बनाए गए लोहे के पादचारी पुल पर प्रदर्शित होने वाले विज्ञापनों से महानगरपालिका को कितना राजस्व प्राप्त हो रहा है—यह जानकारी सार्वजनिक की जाए। यही मांग अधिवक्ता महेश एस. धन्नावत ने एक निवेदन के माध्यम से की है। उनका कहना है कि पुल पर लगातार विज्ञापन प्रदर्शित रहते हैं, और यदि पुल के निर्माण पर आया पूरा खर्च विज्ञापन शुल्क से वसूल हो चुका है, तो यह परियोजना पूरे राज्य के लिए एक आदर्श और स्वयंपूर्ण मॉडल बन सकती है।
धन्नावत ने कहा कि इस मॉडल के सफल होने पर शहर के स्कूलों और भीड़भाड़ वाले अन्य क्षेत्रों में भी ऐसे ही पादचारी पुलों के निर्माण की पहल की जा सकती है, जिससे विद्यार्थियों और नागरिकों की सुरक्षा बढ़ेगी।
अधिवक्ता धन्नावत ने कहा कि सार्वजनिक हित से जुड़े किसी भी प्रकल्प के खर्च और उससे होने वाले राजस्व की जानकारी नागरिकों के लिए उपलब्ध होना आवश्यक है। सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के अनुसार, प्रत्येक नागरिक को सरकारी कार्यों और वित्तीय लेनदेन की जानकारी प्राप्त करने का अधिकार है। अधिनियम की धारा 4 में स्पष्ट उल्लेख है कि सार्वजनिक प्राधिकरणों को इस प्रकार की जानकारी स्वतः सार्वजनिक करनी चाहिए, जिसमें प्रकल्पों का खर्च, करार और राजस्व संबंधी विवरण शामिल होते हैं।
उन्होंने कहा— “यदि इस पादचारी पुल के निर्माण पर होने वाला पूरा खर्च विज्ञापन राजस्व से वसूल हो गया है, तो यह अत्यंत सराहनीय है। इससे महानगरपालिका पर कोई आर्थिक बोझ नहीं आता और नागरिकों को आवश्यक सुविधा भी मिलती है। ऐसी स्वयंपूर्ण परियोजनाएँ शहर के स्कूलों, कॉलेजों और बाजार क्षेत्रों में विद्यार्थियों तथा नागरिकों की सुरक्षा बढ़ाने का माध्यम बन सकती हैं।”
धन्नावत ने आगे बताया कि कई सरकारी परियोजनाओं में खर्च संबंधी जानकारी सार्वजनिक करना अनिवार्य होता है। महाराष्ट्र सार्वजनिक निर्माण विभाग के नियमों एवं नागरिक सनद के अनुसार, प्रशासन का दायित्व है कि परियोजना की लागत, विज्ञापन एजेंसी से हुए करार तथा अब तक प्राप्त कुल राजस्व की जानकारी नागरिकों के लिए सहज उपलब्ध कराई जाए। इसलिए नगर पालिका को इन सभी विवरणों को तुरंत सार्वजनिक करना चाहिए।
अधिवक्ता धन्नावत के अनुसार, इन जानकारियों को सार्वजनिक करने से न केवल प्रशासन में पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि नागरिकों का विश्वास भी मजबूत होगा। साथ ही इस ‘जालना मॉडल’ का अध्ययन कर राज्य की अन्य नगरपालिकाएँ भी ऐसी स्वयंपूर्ण आधारभूत संरचना विकसित करने के लिए प्रेरित होंगी।

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