जालना एमआईडीसी फेज-3 में ड्रिप सिंचाई कंपनी में भीषण आग, दो घंटे बाद पाया गया काबू
जालना: औद्योगिक नगरी के रूप में पहचाने जाने वाले जालना के एमआईडीसी फेज-3 क्षेत्र में गुरुवार दोपहर करीब दो बजे एक गंभीर आगजनी की घटना सामने आई। ड्रिप (ठिंबक) सिंचाई सामग्री बनाने वाली एक कंपनी में अचानक भीषण आग लग गई, जिससे पूरे औद्योगिक परिसर में हड़कंप मच गया। आग की ऊंची लपटें और घना काला धुआं कई किलोमीटर दूर तक दिखाई दिया, जिससे आसपास के इलाकों में दहशत का माहौल बन गया।
प्राप्त प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, कंपनी के उत्पादन विभाग से अचानक धुआं उठता देखा गया। कुछ ही मिनटों में आग ने तेजी से फैलते हुए विकराल रूप धारण कर लिया। चूंकि यूनिट में बड़ी मात्रा में प्लास्टिक कच्चा माल और रसायनयुक्त सामग्री मौजूद थी, इसलिए आग पर नियंत्रण पाना चुनौतीपूर्ण हो गया। स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए कर्मचारियों ने तत्परता दिखाते हुए सुरक्षित रूप से बाहर निकलकर तुरंत अग्निशमन विभाग को सूचना दी।
सूचना मिलते ही जालना नगर अग्निशमन विभाग की चार दमकल गाड़ियां घटनास्थल पर पहुंचीं। करीब 80 लीटर विशेष अग्निशमन रसायनों का उपयोग कर आग बुझाने का अभियान शुरू किया गया। इस दौरान चंदनझीरा पुलिस थाना के पुलिस निरीक्षक बालासाहेब पवार के नेतृत्व में पुलिस बल भी मौके पर पहुंचा और क्षेत्र को सील कर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की, ताकि किसी प्रकार की अनहोनी न हो।
लगातार लगभग दो घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद अग्निशमन कर्मियों ने आग पर पूरी तरह नियंत्रण पा लिया। हालांकि, तब तक कंपनी को भारी नुकसान हो चुका था। इस आगजनी में बड़ी मात्रा में प्लास्टिक कच्चा माल, तैयार उत्पाद और कुछ अहम मशीनरी पूरी तरह जलकर नष्ट हो गई। आर्थिक क्षति का आधिकारिक आंकलन अभी शेष है, लेकिन प्रारंभिक अनुमान के अनुसार नुकसान करोड़ों रुपये में होने की आशंका जताई जा रही है।
आग लगने के सटीक कारणों का फिलहाल पता नहीं चल सका है। शॉर्ट सर्किट, रासायनिक प्रतिक्रिया या अग्नि-सुरक्षा मानकों में लापरवाही—इन सभी पहलुओं से जांच की जा रही है। प्रशासन यह भी जांच कर रहा है कि कंपनी में अग्नि-सुरक्षा उपकरण पूरी तरह कार्यरत थे या नहीं तथा नियमित फायर ऑडिट कराया गया था या नहीं।
राहत की बात यह रही कि इस भीषण हादसे में किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई। लेकिन इस घटना ने औद्योगिक क्षेत्रों में सुरक्षा मानकों और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय नागरिकों और औद्योगिक संगठनों की ओर से मांग की जा रही है कि प्रशासन मामले की गहन जांच कर वास्तविक कारणों का खुलासा करे और यदि किसी स्तर पर लापरवाही पाई जाती है तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
घटना के बाद एमआईडीसी प्रशासन ने क्षेत्र की अन्य औद्योगिक इकाइयों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं और अग्नि-सुरक्षा उपायों की तत्काल समीक्षा व जांच कराने पर जोर दिया है।
इस आग बुझाने की कार्रवाई में अग्निशमन अधिकारी माधव पानपट्टे के मार्गदर्शन में प्रभारी अग्निशमन अधिकारी एस. बी. दराडे, फायरमैन संतोष काले, नितेश ढाकणे, रविनाथ बनसोडे, जॉन गवली, सादिक अली, यंत्र चालक विनायक चव्हाण, पंजाबराव देशमुख तथा वाहन चालकों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
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