जालना: आठ साल की शमाईल ने रखा पहला रोज़ा, परिवार और मोहल्ले में खुशी की लहर
जालना | प्रतिनिधि
पवित्र रमज़ान माह के दौरान जालना शहर के पेंशनपुरा क्षेत्र में एक खास खुशी का माहौल देखने को मिला, जब मौलाना आरीफ रहमानी की पुत्री शमाईल आरीफ रहमानी ने मात्र आठ वर्ष की आयु में अपना पहला रोज़ा रखा।
इतनी कम उम्र में पूरे दिन रोज़ा रखना आसान नहीं होता, लेकिन शमाईल ने उत्साह, धैर्य और दृढ़ संकल्प के साथ अपना पहला रोज़ा सफलतापूर्वक पूरा किया।
परिवार में जश्न जैसा माहौल
रोज़ा पूरा होने के बाद घर में खुशी का वातावरण बन गया। परिजनों ने शमाईल को गले लगाकर दुआएं दीं और उसके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
उनके दादा शेख कलीम घड़ीसाज़, ताया शेख इमरान, चाचा शेख आसीफ के साथ शेख हस्सान, शेख तुफैल, शेख तुबा और परिवार के अन्य सदस्यों ने भी शमाईल की हौसला-अफजाई की। सभी ने उसके जज़्बे की सराहना करते हुए उसे बधाई दी।
बचपन से ही धार्मिक संस्कार
परिवार के सदस्यों ने बताया कि रमज़ान का महीना बच्चों को सब्र, अनुशासन और इबादत का महत्व सिखाने का अवसर देता है। छोटे बच्चों को धीरे-धीरे रोज़े की अहमियत समझाई जाती है, ताकि उनमें धार्मिक और नैतिक मूल्यों का विकास हो सके।
शमाईल ने पूरे उत्साह और खुशी के साथ अपना पहला रोज़ा रखकर यह साबित कर दिया कि उम्र भले ही कम हो, लेकिन हौसला और नीयत मजबूत हो तो हर काम संभव है।
समाज की ओर से शुभकामनाएं
मोहल्ले के लोगों ने भी शमाईल को शुभकामनाएं दीं और कहा कि ऐसे संस्कार बच्चों में बचपन से विकसित हों, तो वे आगे चलकर जिम्मेदार और समझदार नागरिक बनते हैं।
शमाईल के इस पहले रोज़े ने न सिर्फ परिवार, बल्कि पूरे क्षेत्र में खुशियों की लहर पैदा कर दी।
शमाईल पहला रोज़ा जालना.

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