जालना: छह साल के अरिश ने रखा पहला रोज़ा, परिवार और मोहल्ले में खुशी का माहौल
जालना | प्रतिनिधि
पवित्र रमज़ान माह के दौरान जालना के दुखी नगर क्षेत्र में एक खास खुशी का अवसर देखने को मिला। स्थानीय अधिवक्ता अरशद बागवान के सुपुत्र अरिश अरशद खान बागवान ने मात्र छह वर्ष की आयु में अपना पहला रोज़ा रखा और पूरे दिन का रोज़ा सफलतापूर्वक पूरा किया।
इतनी छोटी उम्र में रोज़ा रखना आसान नहीं होता, लेकिन अरिश ने पूरे उत्साह, धैर्य और आत्मविश्वास के साथ अपना पहला रोज़ा रखा। परिवार के अनुसार, अरिश ने सुबह सहरी से लेकर शाम इफ़्तार तक पूरे नियमों का पालन किया और किसी भी प्रकार की शिकायत नहीं की।
घर में जश्न जैसा माहौल
रोज़ा पूरा होने के बाद घर में खुशी का वातावरण बन गया। दादा-दादी सहित परिवार के सभी सदस्यों ने अरिश को गले लगाकर दुआएं दीं और उसके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
मोहल्ले के लोगों ने भी अरिश की सराहना की और उसके जज़्बे को प्रेरणादायक बताया। सभी ने उसे शाबाशी देते हुए कहा कि इतनी कम उम्र में रोज़ा रखना अनुशासन और आस्था का प्रतीक है।
बचपन से धार्मिक और नैतिक शिक्षा
परिवार के सदस्यों ने बताया कि रमज़ान का महीना बच्चों को सब्र, संयम और इबादत का महत्व सिखाने का अवसर देता है। छोटे बच्चों को धीरे-धीरे रोज़े की अहमियत समझाई जाती है, ताकि उनमें अनुशासन और धार्मिक मूल्यों का विकास हो सके।
अरिश ने अपने पहले रोज़े के माध्यम से यह दिखा दिया कि अगर बचपन से अच्छे संस्कार दिए जाएं, तो बच्चे आगे चलकर जिम्मेदार और संवेदनशील नागरिक बन सकते हैं।
समाज के लिए प्रेरणा
मोहल्ले के लोगों का कहना है कि ऐसे अवसर बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। अरिश का पहला रोज़ा न केवल उसके परिवार के लिए गर्व का विषय बना, बल्कि आसपास के लोगों के लिए भी प्रेरणा साबित हुआ।

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