आज़ादी की जंग में मुसलमानों की कुर्बानियों को कोई मिटा नहीं सकता — मौलाना मिस्बाही
खरपुडी रोड स्थित दारुल उलूम रजविया लतीफिया मिसबाहउल उलूम का प्रांगण आजादी के रंगों से सराबोर दिखा। मदरसे के मोहतमिम मौलाना गुलाम जिलानी मिस्बाही की सरपरस्ती में जश्ने-आज़ादी का कार्यक्रम उत्साह और देशभक्ति के साथ संपन्न हुआ।
कार्यक्रम की शुरुआत छात्रों मोहम्मद नासिर और मोहम्मद अरमान द्वारा पेश किए गए “तराना-ए-हिंद” से हुई, जिसने पूरे माहौल में हुब्बुल-वतन की भावना उभार दी। इस अवसर पर शिक्षक हाफिज रिजवान, हाफिज फैयाज और हाफिज मुबारक समेत अन्य गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।
- मुख्य अतिथि: मौलाना गुलाम जिलानी मिस्बाही (मोहतमिम)
- कलाकार: मोहम्मद नासिर, मोहम्मद अरमान
- शिक्षक व अन्य उपस्थितगण: हाफिज रिजवान, हाफिज फैयाज, हाफिज मुबारक
संस्था परिसर में जब तिरंगा लहराया गया, तो वतनपरस्ती के नारे गूंज उठे और मौजूद सभी ने मिलकर स्वतंत्रता सेनानियों व शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की।
“भारत की आज़ादी की लड़ाई में मुसलमानों की कुर्बानियां किसी से छिपी नहीं हैं। बहादुर शाह ज़फ़र से लेकर मौलाना अबुल कलाम आज़ाद और हजारों उलेमा-ए-हिंद ने अपने खून से आज़ादी की कहानी लिखी। आज़ादी हासिल करना पहला मक़सद था, और अब इस मुल्क की तरक्की में अपना किरदार अदा करना हमारी जिम्मेदारी है। मुसलमानों को शिक्षा, व्यापार, विज्ञान और समाज सेवा के हर क्षेत्र में आगे बढ़कर हिस्सा लेना चाहिए, ताकि हिंदुस्तान दुनियाभर में तरक्की और अमन का पैगाम दे सके।”
मौलाना ने कहा कि यह दिन सिर्फ शहीदों की यादों के लिए नहीं है, बल्कि यह हमें यह अहसास भी कराता है कि हर नागरिक मिलकर वतन को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाने का जिम्मा निभाए।


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Imran Siddiqui
Website: http://imranjalna.wordpress.com
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