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बशीर बद्र: जिस को गले लगा लिया, वो दूर हो गया…

बशीर बद्र: शायरी का वो एहसास… जो दिल की ज़ुबान बन गया

उर्दू शायरी की दुनिया में कुछ नाम ऐसे होते हैं जो शब्दों से नहीं, एहसासों से पहचाने जाते हैं — उन्हीं में से एक नाम है बशीर बद्र। उनकी शायरी मोहब्बत, तन्हाई, जुदाई, सामाजिक विडंबनाओं और रिश्तों की उलझनों का गहराई से बयान करती है। उनके शेर ज़िंदगी की अधूरी कहानियों का पूरा बयान हैं।

अच्छा तुम्हारे शहर का दस्तूर हो गया
जिस को गले लगा लिया वो दूर हो गया

बशीर बद्र: एक परिचय

  • पूरा नाम: सैयद मोहम्मद बशीर
  • जन्म: 15 फरवरी 1935, अयोध्या
  • शिक्षा: अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से एम.ए. व पीएच.डी
  • शैली: ग़ज़ल, नज़्म, सामाजिक एवं प्रेम आधारित शायरी
  • सम्मान: साहित्य अकादमी पुरस्कार समेत अनेक पुरस्कार

शायरी जो दिल में उतर जाती है

काग़ज़ में दब के मर गए कीड़े किताब के
दीवाना बे-पढ़े-लिखे मशहूर हो गया

महलों में हम ने कितने सितारे सजा दिए
लेकिन ज़मीं से चाँद बहुत दूर हो गया

तन्हाइयों ने तोड़ दी हम दोनों की अना!
आईना बात करने पे मजबूर हो गया

दादी से कहना उस की कहानी सुनाइए
जो बादशाह इश्क़ में मज़दूर हो गया

सुब्ह-ए-विसाल पूछ रही है अजब सवाल
वो पास आ गया कि बहुत दूर हो गया

कुछ फल ज़रूर आएँगे रोटी के पेड़ में
जिस दिन मिरा मुतालबा मंज़ूर हो गया

बशीर बद्र की शायरी की विशेषताएं

  • सरल शब्दों में गहरी भावनाएं
  • मोहब्बत, तन्हाई और सामाजिक कटाक्ष का समन्वय
  • हर शेर एक कहानी, एक अनुभव
  • आधुनिक युवाओं से लेकर वरिष्ठ साहित्य प्रेमियों तक प्रिय

निष्कर्ष

“जिस को गले लगा लिया, वो दूर हो गया” — यह शेर केवल मोहब्बत की पीड़ा नहीं, बल्कि रिश्तों की सच्चाई है।
बशीर बद्र की शायरी हर दिल की जुबान है। वो लफ़्ज़ों में वो बातें कह जाते हैं, जिन्हें लोग ताउम्र महसूस करते हैं पर कह नहीं पाते।

उनकी शायरी ज़माने की किताब नहीं, दिलों की डायरी है।


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Imran Siddiqui

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