NewsNation Online

FireFly In News

जालना बजट में गरजीं दर्शना झोल-खोतकर: दलित बस्तियों के लिए फंड बढ़ाने और रुकी आवास योजना राशि जारी करने की मांग तेज

दर्शना झोल-खोतकर का जालना बजट में हमला: दलित बस्तियों के लिए फंड बढ़ाने की मांग

जालना नगर निगम की बजट बैठक उस समय चर्चा का केंद्र बन गई जब नगरसेविका दर्शना झोल-खोतकर ने दलित बस्तियों के विकास को लेकर प्रशासन पर सीधा हमला बोला। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि शहर का वास्तविक और संतुलित विकास करना है, तो दलित बस्तियों के लिए अलग और पर्याप्त फंड का प्रावधान अनिवार्य है। बैठक के दौरान उन्होंने बजट में इन क्षेत्रों के लिए अपर्याप्त धनराशि दिए जाने पर कड़ी आपत्ति जताई और इसे “जमीनी हकीकत से दूर बजट” बताया।


“यह सिर्फ विकास नहीं, सामाजिक न्याय का मुद्दा”

दर्शना झोल-खोतकर ने कहा कि दलित बस्तियों का विकास केवल बुनियादी सुविधाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सामाजिक न्याय, समान अवसर और नागरिकों के मूल अधिकारों से जुड़ा हुआ है।

उन्होंने बताया कि जालना शहर की कई दलित बस्तियों में आज भी:

  • पक्की सड़कों का अभाव
  • स्वच्छ पेयजल की कमी
  • नालियों और सफाई व्यवस्था की खराब स्थिति
  • बिजली और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी

जैसी समस्याएं बनी हुई हैं। ऐसे में मौजूदा बजट इन समस्याओं को दूर करने के लिए पर्याप्त नहीं है।


प्रशासन को दी सख्त चेतावनी

उन्होंने कहा कि नगर निगम को केवल कागजी विकास तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि जमीन पर ठोस कार्य करना जरूरी है। यदि वंचित वर्गों को प्राथमिकता नहीं दी गई, तो “समावेशी विकास” केवल एक नारा बनकर रह जाएगा।


प्रधानमंत्री आवास योजना पर भी उठाए सवाल

दर्शना झोल-खोतकर ने प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत स्वीकृत लेकिन लंबित फंड का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया।

उन्होंने कहा कि शहर के कई गरीब और जरूरतमंद परिवार अपने घर का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन फंड जारी न होने के कारण उनके मकान अधूरे पड़े हैं।

👉 योजना की आधिकारिक जानकारी यहां देखें:
🔗 https://pmaymis.gov.in/

उन्होंने आरोप लगाया कि फंड वितरण में देरी गरीबों के अधिकारों के साथ अन्याय है और प्रशासन को इस पर तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए।


सभागार में रखीं ये प्रमुख मांगें

दर्शना झोल-खोतकर ने प्रशासन के सामने निम्नलिखित मांगें रखीं:

  • दलित बस्तियों के लिए अलग और बढ़ा हुआ बजट तय किया जाए
  • प्रधानमंत्री आवास योजना का लंबित फंड तुरंत जारी किया जाए
  • अधूरे मकानों का निर्माण समयबद्ध तरीके से पूरा कराया जाए
  • सभी विकास कार्यों में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए

आक्रामक अंदाज में रखा पक्ष, चर्चा का केंद्र बनीं

बजट चर्चा के दौरान उनका अंदाज आक्रामक लेकिन तथ्यों पर आधारित रहा। उनके सवालों ने प्रशासन को जवाब देने पर मजबूर कर दिया और कुछ समय के लिए सभागार में इस मुद्दे पर गंभीर बहस छिड़ गई।

उन्होंने स्पष्ट किया कि यह मांग राजनीतिक नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी से जुड़ी हुई है।


समावेशी विकास पर दिया जोर

अपने संबोधन के अंत में उन्होंने कहा कि जालना शहर का विकास केवल बड़े प्रोजेक्ट्स, सड़कों और इमारतों तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि यह समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए।

दलित बस्तियों, झुग्गी क्षेत्रों और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को विकास के केंद्र में रखे बिना किसी भी शहर का वास्तविक विकास संभव नहीं है।


📌 निष्कर्ष:
जालना नगर निगम की इस बजट बैठक में उठे मुद्दों ने प्रशासन की प्राथमिकताओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि दलित बस्तियों के विकास और आवास योजना के लंबित फंड को लेकर प्रशासन क्या ठोस कदम उठाता है।

जालना नगर निगम बजट 2026, दलित बस्तियों का विकास, जालना प्रधानमंत्री आवास योजना फंड रुका, Jalna Municipal Corporation Budget News, Darshana Zole Khotkar News, दर्शना झोल-खोतकर जालना बजट

A woman speaking at a conference table while others listen attentively in a formal setting.
Darshana Zole Khotkar passionately addressing the Jalna Municipal Corporation budget meeting advocating for increased funding for Dalit communities
A woman speaks into a microphone in a formal meeting setting, with seated attendees in the background, including both men and women in traditional and formal attire.
Darshana Zole Khotkar addressing the Jalna Municipal Corporation budget meeting highlighting the need for increased funding for Dalit communities

Discover more from NewsNation Online

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

आपके लिए सुझाव

author avatar
NewsNationOnline Team

Discover more from NewsNation Online

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading