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“इश्क़ पर पहरा! दो महीने तक जंजीरों में कैद, हाईकोर्ट के आदेश पर पुलिस ने तोड़ी बेड़ियां”

“Guarding love! Imprisoned in chains for two months, police broke the shackles on the orders of the High Court”

जालना: आंतरधार्मिक विवाह से नाराज़ परिवार ने एक विवाहित महिला को दो महीने तक घर में कैद रखा, पैरों में जंजीरें बांध दीं और पति को घर से निकाल दिया. जब मामला छत्रपति संभाजीनगर उच्च न्यायालय तक पहुंचा, तो पुलिस ने कार्रवाई कर महिला को आज़ाद कराया और उसे उसके पति के सुपुर्द कर दिया.

भोकरदन के आलापुर निवासी खालिद शहा सिकंदर शहा की बेटी शहनाज़ उर्फ सोनल ने मिसालवाड़ी निवासी सागर संजय ढगे से आंतरधार्मिक विवाह किया था. शादी के बाद शहनाज़ को तीन वर्षीय पुत्र कार्तिक भी हुआ.लेकिन यह विवाह उसके परिवार को मंजूर नहीं था.

*साजिश के तहत मायके बुलाया, पति को घर से निकाला

करीब दो महीने पहले, जब शहनाज़ की बड़ी बहन की डिलीवरी हुई, तो उसकी मां ने उसे और सागर को आलापुर बुलाया. वहां पहुंचते ही, सागर को घर से निकाल दिया गया और शहनाज़ को उसके बेटे के साथ कैद कर लिया गया.
7 दिसंबर को जब सागर पत्नी को लेने पहुंचा, तो परिवार ने धमकी दी कि वे शहनाज़ की दोबारा शादी करवाएंगे. उसके साथ गाली-गलौज की और जान से मारने की धमकी देकर भगा दिया.

*गुप्त फोन कॉल से हुआ खुलासा, कोर्ट के आदेश पर हुई कार्रवाई

24 दिसंबर को शहनाज़ की बहन ने सागर को फोन कर बताया कि उसकी पत्नी और बेटे को जबरन कैद में रखा गया है और उनकी जान को खतरा है. इसके बाद, सागर ने उच्च न्यायालय में अपील दायर की.

कोर्ट के आदेश पर भोकरदन पुलिस हरकत में आई. पुलिस निरीक्षक किरण बिडवे के नेतृत्व में उपनिरीक्षक बी.टी. सहाने और महिला पुलिसकर्मी सीमा देठे को यह मिशन सौंपा गया.

*पुलिस पहुंची तो हुआ जमकर विरोध, फिर तोड़ी गईं जंजीरें

जब पुलिस आलापुर पहुंची, तो शहनाज़ की मां ने उन्हें अंदर नहीं आने दिया. मगर पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर घर में प्रवेश किया और शहनाज़ व उसके बेटे को अपने कब्जे में लिया.

जब पुलिस ने महिला को आज़ाद किया, तो पाया कि उसके दोनों पैरों में भारी जंजीरें थीं, जिनमें दो ताले लगे थे.पुलिस ने नकली चाबी बनवाकर ताले खोले और उसे मुक्त किया.

*कोर्ट ने दिया इंसाफ, पति को सौंपी पत्नी और बच्चा

29 जनवरी को पुलिस ने शहनाज़ और उसके बेटे को उच्च न्यायालय में पेश किया. सरकारी अभिभाषक ए.आर. काले के माध्यम से सुनवाई के बाद, न्यायालय ने महिला को उसके पति सागर ढगे के सुपुर्द कर दिया.

यह घटना समाज के उन दकियानूसी विचारों पर करारा तमाचा है, जो आज भी प्रेम और विवाह पर पहरा लगाने की कोशिश कर रहे हैं.


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Imran Siddiqui

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