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Dombivli Lezim Dance Guinness Record – डोंबिवली की महिलाओं ने बनाया नया इतिहास, हजारों प्रतिभागियों के साथ टूटा पुराना विश्व रिकॉर्ड

Dombivli Lezim Dance Guinness Record created by thousands of women performing traditional dance in Maharashtra

Dombivli Lezim Dance Guinness Record की खबर महाराष्ट्र में चर्चा का विषय बन गई है। डोंबिवली की हजारों महिलाओं ने एक साथ पारंपरिक लेझीम नृत्य करके नया विश्व रिकॉर्ड बनाया है।यह आयोजन डोंबिवली के V.H.B.P. संत सावलाराम महाराज म्हात्रे स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में आयोजित किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिलाओं ने एक साथ ताल और लय में लेझीम नृत्य प्रस्तुत किया।

इस कार्यक्रम का महत्व इसलिए भी बढ़ गया क्योंकि इससे पहले 2014 में सांगली में 7,338 प्रतिभागियों का रिकॉर्ड बना था। डोंबिवली के इस आयोजन ने उस रिकॉर्ड को पार कर दिया। इसी वजह से Dombivli Lezim Dance Guinness Record अब पूरे राज्य में चर्चा का विषय बन गया है।

किस संस्था ने किया आयोजन

इस कार्यक्रम का आयोजन डोंबिवलीकर एक सांस्कृतिक परिवार और कल्याण तालुका शारीरिक शिक्षण समिति ने मिलकर किया।

कार्यक्रम को स्थानीय स्तर पर कई सामाजिक संगठनों का सहयोग भी मिला। इस आयोजन में स्थानीय जनप्रतिनिधियों और सांस्कृतिक समूहों ने भी भाग लिया।

कार्यक्रम के दौरान Guinness World Records के आधिकारिक निर्णायक स्वप्निल डांगरेकर भी मौजूद थे। उन्होंने पूरे आयोजन का निरीक्षण किया और रिकॉर्ड की पुष्टि की। इसी के साथ Dombivli Lezim Dance Guinness Record आधिकारिक रूप से घोषित किया गया।

क्या निर्णय या घोषणा हुई

कार्यक्रम के अंत में Guinness World Records के प्रतिनिधि ने घोषणा की कि डोंबिवली में आयोजित यह लेझीम नृत्य कार्यक्रम नया विश्व रिकॉर्ड बन गया है।

इस घोषणा के बाद प्रमाणपत्र आधिकारिक तौर पर कार्यक्रम के आयोजकों को सौंपा गया। प्रमाणपत्र सुहासिनी रविंद्र चव्हाण को दिया गया, जिसके बाद वहां मौजूद लोगों ने जोरदार तालियों और उत्साह के साथ इस उपलब्धि का स्वागत किया।

इस तरह Dombivli Lezim Dance Guinness Record को आधिकारिक मान्यता मिल गई।

आयोजन से जुड़े आंकड़े और तथ्य

इस कार्यक्रम से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं।

  • आयोजन स्थान: V.H.B.P. संत सावलाराम महाराज म्हात्रे स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स, डोंबिवली
  • प्रतिभागी: हजारों महिलाएं
  • पिछला रिकॉर्ड: 7,338 प्रतिभागी (सांगली, 2014)
  • आयोजन का उद्देश्य: पारंपरिक लोक कला को बढ़ावा देना
  • आधिकारिक पुष्टि: Guinness World Records के निर्णायक द्वारा

कार्यक्रम में सभी प्रतिभागियों ने रंगीन पारंपरिक पोशाक पहनकर लेझीम नृत्य प्रस्तुत किया। इसी सामूहिक प्रस्तुति के कारण Dombivli Lezim Dance Guinness Record संभव हो पाया।

किन लोगों के लिए यह उपलब्धि खास ह

यह उपलब्धि कई लोगों के लिए खास बन गई है।

  • डोंबिवली की स्थानीय महिलाएं
  • महाराष्ट्र के लोक कला समूह
  • सांस्कृतिक संगठन
  • खेल और सांस्कृतिक गतिविधियों से जुड़े लोग
  • स्थानीय नागरिक और दर्शक

इस कार्यक्रम ने महिलाओं की भागीदारी और पारंपरिक संस्कृति को एक साथ सामने लाया। इसलिए Dombivli Lezim Dance Guinness Record को महिला शक्ति और सांस्कृतिक विरासत से जोड़कर देखा जा रहा है।

प्रतिभागियों के लिए पात्रता और तैयारी

इस कार्यक्रम में भाग लेने के लिए कुछ सामान्य नियम बनाए गए थे।

  • प्रतिभागी को लेझीम नृत्य की मूल जानकारी हो
  • निर्धारित पोशाक और ड्रेस कोड का पालन करना
  • आयोजन समिति द्वारा तय अभ्यास सत्र में भाग लेना
  • कार्यक्रम के समय निर्धारित स्थान पर उपस्थित रहना

इन नियमों के आधार पर हजारों महिलाओं ने इस कार्यक्रम में हिस्सा लिया। सामूहिक अभ्यास और तालमेल के कारण Dombivli Lezim Dance Guinness Record सफल हो सका।

कार्यक्रम की जानकारी कैसे देखें

अगर कोई व्यक्ति इस आयोजन के बारे में और जानकारी जानना चाहता है, तो कुछ तरीके अपनाए जा सकते हैं।

1. सोशल मीडिया अपडेट देखें
कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इस कार्यक्रम के वीडियो और तस्वीरें साझा की गई हैं।

2. स्थानीय समाचार प्लेटफॉर्म देखें
महाराष्ट्र के कई समाचार प्लेटफॉर्म इस उपलब्धि की जानकारी दे रहे हैं।

3. सांस्कृतिक संगठनों के पेज देखें
आयोजन से जुड़े सांस्कृतिक संगठनों के पेज पर भी कार्यक्रम की जानकारी उपलब्ध है।

4. Guinness World Records अपडेट देखें
विश्व रिकॉर्ड से जुड़ी जानकारी आधिकारिक वेबसाइट पर भी
उपलब्ध होती है।

इन तरीकों से लोग Dombivli Lezim Dance Guinness Record से जुड़ी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।


डोंबिवली में आयोजित सामूहिक लेझीम नृत्य कार्यक्रम ने एक नया इतिहास बना दिया है। हजारों महिलाओं की भागीदारी के साथ बना Dombivli Lezim Dance Guinness Record महाराष्ट्र की सांस्कृतिक पहचान को भी सामने लाता है।यह उपलब्धि न केवल एक विश्व रिकॉर्ड है बल्कि पारंपरिक लोक कला और महिला भागीदारी को बढ़ावा देने का भी प्रतीक बन गई है। आने वाले समय में ऐसे सांस्कृतिक कार्यक्रमों से और भी नई उपलब्धियां सामने आने की उम्मीद है।


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Prashant Chaudhari

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