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मतदाता सूची में बड़ा घोटाला! आदित्य ठाकरे के गंभीर आरोप — नाम, फोटो और पते में गड़बड़ी के सबूत पेश

“लोकशाही की चोरी!” आदित्य ठाकरे का भावनात्मक खुलासा — मतदाता सूची में नाम, फोटो और पते तक में गड़बड़ी, ठोस सबूतों के साथ बड़ा आरोप

मुंबई, वरळी — रिपोर्ट:

वरळी के NSCI डोम में आयोजित ‘निर्धार मेळावा’ के दौरान शिवसेना (ठाकरे गट) के विधायक और नेता आदित्य ठाकरे ने भावनात्मक भाषण देते हुए दावा किया कि मुंबई की मतदाता सूचियों में बड़े पैमाने पर हेराफेरी की गई है। उन्होंने एक विस्तृत प्रेजेंटेशन में नाम, लिंग, फोटो और पते से जुड़ी गलतियों के ठोस नमूने पेश किए — ऐसे उदाहरण जो लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों पर ही सवाल उठाते हैं।

“ये सिर्फ वोट चोरी नहीं — यह लोकतंत्र की चोरी है”

ठाकरे ने सभा को संबोधित करते हुए कहा, “लोकसभा के बाद हमें महाविकास आघाड़ी की सरकार मिलने की उम्मीद थी, परंतु नतीजे बदल गए। अब यह स्पष्ट होता रहा है कि गड़बड़ी सिर्फ ईवीएम या वीवीपैट तक सीमित नहीं है — मतदाता सूची में भी व्यापक अनियमितताएं हैं।”

प्रमुख दावे — वरळी के आंकड़े

  • वरळी विधानसभा क्षेत्र में 19,333 मतदाताओं के नाम संदिग्ध पाए गए।
  • 502 ऐसे मतदाता जिनके नाम लगभग एक जैसे हैं।
  • 643 मतदाताओं का लिंग गलत दर्ज किया गया है।
  • 4,177 मतदाताओं का कोई ठिकाना दर्ज नहीं है।
  • 67 मतदाताओं के पते पर केवल “झो झो झो” जैसा अस्पष्ट विवरण है।
  • कुछ मतदान कार्ड पर फोटो ही गायब है; कुछ पर केवल नाक दिखाई देती है।
  • एक ही कमरे/किसी एक पते पर 38 मतदाता दिख रहे हैं।

ठाकरे ने कहा कि यह सब सिर्फ वरळी का मामला नहीं है — अगर पूरे मुंबई की जांच की जाए तो और भी बड़े पैमाने पर फर्जी मतदाता सामने आ सकते हैं। उन्होंने कार्यकर्ताओं को निर्देश दिया कि वे अपने-अपने क्षेत्रों की मतदाता सूची स्वयं पढ़ें और हर नाम की पहचान करें।

राजनीतिक प्रभाव और आगे की दिशा

इन आरोपों के बाद अब राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएँ महत्वपूर्ण होंगी — विशेषकर भाजपा, शिंदे गुट और अजित पवार के नेतृत्व में बने गठबंधन किस तरह से इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देंगे। क्या इन दावों की स्वतंत्र और पारदर्शी जांच होगी या यह राजनीतिक बयानबाज़ी तक सीमित रहेगा — यह अगली बड़ी प्रश्नवाचक है।

ठाकरे ने सभा में कहा कि केवल आरोपों से काम नहीं चलेगा — आवश्यक है कि संबंधित संस्थाएँ मिलकर जांच करें, दोषियों की पहचान हो और किसी भी प्रकार की अनियमितता को गंभीरता से सुधारा जाए।


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