जालना/छत्रपति संभाजीनगर, 27 अक्टूबर 2026 — इस बार मानसून कमजोर रहने का असर अक्टूबर के आखिर में ही दिखने लगा है। मराठवाड़ा में पीने के पानी के लिए अब 441 टैंकर चलाए जा रहे हैं, जो 255 गांवों और 182 वाड़ियों तक पानी पहुंचा रहे हैं। जालना जिले में भी अंबड और बदनापुर तालुकों के कई गांव टैंकर के भरोसे हैं।
समाचार रिपोर्टों में विभागीय आयुक्त कार्यालय के आंकड़ों के हवाले से बताया गया है कि सितंबर के अंत में विभाग में 295 टैंकर चल रहे थे। यानी लगभग एक महीने में यह संख्या करीब डेढ़ गुना से ज्यादा बढ़ गई है, जबकि अभी सर्दी का मौसम शुरू ही हुआ है।
मुख्य बातें
- मराठवाड़ा में 441 टैंकर, 255 गांव और 182 वाड़ियां; इनमें सिर्फ 4 सरकारी, बाकी निजी।
- सितंबर के अंत में 295 टैंकर, 157 गांव और 103 वाड़ियां प्रभावित थीं।
- छत्रपति संभाजीनगर जिले में सबसे ज्यादा 170 टैंकर।
- जालना जिले में 22 अक्टूबर तक 40 टैंकर (3 सरकारी, 37 निजी), लगभग 82,652 लोग निर्भर।
- मराठवाड़ा में मानसून के अंत तक लगभग 38% कम बारिश दर्ज।
जालना जिले में टैंकर जलापूर्ति की तालुकावार स्थिति
स्थानीय रिपोर्ट के अनुसार 22 अक्टूबर तक जालना जिले में 40 टैंकर चल रहे थे। इनके लिए रोजाना 83 फेरे मंजूर थे, जिनमें से 80 फेरे पूरे हुए। विभागीय स्तर की एक अन्य रिपोर्ट में जालना के लिए 34 टैंकर का आंकड़ा दिया गया है; अंतर आंकड़ों की अलग-अलग तारीख के कारण हो सकता है, क्योंकि हर हफ्ते नए गांवों से मांग आ रही है।
- अंबड: 18 टैंकर (सभी निजी)
- बदनापुर: 14 टैंकर (3 सरकारी, 11 निजी)
- जालना: 4 टैंकर
- घनसावंगी: 4 टैंकर
प्रशासन ने जिले में 44 निजी कुओं का अधिग्रहण भी किया है — अंबड में 18, बदनापुर में 16, घनसावंगी में 6 और जालना तालुके में 4। इन कुओं से आसपास के गांवों को पानी दिया जाता है। जिलाधिकारी आशिमा मित्तल ने नागरिकों से पीने के पानी का किफायत से इस्तेमाल करने की अपील की है।
भूजल भी नीचे गया, गर्मियों की चिंता बढ़ी
भूजल सर्वेक्षण के सितंबर के आंकड़ों में जालना जिले का औसत भूजल स्तर पिछले पांच साल के औसत से 3.69 मीटर नीचे पाया गया था। सबसे ज्यादा गिरावट परतूर (7.23 मीटर) और घनसावंगी (5.25 मीटर) में दर्ज हुई थी। ऐसे में अगर आगे बारिश नहीं हुई तो जनवरी से मई के बीच टैंकरों की मांग और बढ़ सकती है।
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गांव में पानी की दिक्कत हो तो क्या करें
टैंकर के लिए आमतौर पर ग्राम पंचायत का प्रस्ताव पंचायत समिति के जरिए तहसील और जिला प्रशासन तक जाता है। ग्रामीण अपने ग्रामसेवक या सरपंच के माध्यम से मांग दर्ज करा सकते हैं। जिले की आधिकारिक सूचनाएं jalna.gov.in और छत्रपति संभाजीनगर विभागीय आयुक्त कार्यालय की वेबसाइट पर देखी जा सकती हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न: मराठवाड़ा में इस समय कितने टैंकर चल रहे हैं?
उत्तर: ताजा रिपोर्ट के अनुसार 441 टैंकर, जो 255 गांवों और 182 वाड़ियों को पानी दे रहे हैं।
प्रश्न: जालना में सबसे ज्यादा असर कहां है?
उत्तर: टैंकरों की संख्या के हिसाब से अंबड (18) और बदनापुर (14) तालुके सबसे आगे हैं।
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स्रोत / Source: पुढारी — pudhari.news; फ्री प्रेस जर्नल (मराठी) — marathi.freepressjournal.in
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