जालना जिले में सूखे से खरीफ फसलों को हुए नुकसान का आकलन अंतिम चरण में पहुंच गया है। जिला प्रशासन के अनुसार आठों तालुकों में लगभग 90 प्रतिशत ई-पंचनामे पूरे हो चुके हैं और 5.89 लाख खातेदारों में से 5.30 लाख से अधिक किसानों का सर्वे हो चुका है। अब किसानों की नजर राज्य सरकार की उस घोषणा पर है, जिसमें दिवाली से पहले ₹5,000 की अग्रिम सहायता सीधे बैंक खाते में देने का वादा किया गया है।
जिलाधिकारी आशिमा मित्तल ने हाल ही में जल संकट और राहत कार्यों की विस्तृत समीक्षा की, जिसमें टैंकर, कुओं के अधिग्रहण, चारा छावनियों और अवैध जल दोहन पर कार्रवाई के निर्देश दिए गए।
मुख्य बातें / Key facts
- जिले के सभी 8 तालुकों में ट्रिगर-1 लागू, सरकार ने सूखा घोषित किया
- 5,89,128 खातेदारों में से 5,30,215 का ई-पंचनामा पूरा
- फिलहाल 31 टैंकर से पेयजल आपूर्ति, 37 कुएं अधिग्रहित
- एक महीने में टैंकरों की संख्या 100 तक बढ़ने की आशंका
- अवैध जल दोहन रोकने के लिए वॉर रूम, अब तक 37 छापे
- राज्य में 305 तालुके सूखाग्रस्त, प्रति किसान ₹5,000 की अग्रिम मदद की घोषणा
पंचनामे कहां तक पहुंचे?
इस बार नुकसान का आकलन कागजी फॉर्म की जगह ई-पंचनामा प्रणाली से किया जा रहा है। जिले के कुल 5,89,128 खातेदारों में से 5,30,215 का काम पूरा हो चुका है। बाकी किसानों का अंतिम रिपोर्ट राज्य सरकार को भेजी जाएगी। जिन किसानों का नाम अभी सूची में नहीं आया है, उन्हें अपने तलाठी या कृषि सहायक से संपर्क करके स्थिति जांच लेनी चाहिए, क्योंकि राहत की राशि इसी आंकड़े के आधार पर जाएगी।
नुकसान कितना गहरा है, इसका अंदाजा इसी महीने केंद्रीय दल के सामने रखे गए आंकड़ों से मिलता है। सरकारनामा की रिपोर्ट के अनुसार जालना में फसल कटाई प्रयोगों में उपज 50 प्रतिशत से ज्यादा घटी पाई गई और जिले का भूजल पांच साल के औसत से 4 से 5 मीटर नीचे चला गया है। कपास और सोयाबीन — जिले की दो प्रमुख नकदी फसलें — सबसे ज्यादा प्रभावित हैं।
₹5,000 की मदद: कब और कैसे?
14 अक्टूबर को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में 40 और तालुकों को जोड़कर राज्य के कुल 305 तालुकों को सूखाग्रस्त माना गया था। सरकार ने कहा कि केंद्र की राहत प्रक्रिया दिवाली से पहले पूरी नहीं हो सकती, इसलिए राज्य अपने खजाने से प्रति प्रभावित किसान ₹5,000 की अग्रिम राशि DBT से देगा। साथ ही 12 सूखा रियायतें जारी रहेंगी, प्रभावित छात्रों की फीस माफ होगी और बैंकों व माइक्रोफाइनेंस कंपनियों को किसानों से जबरन वसूली न करने का निर्देश दिया गया है।
हालांकि जिले के अधिकारियों के अनुसार पैसा खाते में आने से पहले नुकसान के आंकड़ों का सत्यापन, सरकारी मंजूरी और निधि वितरण जैसे चरण पूरे होने हैं। धनतेरस 6 नवंबर को है, इसलिए अगले दो हफ्ते किसानों के लिए अहम हैं। इस बीच मराठा आरक्षण आंदोलन के नेता मनोज जरांगे ने अंकुशनगर में मीडिया से कहा कि ₹5,000 की मदद किसानों के साथ मजाक जैसी है और इससे कहीं बेहतर राहत की जरूरत है।
पीने का पानी और चारा: प्रशासन की तैयारी
अक्टूबर में ही जिले में 31 टैंकर चल रहे हैं और 37 निजी कुएं अधिग्रहित किए गए हैं। टैंकर मंजूरी के अधिकार उपविभागीय अधिकारियों को दिए गए हैं ताकि गांवों की मांग पर तुरंत फैसला हो सके। तहसीलदारों को चारा छावनियां शुरू करने की तैयारी करने को कहा गया है। राजस्व, पुलिस, महावितरण और सिंचाई विभाग की संयुक्त टीम वॉर रूम से अवैध जल दोहन पर नजर रख रही है और अब तक 37 छापे मारे जा चुके हैं।
प्रशासन ने “गांव गोद अभियान” भी शुरू किया है, जिसमें सबसे ज्यादा संवेदनशील गांवों को उद्योग, CSR फंड और सामाजिक संस्थाएं गोद लेंगी; पहली प्राथमिकता पानी प्रबंधन होगी। इसी कड़ी में पंकजा मुंडे ने अंतरवाली सराटी गांव को गोद लेने की घोषणा की थी। सूखे पर सरकार का पक्ष जानने के लिए मेघना बोर्डीकर का बयान और भूजल संकट की बड़ी तस्वीर के लिए हमारी भूजल रिपोर्ट भी पढ़ें।
किसान अभी क्या करें?
- तलाठी कार्यालय में पुष्टि करें कि आपका ई-पंचनामा हो चुका है।
- बैंक खाता आधार से जुड़ा और सक्रिय है या नहीं, यह जांच लें; DBT इसी खाते में आएगा।
- किसी भी एजेंट को मदद दिलाने के नाम पर पैसा या OTP न दें।
FAQ
सवाल: ₹5,000 की मदद किसे मिलेगी?
जवाब: राज्य के 305 सूखाग्रस्त तालुकों के प्रभावित किसानों को; जालना के सभी 8 तालुके इसमें शामिल हैं। अंतिम पात्रता पंचनामे के आंकड़ों से तय होगी।
सवाल: क्या बैंक अभी कर्ज वसूली के लिए दबाव डाल सकते हैं?
जवाब: राज्य सरकार ने बैंकों और माइक्रोफाइनेंस संस्थाओं को सूखाग्रस्त किसानों से जबरन वसूली न करने का निर्देश दिया है। शिकायत तहसील कार्यालय में की जा सकती है।
स्रोत / Source: पुढारी — Crop Damage Assessments: 90 टक्के पीक पंचनामे पूर्ण; The Statesman — Maharashtra Govt announces Rs 5,000 aid for farmers in 305 drought-hit talukas; सकाळ — मनोज जरांगे पाटील यांची सरकारवर टीका; सरकारनामा — केंद्रीय पथकासमोर मराठवाड्यातील दुष्काळाचे वास्तव
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