महाराष्ट्र में निजी क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए काम के घंटे बढ़े: अब 10 घंटे कर सकेंगे काम, ओवरटाइम पर मिलेगा डबल वेतन
मुंबई, 3 सितंबर 2025: महाराष्ट्र सरकार ने राज्य में निवेश आकर्षित करने, रोजगार के अवसर बढ़ाने और कर्मचारियों के हितों की सुरक्षा के लिए श्रम कानूनों में बड़ा बदलाव किया है। राज्य मंत्रिमंडल ने निजी क्षेत्र में दैनिक कार्य समय की सीमा 9 घंटे से बढ़ाकर 10 घंटे करने का निर्णय लिया।
क्या है नया बदलाव?
राज्य सरकार ने श्रम कानूनों में कई अहम संशोधन किए हैं, जो सीधे तौर पर कर्मचारियों और नियोक्ताओं दोनों को प्रभावित करेंगे।
1. दैनिक कार्य समय में वृद्धि
अब तक निजी क्षेत्र के कर्मचारी अधिकतम 9 घंटे प्रतिदिन काम कर सकते थे। इस नियम को बदलकर अब 10 घंटे तक काम करने की अनुमति दी गई है। फैक्टरियों में यह सीमा 12 घंटे तक बढ़ाई गई है, लेकिन इसके लिए कर्मचारी की लिखित सहमति आवश्यक होगी।
2. ओवरटाइम नियमों में बदलाव
पहले कर्मचारियों को एक तिमाही में अधिकतम 115 घंटे तक ओवरटाइम करने की अनुमति थी। अब यह सीमा बढ़ाकर 144 घंटे कर दी गई है। ओवरटाइम का भुगतान कर्मचारियों को डबल वेतन पर किया जाएगा।
3. साप्ताहिक कार्य समय और छुट्टियां
- अब सप्ताह में कार्य समय की सीमा 48 घंटे से बढ़ाकर 60 घंटे कर दी गई है।
- यदि कोई कर्मचारी सप्ताह का कोटा 4 दिनों में पूरा करता है, तो उसे 2 दिन की Paid Leave मिलेगी।
4. आराम के समय में बदलाव
पहले कर्मचारी 5 घंटे लगातार काम कर सकते थे। अब यह सीमा 6 घंटे तक कर दी गई है।
5. लाइसेंस और नियमों में ढील
- अब Shops & Establishments Act केवल 20 या अधिक कर्मचारियों वाले प्रतिष्ठानों पर लागू होगा।
- छोटे प्रतिष्ठानों को Gumasta License लेने की आवश्यकता नहीं, केवल सरकार को सूचना देना पर्याप्त होगा।
कर्मचारियों के लिए फायदे
- ओवरटाइम पर डबल वेतन
- साप्ताहिक कोटा जल्दी पूरा करने पर 2 दिन की Paid Leave
- छोटे प्रतिष्ठानों के कर्मचारियों के लिए कम कागजी बोझ
नियोक्ताओं के लिए फायदे
- उत्पादन क्षमता में वृद्धि
- काम के घंटे लचीले ढंग से प्रबंधित करने की सुविधा
- कागजी कार्रवाई में कमी
सरकार का दृष्टिकोण
सरकार का कहना है कि यह बदलाव राज्य में Ease of Doing Business को बेहतर बनाएगा और निवेशकों को आकर्षित करेगा।
निष्कर्ष
महाराष्ट्र सरकार का यह निर्णय राज्य में औद्योगिक विकास, रोजगार सृजन और निवेश आकर्षण की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। यदि यह बदलाव सही तरीके से लागू होता है, तो यह कर्मचारियों और नियोक्ताओं दोनों के लिए लाभकारी साबित हो सकता है।

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