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अंतरवाली सराटी में फिर गरजे मनोज जरांगे पाटिल, 30 मई से आमरण अनशन का ऐलान

मनोज जरांगे पाटिल आमरण अनशन

“सरकार को घुटनों पर लाकर रहेंगे”, लाखों मराठाओं को अंतरवाली सराटी पहुंचने का आह्वान

जालना : महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण आंदोलन एक बार फिर तेज होने के संकेत मिल रहे हैं। मराठा आरक्षण आंदोलन के प्रमुख नेता Manoj Jarange Patil ने अंतरवाली सराटी से सरकार के खिलाफ बड़ा आंदोलन छेड़ने का ऐलान करते हुए 30 मई से आमरण अनशन शुरू करने की घोषणा की है। शनिवार को अंतरवाली सराटी में आयोजित विशाल बैठक में हजारों मराठा समाज के लोगों की मौजूदगी में उन्होंने आंदोलन का नया बिगुल फूंका और राज्य सरकार को चेतावनी दी कि यदि मराठा समाज की मांगें जल्द पूरी नहीं की गईं तो आंदोलन और अधिक उग्र रूप धारण करेगा।

बैठक के दौरान माहौल पूरी तरह आंदोलनकारी नजर आया। राज्य के विभिन्न जिलों से पहुंचे मराठा समाज के लोगों ने बड़ी संख्या में उपस्थिति दर्ज कराई। इस दौरान Manoj Jarange Patil ने कहा कि मराठा समाज अब और इंतजार करने की स्थिति में नहीं है। उन्होंने दावा किया कि 30 मई को अंतरवाली सराटी में लाखों मराठा समाज के लोग जुटेंगे और सरकार को समाज की ताकत का एहसास कराया जाएगा।

“अंतरवाली सराटी में सिर्फ मराठा समाज दिखाई देना चाहिए”

अपने संबोधन में मनोज जरांगे पाटिल ने समाज के लोगों से बड़ी संख्या में आंदोलन में शामिल होने की अपील की। उन्होंने कहा कि 30 मई को अंतरवाली सराटी में ऐसा जनसैलाब उमड़ना चाहिए कि पूरा राज्य मराठा समाज की एकजुटता देख सके।

उन्होंने कहा कि यह आंदोलन केवल आरक्षण का मुद्दा नहीं बल्कि समाज के सम्मान और अधिकारों की लड़ाई है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि “सरकार को घुटनों पर लाकर रहेंगे” और जब तक मांगें पूरी नहीं होंगी तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

मराठा आरक्षण से संबंधित आधिकारिक जानकारी महाराष्ट्र सरकार की वेबसाइट पर उपलब्ध है।
महाराष्ट्र शासन आधिकारिक पोर्टल

कुणबी प्रमाणपत्र के मुद्दे पर सरकार को घेरा

बैठक में मराठा-कुणबी प्रमाणपत्र का मुद्दा प्रमुख रूप से उठाया गया। Manoj Jarange Patil ने राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब मुख्यमंत्री स्वयं राज्य के सर्वोच्च पद पर हैं तो फिर मराठा समाज को कुणबी प्रमाणपत्र देने में देरी क्यों हो रही है।

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार केवल आश्वासन दे रही है लेकिन जमीनी स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई दिखाई नहीं दे रही। उन्होंने कहा कि मराठवाड़ा क्षेत्र के मराठा समाज को समय पर प्रमाणपत्र नहीं मिलने से लोगों में भारी नाराजगी है।

उन्होंने मांग की कि 29 मई से पहले मराठवाड़ा के सभी पात्र मराठाओं को कुणबी प्रमाणपत्र जारी किए जाएं। इसके अलावा पहले से जारी प्रमाणपत्रों को वैधता देने की भी मांग रखी गई।

आंदोलन से जुड़ी प्रमुख मांगें

बैठक के दौरान मनोज जरांगे पाटिल ने आंदोलन से जुड़ी कई प्रमुख मांगों को दोहराया। उन्होंने कहा कि सातारा, कोल्हापुर, औंध, पुणे और मिरज संस्थानों के संबंध में वर्ष 1994 की तर्ज पर शासनादेश जारी किया जाए।

उन्होंने आंदोलन के दौरान दर्ज किए गए सभी मामलों को वापस लेने की मांग भी की। इसके अलावा आंदोलन में जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों को Maharashtra State Electricity Distribution Company Limited और Maharashtra Industrial Development Corporation में नौकरी देने की मांग रखी गई।

उन्होंने कहा कि मराठा समाज के युवाओं के लिए शुरू की गई सारथी संस्था की सभी योजनाएं तुरंत दोबारा शुरू की जाएं और लंबित अनुदान तथा भुगतान जल्द जारी किए जाएं।

सारथी संस्था से संबंधित अधिक जानकारी यहां उपलब्ध है।
सारथी संस्था आधिकारिक वेबसाइट

अलग मंत्रालय बनाने की मांग

Manoj Jarange Patil ने मराठा उपसमिति को भंग करने तथा अलग कुणबी और मराठा मंत्रालय स्थापित करने की मांग भी दोहराई। उनका कहना है कि समाज से जुड़े मामलों के लिए अलग प्रशासनिक व्यवस्था बनाए बिना समस्याओं का समाधान संभव नहीं है।

उन्होंने यह भी मांग की कि शिंदे समिति को समयवृद्धि देकर रिकॉर्ड जांच का कार्य जारी रखा जाए ताकि अधिक से अधिक पात्र लोगों को लाभ मिल सके।

शासन निर्णय पर विशेषज्ञों की बैठक

हाल ही में राज्य सरकार द्वारा जारी शासन निर्णय पर भी बैठक में चर्चा हुई। मनोज जरांगे पाटिल ने कहा कि यह निर्णय वास्तव में समाज के हित में है या नहीं, इस पर विशेषज्ञों और अध्ययनकर्ताओं को विचार करना चाहिए।

उन्होंने घोषणा की कि 28 मई को अंतरवाली सराटी में मराठा समाज के विशेषज्ञों, वरिष्ठ लोगों और अध्ययनकर्ताओं की बैठक आयोजित की जाएगी। इस बैठक में आगे की रणनीति तय की जाएगी और आंदोलन की दिशा पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

आंदोलन का राजनीतिक असर भी संभव

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि अंतरवाली सराटी में फिर से बड़े स्तर पर आंदोलन खड़ा होता है तो इसका असर राज्य की राजनीति पर भी दिखाई दे सकता है। पिछले आंदोलनों के दौरान भी मराठा आरक्षण का मुद्दा राज्य की राजनीति का केंद्र बन चुका है।

मराठा समाज लंबे समय से आरक्षण और सामाजिक न्याय की मांग कर रहा है। ऐसे में 30 मई को प्रस्तावित आमरण अनशन को लेकर प्रशासन और राजनीतिक दलों की नजरें अब अंतरवाली सराटी पर टिक गई हैं।

मराठा आरक्षण आंदोलन से जुड़ी विस्तृत जानकारी और सरकारी अपडेट महाराष्ट्र सरकार के सामाजिक न्याय विभाग की वेबसाइट पर भी उपलब्ध हैं।
महाराष्ट्र सामाजिक न्याय विभाग

अब देखना यह होगा कि सरकार आंदोलन से पहले कोई बड़ा फैसला लेती है या फिर अंतरवाली सराटी एक बार फिर महाराष्ट्र की राजनीति और आंदोलन का केंद्र बनता है।


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Rashmi Bagdi
Rashmi Bagdi is a journalist and digital content creator associated with NewsNation Online. She specializes in reporting on local news, civic issues, education, government updates, and viral stories with a reader-focused approach.

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