मराठा आरक्षण पर जरांगे का अल्टीमेटम: 27 अगस्त से मुंबई कूच, “सरकार गिराने” की चेतावनी
जालना | अपडेटेड: 26 अगस्त 2025
- मनोज जरांगे ने वैधानिक, स्थायी आरक्षण की मांग दोहराई
- “दो दिनों में ठोस निर्णय नहीं तो सरकार हिला देंगे” — जरांगे
- 27–29 अगस्त को आंतरवली सराटी से मुंबई तक विशाल काफिला
- आजाद मैदान, मुंबई में 29 अगस्त से अनिश्चितकालीन उपोषण
जरांगे का तीखा सवाल
आंतरवली सराटी में आयोजित पत्रकार परिषद में आंदोलन के सूत्रधार
मनोज जरांगे ने सरकार को कड़ा संदेश दिया कि मराठा समाज को
केवल वैधानिक और स्थायी आरक्षण ही चाहिए। उन्होंने कहा कि
29 जातियों को ओबीसी आरक्षण में शामिल कर मराठा समाज के साथ अन्याय हुआ है।
शिंदे समिति को 58 लाख कुणबी की नोंदें मिली थीं और उसकी रिपोर्ट सरकार ने स्वीकार भी की है,
फिर भी अमल में देरी क्यों?
“हमें केवल और केवल वैधानिक आरक्षण चाहिए… सरकार अब टालमटोल क्यों कर रही है?
आखिर अड़ियल कौन है?”
जरांगे ने स्पष्ट किया कि सरकार द्वारा दिया गया 10% आरक्षण स्थायी नहीं है और कभी भी रद्द हो सकता है।
उन्होंने “सातारा और बाम्बे गजेट” लागू करने की मांग दोहराते हुए कहा कि
डेढ़ साल पहले जारी आदेश आज तक लागू नहीं हुए हैं।
मुख्यमंत्री फडणवीस पर निशाना
जरांगे के अनुसार, उन्होंने दो महीने पहले मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को फोन पर
गरीब मराठों की पीड़ा बताने का प्रयास किया था।
“अगर मुख्यमंत्री मराठा आरक्षण पर गंभीर नहीं हैं, तो फिर अड़ियल कौन है,
यह मुंबईकरों को समझना चाहिए। अगर आरक्षण नहीं दिया गया तो मैं सरकार तक को हिला सकता हूँ।”
मुंबई वारी: 27–29 अगस्त का विस्तृत कार्यक्रम
काफिले की शुरुआत: 27 अगस्त, सुबह 10 बजे — आंतरवली सराटी (जालना) से
| तारीख | समय | पड़ाव/मार्ग | मुख्य गतिविधि |
|---|---|---|---|
| 27 अगस्त | सुबह 10 बजे से | आंतरवली सराटी → महाकाला → शहागड → पैठण | हजारों वाहनों के साथ कूच |
| 28 अगस्त | दिनभर | शेवगांव → नगर बायपास → तलेगाँव → लोणावला → पनवेल → वाशी → चेंबूर | शाम तक आज़ाद मैदान, मुंबई में पहुँचना |
| 29 अगस्त | सुबह | आज़ाद मैदान, मुंबई | अनिश्चितकालीन उपोषण (उपवास) शुरू |
काफिले में छत्रपति शिवाजी महाराज की अश्वारूढ़ प्रतिमा रथ पर विराजमान रहेगी,
जिसके पीछे हजारों गाड़ियाँ चलेंगी। जोश और उत्साह के लिए 24 हलगीवादक भी साथ रहेंगे।
भारी पैमाने पर तैयारी
जालना जिले से लगभग 13,000 वाहन शामिल होने की संभावना है।
गाँव-गाँव से वर्गणी इकट्ठा कर ट्रक, टेम्पो, ट्रैक्टर और जीप की व्यवस्था की गई है।
बरसात को देखते हुए कई ट्रैक्टर-ट्रॉलियों पर टीन-शीट लगाकर अस्थायी आश्रय बनाए गए हैं ताकि
आंदोलनकारी बारिश से बच सकें। हर गाँव में समितियाँ बनाकर समन्वयक नियुक्त किए गए हैं।
“हर घर से एक पुरुष मुंबई पहुँचे और आंदोलन में भाग ले।” — मनोज जरांगे
राज्य पर असर और प्रशासनिक तैयारी
जरांगे ने चेतावनी दी कि आंदोलन निर्णायक मोड़ पर है।
यदि दो दिनों में ठोस निर्णय नहीं हुआ तो राज्यव्यापी आक्रोश तेज होगा।
प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक, मुंबई में यातायात और
कानून-व्यवस्था पर भारी दबाव पड़ सकता है और
राजधानी में लाखों की संख्या में मराठा समाज के लोग जुट सकते हैं।
डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट पाठक द्वारा साझा की गई सूचनाओं/बयानों पर आधारित है।
प्रशासनिक मार्ग/समय में स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार परिवर्तन संभव है।
पाठकों से अपील है कि आधिकारिक एडवाइजरी और ट्रैफिक अपडेट अवश्य देखें।

