महाराष्ट्र की जिला और अधीनस्थ अदालतों में काम करने वाले कर्मचारियों ने बॉम्बे हाईकोर्ट के कर्मचारियों के बराबर वेतनमान की मांग को लेकर आंदोलन तेज कर दिया है। महाराष्ट्र राज्य न्यायिक कर्मचारी महासंघ के आह्वान पर 16 और 17 अक्टूबर को राज्य भर की अदालतों में कर्मचारियों ने काली पट्टी बांधकर काम किया। महासंघ ने चेतावनी दी है कि सरकार ने जल्द फैसला नहीं लिया तो 5 नवंबर को कर्मचारी अदालती कामकाज से दूर रहेंगे।
मांग क्या है?
कर्मचारियों का कहना है कि वे वही काम करते हैं जो हाईकोर्ट का स्टाफ करता है, इसलिए “समान काम, समान वेतन” के सिद्धांत पर उन्हें भी हाईकोर्ट वाला वेतनमान मिलना चाहिए। मुंबई की सिटी सिविल एवं सेशंस कोर्ट, स्मॉल कॉजेज कोर्ट और मजिस्ट्रेट अदालतों सहित राज्य की सभी अधीनस्थ अदालतों के कर्मचारियों के लिए यह वेतनमान 1 जनवरी 2006 से लागू करने की मांग की गई है।
फ्री प्रेस जर्नल और पीटीआई की रिपोर्टों के अनुसार, हाईकोर्ट के दो न्यायाधीशों की समिति ने जनवरी 2025 में इस विषय पर अपनी रिपोर्ट दी थी, जिसे हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को भेज दिया। कर्मचारी संगठनों का आरोप है कि यह प्रस्ताव करीब 20 महीने से मुख्यमंत्री कार्यालय में लंबित है। अब तक सरकार की ओर से कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
आंदोलन कैसे चल रहा है?
आंदोलन फिलहाल प्रतीकात्मक है। कर्मचारी नियमित काम करते हुए विरोध दर्ज करा रहे हैं, ताकि अदालतों का कामकाज न रुके। सेवानिवृत्त न्यायिक कर्मचारियों ने भी 16 अक्टूबर को कई जिलों में कलेक्टर कार्यालयों के बाहर धरना दिया। छत्रपति संभाजीनगर, वर्धा और मुंबई की अदालतों में भी काली पट्टी आंदोलन की खबरें आईं। संभाजीनगर में कर्मचारियों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल तक की चेतावनी दी है।
जालना और मराठवाड़ा के लोगों पर क्या असर?
अगर 5 नवंबर को कर्मचारी काम से दूर रहते हैं, तो जालना जिला न्यायालय समेत मराठवाड़ा की तालुका अदालतों में उस दिन सुनवाई, नकल (सर्टिफाइड कॉपी) जारी करना, केस फाइलिंग और समन जैसे दफ्तरी काम प्रभावित हो सकते हैं। जिन लोगों की उस दिन तारीख है, वे अपने वकील से संपर्क में रहें। जालना के विधायक कैलास गोरंट्याल पहले भी इस मांग के समर्थन में मुख्यमंत्री को पत्र लिख चुके हैं (पूरी खबर पढ़ें)।
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आगे क्या?
अब नजर राज्य सरकार पर है। वित्त विभाग की मंजूरी के बिना वेतनमान में बदलाव संभव नहीं है, और 2006 से बकाया देने का वित्तीय बोझ भी बड़ा होगा। महासंघ ने सेवारत और सेवानिवृत्त कर्मचारियों से आंदोलन में भाग लेने की अपील की है। 5 नवंबर से पहले सरकार और संगठनों के बीच बातचीत होती है या नहीं, यह देखना अहम होगा।
मुख्य बातें / Key facts
- मांग: अधीनस्थ अदालतों के कर्मचारियों को बॉम्बे हाईकोर्ट स्टाफ के बराबर वेतनमान
- प्रस्ताव जनवरी 2025 से राज्य सरकार के पास लंबित
- 16–17 अक्टूबर: काली पट्टी बांधकर काम, सेवानिवृत्त कर्मचारियों का धरना
- 5 नवंबर: मांग न मानने पर कामकाज से दूर रहने की चेतावनी
- सरकार की आधिकारिक प्रतिक्रिया अभी नहीं आई
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या अभी अदालतें बंद हैं?
नहीं। अभी तक कर्मचारी काम करते हुए ही विरोध कर रहे हैं।
5 नवंबर को मेरी केस की तारीख है, क्या करूं?
अपने वकील से संपर्क रखें और अदालत की सूचना या नोटिस बोर्ड देखें। अंतिम फैसला सरकार और महासंघ की बातचीत पर निर्भर करेगा।
अदालतों से जुड़ी आधिकारिक सूचनाओं के लिए बॉम्बे हाईकोर्ट की वेबसाइट देखें।
स्रोत / Source: The Free Press Journal — Judicial employees threaten November 5 court boycott; ThePrint/PTI — Subordinate court employees demand HC pay scale
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