जालना, 2 नवंबर 2026 — समान काम-समान वेतन की मांग को लेकर महाराष्ट्र की सभी अधीनस्थ (निचली) अदालतों के न्यायिक कर्मचारी 5 नवंबर 2026 को सामूहिक छुट्टी पर रहेंगे। कर्मचारी संगठनों के अनुसार इस आंदोलन से राज्य की कई अदालतों का कामकाज ठप हो सकता है, जिससे वकीलों और पक्षकारों को भारी परेशानी झेलनी पड़ सकती है।

कर्मचारियों की मुख्य मांग है कि बॉम्बे हाईकोर्ट के कर्मचारियों की तरह राज्य की अधीनस्थ अदालतों के कर्मचारियों को भी ‘समान काम-समान वेतन’ के सिद्धांत पर संशोधित वेतनमान दिया जाए। उनका कहना है कि वेतन वृद्धि का प्रस्ताव पिछले 22 महीनों से अटका हुआ है, जिससे कर्मचारियों में गहरी नाराजगी है।
न्यायिक कर्मचारी सामूहिक छुट्टी पर क्यों जा रहे हैं?
राज्य के न्यायिक कर्मचारी महासंघ और विभिन्न संगठनों की मांग है कि सरकार हाईकोर्ट कर्मचारियों की तर्ज पर अधीनस्थ अदालतों के कर्मचारियों के लिए संशोधित वेतनमान तुरंत मंजूर करे। इस मांग को लेकर कर्मचारी पिछले दो महीनों से चरणबद्ध तरीके से लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे हैं।
16 सितंबर 2026 और फिर 16 व 17 अक्टूबर 2026 को राज्यभर के न्यायिक कर्मचारियों ने काली पट्टी बांधकर अपना नियमित काम किया और सरकार का ध्यान खींचने की कोशिश की। संगठनों का कहना है कि सरकार ने इन आंदोलनों पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया, इसलिए अब 5 नवंबर को सामूहिक छुट्टी का फैसला लिया गया है।
एक नजर में
- तारीख: 5 नवंबर 2026, राज्य की सभी अधीनस्थ अदालतें
- मांग: हाईकोर्ट कर्मचारियों की तरह संशोधित वेतनमान (समान काम-समान वेतन)
- प्रस्ताव लंबित: पिछले 22 महीनों से
- शामिल कर्मचारी: स्टेनोग्राफर, लिपिक संवर्ग, बेलिफ, वाहन चालक, चपरासी, सफाई कर्मचारी समेत सभी संवर्ग
- पहले के आंदोलन: 16 सितंबर तथा 16-17 अक्टूबर 2026 को काली पट्टी बांधकर काम
इस सामूहिक छुट्टी में शामिल होने वाले कर्मचारियों में स्टेनोग्राफर, लिपिक, बेलिफ, वाहन चालक, चपरासी और सफाई कर्मचारी सहित सभी संवर्ग शामिल हैं। इससे अदालतों के प्रशासनिक कामकाज के साथ रोज की सुनवाई पर भी असर पड़ने की आशंका है।
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वकील संघों समेत कई संगठनों का समर्थन
न्यायिक कर्मचारियों की वेतन वृद्धि की मांग को समाज के कई वर्गों से समर्थन मिल रहा है। प्रेस नोट के अनुसार ‘नाईक अधिकारी असोसिएशन’, ‘बार काउंसिल ऑफ बॉम्बे एंड गोवा’, राजपत्रित अधिकारी वर्ग, जिला वकील संघ, तालुका वकील संघ और जिले के सेवानिवृत्त न्यायिक कर्मचारियों ने इस आंदोलन को समर्थन दिया है। विभिन्न स्तरों पर यह राय जताई जा रही है कि यह सिर्फ कर्मचारियों का नहीं, बल्कि न्याय व्यवस्था के एक अहम हिस्से के न्यायसंगत अधिकारों का सवाल है।
जालना जिला वकील संघ को सौंपा ज्ञापन
इसी सिलसिले में जालना जिले के न्यायिक कर्मचारी संगठन ने जालना वकील संघ के अध्यक्ष एड. परमेश्वर गाडगील, सचिव एड. विनोद कुलकर्णी और सहसचिव एड. जराड की मौजूदगी में सामूहिक छुट्टी आंदोलन के संबंध में ज्ञापन सौंपा।
इस मौके पर न्यायिक कर्मचारी संगठन के सचिव त्रिरत्न अटकोरे, उपाध्यक्ष गणेश भाले, योगेश आंबुरे, संदीप राठोड, पांडुरंग कोठुले, ज्ञानेश्वर म्हारे, तपासे सहित कई न्यायिक कर्मचारी मौजूद थे।
“सरकार तुरंत फैसला ले” — कर्मचारी संगठन
जालना जिला न्यायालय कर्मचारी संगठन के सचिव त्रिरत्न तोलाजीराव अटकोरे ने कहा कि न्यायिक कर्मचारी न्याय व्यवस्था का अभिन्न हिस्सा हैं और अदालतों का कामकाज सुचारु रखने में उनकी अहम भूमिका है। पूरी जिम्मेदारी और ईमानदारी से सेवा देने वाले इन कर्मचारियों की वेतन वृद्धि का सवाल 22 महीनों से लंबित रहना चिंता की बात है।
उन्होंने कहा कि सरकार अब कर्मचारियों के सब्र की परीक्षा न ले और कर्मचारियों व उन पर निर्भर परिवारों की भावनाओं को समझते हुए हाईकोर्ट कर्मचारियों की तरह अधीनस्थ अदालतों के कर्मचारियों को संशोधित वेतनमान का लाभ तुरंत मंजूर करे। ऐसा न होने पर संगठनों ने आंदोलन और तेज करने का संकल्प जताया है।
अब राज्य के न्यायिक कर्मचारियों, वकीलों और आम नागरिकों की नजर इस पर है कि सरकार इस सामूहिक छुट्टी आंदोलन पर ध्यान देकर लंबित मांग पर सकारात्मक फैसला लेती है या नहीं। अदालतों के ढांचे के बारे में अधिक जानकारी बॉम्बे हाईकोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध है।
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रिपोर्ट: इमरान सिद्दीकी, जालना
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