जालना, 2 नवंबर 2026 — जालना महानगरपालिका की सफाई व्यवस्था पर फिर से सवाल खड़े हो गए हैं. तंग गलियों से कचरा इकट्ठा करने के लिए करीब 35 लाख रुपये में खरीदी गईं इलेक्ट्रिक कचरा गाड़ियां (स्थानीय नाम ‘ई-घंटागाड़ी’) महज तीन साल में खराब होने लगी हैं. सामने आई जानकारी के अनुसार, नियमित देखभाल और समय पर मरम्मत न होने से 12 में से 8 गाड़ियां बंद हैं, जिससे शहर के 39 इलाकों में घर-घर से कचरा उठाने का काम प्रभावित हुआ है. हालांकि महानगरपालिका के संबंधित विभाग प्रमुख का कहना है कि 8 गाड़ियां चालू और 4 बंद हैं.

दिवाली के दिनों में घरों और दुकानों की साफ-सफाई से कचरा बढ़ गया है. शहर में रोजाना करीब 120 टन कचरा निकलता है. छोटी गलियों तक गाड़ियां न पहुंचने से जगह-जगह कचरे के ढेर लग रहे हैं और नागरिक परेशान हैं.
एक नजर में
- तीन साल पहले करीब 35 लाख रुपये में 12 ई-कचरा गाड़ियां खरीदी गईं
- सामने आई जानकारी: 8 बंद; विभाग प्रमुख का दावा: 8 चालू, 4 बंद
- 39 इलाकों में कचरा उठाने का काम प्रभावित
- शहर में रोजाना करीब 120 टन कचरा
- वाहन शाखा के दो कर्मचारी निलंबित, विभागीय जांच जारी
35 लाख खर्च, फिर भी तीन साल भी नहीं चलीं ई-कचरा गाड़ियां
जालना की संकरी गलियों में बड़ी कचरा गाड़ियां नहीं पहुंच पातीं. इसी समस्या को दूर करने के लिए करीब तीन साल पहले 12 इलेक्ट्रिक गाड़ियां खरीदी गई थीं, जिन पर लगभग 35 लाख रुपये खर्च हुए.
लेकिन खरीद के बाद इनकी देखभाल पर पूरा ध्यान नहीं दिया गया. कई गाड़ियां लंबे समय तक एक ही जगह खड़ी रहीं और समय पर मरम्मत न होने से छोटी-मोटी खराबियां बढ़ती गईं. बताया जा रहा है कि इनकी बैटरियां और जरूरी स्पेयर पार्ट्स स्थानीय बाजार में आसानी से नहीं मिलते, फिर भी इन्हें खरीदा गया. अब सवाल उठ रहा है कि खरीद से पहले देखभाल, मरम्मत और पुर्जों की उपलब्धता का आकलन क्यों नहीं किया गया.
39 इलाकों में कचरा उठाना प्रभावित
गाड़ियों के बंद होने का सबसे ज्यादा असर छोटी गलियों और घनी आबादी वाले मोहल्लों पर पड़ रहा है. दिवाली की सफाई से निकलने वाला अतिरिक्त कचरा समस्या को और गंभीर बना रहा है. समय पर कचरा न उठने से सड़कों और सार्वजनिक जगहों पर गंदगी फैलने का खतरा बढ़ गया है.
विभाग प्रमुख का दावा: 8 गाड़ियां चालू, 4 की मरम्मत जारी
महानगरपालिका के संबंधित विभाग प्रमुख सुधीर डहाले ने अलग जानकारी दी. उनके अनुसार, 12 में से 8 गाड़ियां चालू हैं और 4 बंद हैं. बंद गाड़ियों को मरम्मत के लिए भेजा गया है और जल्द मरम्मत कराकर प्रभावित इलाकों में कचरा उठाना शुरू किया जाएगा.
इस तरह आठ गाड़ियां बंद होने की जानकारी और विभाग प्रमुख के बयान में अंतर है. असली स्थिति साफ करने के लिए सभी गाड़ियों की मौजूदा हालत की जांच जरूरी मानी जा रही है.
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मरम्मत के काम में भी गड़बड़ी की आशंका, दो निलंबित
गाड़ियों की मरम्मत के काम पर भी सवाल उठे हैं और इसमें आर्थिक गड़बड़ी की आशंका जताई गई है. हालांकि किसी तरह के गबन की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी. जानकारी के अनुसार, वाहन शाखा प्रमुख के जरूरी आदेश के बिना गाड़ियां मरम्मत के लिए कहां भेजी गईं, यह जानने के लिए महानगरपालिका आयुक्त को निलंबित वाहन शाखा प्रमुख से पत्र लिखकर स्पष्टीकरण मांगना पड़ा.
वाहन शाखा में सामने आई गड़बड़ियों के मामले में आयुक्त अंजली शर्मा ने तत्कालीन वाहन शाखा प्रमुख अशोक कटारे और प्रभारी लिपिक सचिन ढवले को निलंबित कर दिया है. दोनों के खिलाफ विभागीय जांच शुरू होने की जानकारी है.
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि लाखों रुपये की ये गाड़ियां पूरी क्षमता से कब चलेंगी और प्रभावित इलाकों में नियमित रूप से कचरा उठना कब शुरू होगा.
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रिपोर्ट: इमरान सिद्दीकी, जालना
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