जालना, 2 नवंबर 2026 — दिवाली के त्योहार को लेकर जालना शहर के बाजारों में रौनक बढ़ गई है. रविवार की छुट्टी के चलते सिंधी बाजार सहित प्रमुख व्यापारिक इलाकों में ग्राहकों की भारी भीड़ उमड़ी. लेकिन जिले में सूखे से पैदा हुई आर्थिक तंगी का असर भी साफ दिखा. व्यापारियों के अनुसार, पिछले साल के मुकाबले इस बार कपड़ों की बिक्री करीब 20 से 25 फीसदी घटी है. इसके बावजूद रविवार को शहर में करोड़ों रुपये का कारोबार होने का अनुमान है.

एक नजर में
- रविवार को सिंधी बाजार समेत प्रमुख बाजारों में भारी भीड़
- कपड़ों की बिक्री पिछले साल से 20-25 फीसदी कम
- बोनस मिलने से नौकरीपेशा परिवारों ने की जमकर खरीदारी
- सूखे के कारण किसान परिवारों ने खरीदारी टाली
- आजाद मैदान में सजा पटाखा बाजार
बोनस और छुट्टी से नौकरीपेशा लोगों ने बढ़ाई रौनक
दिवाली से पहले सरकारी और निजी क्षेत्र के कई कर्मचारियों को बोनस मिला है. रविवार की छुट्टी होने से बाजारों में खरीदारी का उत्साह दिखाई दिया. सुबह से ही शहर की प्रमुख दुकानों पर ग्राहक पहुंचने लगे थे.
दिवाली पर नए कपड़े खरीदने की परंपरा के चलते बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक के लिए कपड़े खरीदे गए. सिंधी बाजार में रेडीमेड कपड़ों की दुकानों पर अच्छी-खासी भीड़ रही. आभूषण और घरेलू सामान की दुकानों पर भी दिनभर ग्राहकों की आवाजाही बनी रही.
जालना में सूखे ने बिगाड़ा किसानों का दिवाली बजट
एक ओर नौकरीपेशा परिवार त्योहार की खरीदारी में जुटे हैं, वहीं जिले के किसानों की आर्थिक परेशानी बाजार में साफ नजर आ रही है. इस साल भीषण सूखे के कारण खेती की आमदनी प्रभावित हुई है. हाथ में पैसा नहीं होने से कई किसान परिवारों ने कपड़ों और दूसरे सामान की खरीदारी टाल दी है. कुछ ने सिर्फ जरूरी सामान खरीदकर त्योहार की तैयारी की.
एक कपड़ा व्यापारी के अनुसार, बाजार में भीड़ जरूर है, लेकिन ग्रामीण इलाकों से आने वाले खरीदारों की संख्या और उनकी खरीदारी दोनों में कमी महसूस की जा रही है.
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भीड़ से व्यापारियों को राहत, पर बिक्री में अंतर
रविवार को कपड़ों, ज्वेलरी और घरेलू सामान की दुकानों पर अच्छी भीड़ रहने से व्यापारियों को कुछ राहत मिली. दिनभर की आवाजाही से शहर में करोड़ों रुपये का कारोबार होने का अनुमान जताया गया है. हालांकि व्यापारियों का कहना है कि बाजार में दिखने वाली भीड़ और असली बिक्री में अंतर है. सूखे के कारण ग्रामीण इलाकों की कमजोर खरीद क्षमता का असर कारोबार पर पड़ रहा है.
दिवाली को देखते हुए आजाद मैदान सहित शहर के कई खुले मैदानों में पटाखों के स्टॉल लगाए गए हैं. यहां पीकॉक, हाथ में पकड़कर चलाए जाने वाले पटाखे, 18 शॉट, 30 आवाज वाले पटाखे और कई दूसरी किस्में उपलब्ध हैं. इन दुकानों पर भी खरीदारों की भीड़ दिख रही है.
दिवाली 2026 के प्रमुख त्योहार
- 5 नवंबर: वसुबारस (गाय-बछड़े की पूजा)
- 6 नवंबर: धनतेरस
- 8 नवंबर: लक्ष्मी पूजन
- 10 नवंबर: दिवाली पाडवा
- 11 नवंबर: भाई दूज
त्योहारों को देखते हुए आने वाले दिनों में बाजारों में खरीदारी और बढ़ने की उम्मीद है. फिलहाल जालना के बाजारों में दिवाली की रौनक तो है, लेकिन सूखे से परेशान किसान परिवारों की कमजोर आर्थिक स्थिति ने त्योहार के उत्साह को फीका किया है. ग्रामीण इलाकों के कई परिवार जरूरी खर्च पूरे करने की चिंता में हैं.
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रिपोर्ट: इमरान सिद्दीकी, जालना
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