जालना: महाराष्ट्र के अधीनस्थ न्यायालयों के कर्मचारियों की लंबित वेतन वृद्धि के मुद्दे पर पूर्व विधायक कैलास गोरंट्याल ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से तत्काल निर्णय लेने की मांग की है. गोरंट्याल ने 7 सितंबर 2026 को मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर मुख्यमंत्री कार्यालय में लंबित प्रस्ताव को मंजूरी देने का आग्रह किया.
जालना जिला न्यायालयीन कर्मचारी संगठन गट-क के पदाधिकारियों और अन्य कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधियों ने गोरंट्याल से मुलाकात कर अपनी मांगें रखीं. प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि वेतन वृद्धि का प्रस्ताव लंबे समय से लंबित है और कर्मचारी अब सरकार के फैसले का इंतजार कर रहे हैं.
कर्मचारी प्रतिनिधिमंडल ने गोरंट्याल के सामने रखी मांग
प्रतिनिधिमंडल में एडवोकेट सैयद याकूब अली, संगठन के अध्यक्ष कल्याणराव पाटील टेपले, सचिव त्रिरत्न तोलाजीराव अटकोरे, विनय चौधरी, गणेश भाले, साधना सरोदे और श्रद्धा पुराणीक शामिल थे.
इसके अलावा जालना जिला न्यायालयीन लघुलेखक कर्मचारी संघटना के अध्यक्ष माधव आढे और सचिव जितेंद्र मिटकरी, जालना जिला न्यायालयीन बेलीफ कर्मचारी संघटना के अध्यक्ष शिरीष चव्हाण और सचिव गिरीश लड्डा तथा जालना जिला न्यायालयीन चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी संघटना के अध्यक्ष विनोद मगरे और सचिव गजानन डोंगरे भी प्रतिनिधिमंडल में मौजूद थे.
उच्च न्यायालय की समिति ने 31 जनवरी 2025 को सौंपी रिपोर्ट
कर्मचारियों की वेतन वृद्धि के मामले का अध्ययन करने और सरकार को सिफारिश देने के लिए मुंबई उच्च न्यायालय ने दो न्यायमूर्तियों की विशेष समिति गठित की थी. कर्मचारी संगठनों के अनुसार, समिति ने 31 जनवरी 2025 को अपनी रिपोर्ट महाराष्ट्र सरकार के विधि एवं न्याय विभाग को सौंप दी थी.
कर्मचारी संगठनों का कहना है कि प्रस्ताव से जुड़ी प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और अब मामला मुख्यमंत्री कार्यालय में मंजूरी के लिए लंबित है. बॉम्बे हाई कोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट पर न्यायालय से संबंधित सूचनाएं और आदेश उपलब्ध हैं.
बढ़ते काम के बोझ और महंगाई का दिया हवाला
मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में कैलास गोरंट्याल ने कहा कि अधीनस्थ न्यायालयों के कर्मचारी न्याय व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं. अदालतों में मामलों की संख्या बढ़ने के साथ कर्मचारियों का कामकाज और जिम्मेदारियां भी बढ़ी हैं. ऐसे में महंगाई को देखते हुए कर्मचारियों को उचित वेतन वृद्धि मिलना जरूरी है.
गोरंट्याल ने यह भी कहा कि उच्च न्यायालय के कर्मचारियों को वेतन वृद्धि का लाभ मिल चुका है, जबकि अधीनस्थ न्यायालयों के कर्मचारी लंबे समय से इस निर्णय की प्रतीक्षा कर रहे हैं. उन्होंने मुख्यमंत्री से लंबित प्रस्ताव पर जल्द निर्णय लेने की मांग की.
गोरंट्याल ने कर्मचारी प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि वह मुंबई में मुख्यमंत्री से मुलाकात कर पूरे मामले को उनके संज्ञान में लाएंगे.
16 सितंबर से चरणबद्ध आंदोलन, 17 नवंबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी
वेतन वृद्धि समेत अन्य लंबित मांगों को लेकर महाराष्ट्र राज्य न्यायालयीन कर्मचारी महासंघ ने चरणबद्ध आंदोलन की घोषणा की है. कर्मचारियों के कार्यक्रम के अनुसार आंदोलन इस प्रकार रहेगा:
- 16 सितंबर 2026: सभी न्यायालयीन कर्मचारी काली पट्टी बांधकर काम करेंगे.
- 16-17 अक्टूबर 2026: दो दिन काली पट्टी बांधकर विरोध प्रदर्शन.
- 5 नवंबर 2026: दीपावली से पहले सामूहिक अवकाश.
- 6 नवंबर 2026: धनतेरस के दिन अन्नत्याग आंदोलन.
- 7 नवंबर 2026: दीपावली के तीसरे दिन अन्नत्याग आंदोलन.
- 17 नवंबर 2026: मांगें पूरी नहीं होने पर अनिश्चितकालीन हड़ताल.
पक्षकारों और अन्य विभागों को परेशानी से बचाने की बात
महासंघ ने कहा है कि आंदोलन शांतिपूर्ण रहेगा. अदालतों में आने वाले पक्षकारों, पुलिस अधिकारियों और अन्य विभागों के कर्मचारियों को अनावश्यक परेशानी से बचाने का प्रयास किया जाएगा. कर्मचारी संगठनों ने सरकार से आंदोलन तेज होने से पहले वेतन वृद्धि के प्रस्ताव को मंजूरी देने और अन्य लंबित मांगों का समाधान करने की अपील की है.
अब सरकार के फैसले पर कर्मचारियों की नजर
वेतन वृद्धि का प्रस्ताव मुख्यमंत्री कार्यालय में लंबित होने और कर्मचारी महासंघ की ओर से आंदोलन की घोषणा के बाद अब सभी की नजर राज्य सरकार के निर्णय पर है. समय रहते प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है या कर्मचारी आंदोलन को आगे बढ़ाते हैं, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा.
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आधिकारिक स्रोत: महाराष्ट्र शासन की आधिकारिक वेबसाइट और बॉम्बे हाई कोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट.

