मुंबई, 14 अक्टूबर 2026। देश के बंदरगाहों पर कागजी प्रक्रिया आसान बनाने, जहाज निर्माण उद्योग को वित्तीय सुरक्षा देने और बंदरगाहों के आसपास औद्योगिक विकास को गति देने के लिए केंद्र और तटीय राज्यों ने कई महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं। मुंबई में 13 अक्टूबर को संपन्न 21वीं समुद्री राज्य विकास परिषद (एमएसडीसी) की बैठक में तय हुआ कि वन नेशन वन पोर्ट प्रोसेस से जुड़े सुधार मार्च 2027 तक सभी बंदरगाहों पर लागू किए जाएंगे।
एक देश, एक बंदरगाह प्रक्रिया का मतलब
वर्तमान में विभिन्न बंदरगाहों पर दस्तावेजी आवश्यकताएं और प्रक्रियाएं अलग हो सकती हैं। प्रस्तावित सुधारों में एक समान दस्तावेजी व्यवस्था, प्रक्रियाओं का पुनर्गठन और विभिन्न मंत्रालयों के बीच समन्वय शामिल है। परिषद ने सभी बंदरगाहों को मार्च 2027 तक ‘मैरीटाइम सिंगल विंडो—सागर सेतु’ से जोड़ने का लक्ष्य रखा है। इसका उद्देश्य समुद्री व्यापार में प्रक्रिया को अधिक एकरूप और डिजिटल बनाना है।
क्या फैसला तत्काल लागू हो गया?
परिषद ने कार्यान्वयन की समयसीमा तय की है। इसका अर्थ यह नहीं कि 14 अक्टूबर से सभी बंदरगाहों पर एक जैसी प्रणाली पूरी तरह काम करने लगी है। वास्तविक बदलाव संबंधित नियमों, तकनीकी एकीकरण और राज्यों की तैयारियों के बाद दिखाई देंगे।
जहाज निर्माण के लिए दो बीमा उत्पाद
बैठक में जहाज निर्माण परियोजनाओं के वित्तीय जोखिम को कम करने के उद्देश्य से ‘शिपबिल्डिंग प्रोजेक्ट क्रेडिट रिस्क इंश्योरेंस पॉलिसी’ और ‘बिजनेस क्रेडिट शील्ड पॉलिसी—शिपबिल्डर्स’ नामक उत्पाद शुरू किए गए। सरकार का कहना है कि इनका उद्देश्य भुगतान में देरी और परियोजनाओं से जुड़े जोखिमों से घरेलू जहाज निर्माण उद्योग को कुछ सुरक्षा देना है। बीमा कवरेज की वास्तविक शर्तें संबंधित उत्पाद दस्तावेजों पर निर्भर करेंगी।
मुंबई बैठक में कौन शामिल हुआ?
केंद्रीय बंदरगाह, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने बैठक की अध्यक्षता की। महाराष्ट्र के मत्स्य पालन और बंदरगाह विकास मंत्री नितेश राणे सहित विभिन्न तटीय राज्यों के मंत्री, समुद्री बोर्डों के अधिकारी, प्रमुख बंदरगाहों के प्रतिनिधि और केंद्रीय संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
बंदरगाहों से जुड़े औद्योगिक क्षेत्र
परिषद ने राज्यों से केंद्र के सहयोग से बंदरगाह-आधारित औद्योगिक क्षेत्रों के विकास पर काम करने को कहा। इनमें भूमि की उपलब्धता, तैयार आधारभूत सुविधाएं और अनुमति प्रक्रियाओं में तेजी पर जोर दिया गया। ऐसे औद्योगिक क्षेत्रों की वास्तविक स्थापना स्थान-विशेष परियोजना, निवेश और मंजूरी पर निर्भर करेगी।
बंदरगाह शुल्क में पारदर्शिता
बैठक में बंदरगाह शुल्कों को इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से प्रकाशित करने का निर्णय भी लिया गया। इससे व्यापारियों और सेवा उपयोगकर्ताओं को लागू शुल्कों की जानकारी अधिक व्यवस्थित रूप में मिल सकती है। हालांकि किसी बंदरगाह के शुल्क तत्काल घटाने की घोषणा इस फैसले का हिस्सा नहीं है।
राष्ट्रीय बंदरगाह योजना और परिवहन संपर्क
परिषद ने राष्ट्रीय दृष्टिकोण योजना की प्राथमिकताओं का समर्थन किया। राज्यों से सड़क, रेल, अंतर्देशीय जलमार्ग, पाइपलाइन और अन्य माध्यमों के साथ बंदरगाहों का संपर्क बेहतर बनाने वाली परियोजनाओं को गति देने का आग्रह किया गया। इसका उद्देश्य माल परिवहन में अलग-अलग माध्यमों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना है।
2030 और 2047 की समुद्री दृष्टि
बैठक में मैरीटाइम इंडिया विजन 2030 और मैरीटाइम अमृत काल विजन 2047 के लक्ष्यों को अपनाया गया। इन व्यापक योजनाओं में बंदरगाह, जहाज निर्माण, हरित नौवहन, अंतर्देशीय जलमार्ग और अंतरराष्ट्रीय सहयोग से जुड़ी 500 से अधिक पहल शामिल बताई गई हैं। सभी पहल पूरी हो चुकी हैं, ऐसा दावा नहीं किया गया है।
महाराष्ट्र के लिए क्या महत्व?
मुंबई पोर्ट और जवाहरलाल नेहरू पोर्ट सहित महाराष्ट्र के समुद्री व्यापार ढांचे के लिए दस्तावेजी प्रक्रिया में एकरूपता, डिजिटल सेवाएं और बेहतर परिवहन संपर्क महत्वपूर्ण हो सकते हैं। बंदरगाहों से जुड़े उद्योगों में भविष्य में निवेश की संभावनाएं भी बन सकती हैं। हालांकि मुंबई की बैठक से किसी विशेष महाराष्ट्र जिले के लिए नई परियोजना स्वीकृत होने का दावा अलग आधिकारिक दस्तावेज के बिना नहीं किया जा सकता।
नए कानून के तहत परिषद की भूमिका
भारतीय बंदरगाह अधिनियम 2025 के तहत 15 मई 2026 को परिषद को वैधानिक परामर्शदात्री निकाय का दर्जा मिला। यह दर्जा मिलने के बाद परिषद की पहली बैठक थी। परिषद ने बंदरगाह डेटा और शुल्क पारदर्शिता संबंधी मसौदा दिशानिर्देशों को भी मंजूरी दी तथा राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को तीन महीने में आवश्यक अधीनस्थ नियम अधिसूचित करने का निर्देश दिया।
व्यापारियों को आगे क्या देखना चाहिए?
अगले कुछ महीनों में सागर सेतु एकीकरण, बंदरगाह शुल्कों की ऑनलाइन जानकारी, दस्तावेजों के मानकीकरण और नई बीमा योजनाओं की पात्रता शर्तें प्रमुख विषय होंगे। समुद्री व्यापार करने वाले उद्यमों को संबंधित बंदरगाह प्राधिकरण की आधिकारिक सूचना के आधार पर अपनी प्रक्रियाएं अपडेट करनी चाहिए।
आधिकारिक स्रोत: बंदरगाह, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय, 13 अक्टूबर 2026। संबंधित समाचार: पीएम गतिशक्ति के पांच साल और बुनियादी ढांचे की योजना।
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