जालना (प्रतिनिधि)। तेजी से बढ़ती आबादी और शहर के विस्तार को देखते हुए जालना महानगरपालिका ने करीब 900 करोड़ रुपये की समानांतर जलापूर्ति योजना प्रस्तावित की है। इस योजना की क्षमता 60 मिलियन लीटर प्रतिदिन (एमएलडी) होगी। मंजूरी और क्रियान्वयन के बाद मौजूदा 55 एमएलडी के साथ शहर की कुल निर्धारित जलापूर्ति क्षमता 115 एमएलडी तक पहुंच सकती है। हालांकि यह क्षमता वास्तविक दैनिक आपूर्ति की गारंटी नहीं है।
2060 तक की जरूरतों पर नजर: प्रस्ताव में वर्ष 2060 तक लगभग साढ़े सात लाख अनुमानित आबादी को ध्यान में रखा गया है। नई कॉलोनियों और भविष्य के संभावित सीमा विस्तार से पेयजल की मांग बढ़ सकती है।
महाराष्ट्र जीवन प्राधिकरण को भेजा प्रस्ताव
महानगरपालिका के अभियंता राजेश बागले के अनुसार समानांतर जलापूर्ति परियोजना का प्रस्ताव महाराष्ट्र जीवन प्राधिकरण (एमजेपी) को भेजा गया है। प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक विश्व बैंक से वित्तीय सहायता मिलने की संभावना है, लेकिन वित्तपोषण और परियोजना की औपचारिक मंजूरी की पुष्टि अभी नहीं हुई है।
55 एमएलडी मौजूदा और 60 एमएलडी प्रस्तावित
मौजूदा योजना की निर्धारित क्षमता 55 एमएलडी है। यह वर्ष 2031 तक लगभग 3 लाख 45 हजार की अनुमानित आबादी के लिए तैयार की गई थी। वर्ष 2026 में शहर की आबादी करीब पांच लाख होने का अनुमान बताया जा रहा है। प्रस्ताव के अनुसार पुरानी व्यवस्था को बंद करने के बजाय उसके समानांतर नई 60 एमएलडी व्यवस्था चलाई जाएगी। दोनों की संयुक्त डिजाइन क्षमता 115 एमएलडी होगी। वास्तविक आपूर्ति जलस्रोतों में पानी की उपलब्धता, पाइपलाइन, पंपिंग और संचालन पर निर्भर करेगी।
जयकवाड़ी से जलापूर्ति का पुराना सफर
जयकवाड़ी बांध से जालना तक पानी लाने की लगभग 124 करोड़ रुपये की परियोजना की पहल वर्ष 2001 में हुई थी। इसे 2005-06 में सरकारी मंजूरी मिली, 2009 में कार्यादेश जारी हुआ और 2013 में योजना कार्यान्वित हुई। वर्तमान में जयकवाड़ी-जालना जलापूर्ति व्यवस्था के अलावा निजामकालीन घाणेवाडी जलाशय आधारित प्रणाली भी शहर के जलस्रोतों में शामिल है।
नई बस्तियों के लिए दीर्घकालीन तैयारी
जालना के बढ़ते शहरीकरण के कारण नए आवासीय इलाकों तक पानी पहुंचाने की चुनौती भी बढ़ रही है। प्रस्तावित समानांतर योजना का उद्देश्य वर्तमान जरूरतों के साथ भविष्य की मांग को पूरा करने के लिए बुनियादी ढांचा बढ़ाना है। इससे संबंधित वितरण नेटवर्क और नियमित रखरखाव की व्यवस्था भी महत्वपूर्ण होगी।
मंजूरी और निधि मिलने के बाद ही शुरू होगा काम
करीब 900 करोड़ रुपये की योजना फिलहाल प्रस्ताव के स्तर पर है। प्रशासनिक और तकनीकी मंजूरियां तथा वित्तीय व्यवस्था पूरी होने के बाद ही क्रियान्वयन का रास्ता साफ होगा। विश्व बैंक से संभावित सहायता को स्वीकृत निधि नहीं माना जाना चाहिए। शहरवासियों को वास्तविक लाभ कब मिलेगा, यह मंजूरी, जलस्रोत और काम की प्रगति पर निर्भर करेगा।
संबंधित जानकारी: NewsNationOnline पर जालना जलापूर्ति से जुड़ी अन्य खबरें। आधिकारिक जानकारी के लिए महाराष्ट्र जीवन प्राधिकरण तथा विश्व बैंक की वेबसाइट देखें।
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