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5 दिसंबर की डेडलाइन नज़दीक: वक्फ़ प्रॉपर्टियों पर संकट —  मौलाना सैयद जमील का आरोप

5 दिसंबर की डेडलाइन नज़दीक: वक्फ़ प्रॉपर्टियों पर अस्तित्व का संकट

मुंबई (छोटा सोनापुर), रविवार — सुन्नी मस्जिद बिलाल में आयोजित अहम बैठक में “उम्मीद पोर्टल” पर वक्फ़ प्रॉपर्टियों के रजिस्ट्रेशन को लेकर गहरी चिंता जताई गई। जालना मौलाना सैयद जमील साहब ने मंच से तीखा आरोप लगाते हुए कहा — “कुछ ट्रस्टी ऐसे भी हैं जिन्हें वक्फ़ की अमानतों से कोई मतलब नहीं… उन्हें सिर्फ अपनी जेब भरनी है। इसलिए वे जानबूझकर रजिस्ट्रेशन टाल रहे हैं। यह सिर्फ अपराध नहीं—यह कौम से ग़द्दारी है।”


माहौल भावनात्मक था—हर चेहरे पर चिंता और हर दिल में एक ही सवाल: अगर वक्फ़ की अमानतें बचानी हैं, तो आखिर और कितनी देर? सभा में उलेमा, ट्रस्टी और समुदाय के प्रतिनिधि बड़ी संख्या में मौजूद रहे। यह बैठक केवल प्रशासनिक औपचारिकता नहीं, बल्कि एक जागरण और चेतावनी थी, जिससे संदेश गया कि 5 दिसंबर 2025 की समय-सीमा अब बिल्कुल नज़दीक है।

“18,369 अमानतें… और बस 3,500 सुरक्षित?” — हज़रत मौलाना मोइनुद्दीन अशरफ अशरफी जिलानी

बैठक की अध्यक्षता कर रहे हज़रत मौलाना सैयद शाह मोइनुद्दीन अशरफ अशरफी जिलानी (मोइन मियां) ने आंकड़े रखते हुए कहा, “महाराष्ट्र में हमारी 18,369 वक्फ़ प्रॉपर्टियाँ दर्ज हैं… लेकिन उनमें से केवल लगभग 3,500 की ही सुरक्षा सुनिश्चित हो पाई है। क्या यह संख्या हमारी जागरूकता की कहानी है या हमारी लापरवाही की?” उन्होंने दोहराया कि 5 दिसंबर 2025 आख़िरी तारीख है—इसके बाद वक्फ़ की अमानतें संकट में पड़ सकती हैं।

“यह केवल दस्तावेज़ नहीं—यह हमारी तहज़ीब, हमारी पहचान, और हमारे बुज़ुर्गों की छोड़ी हुई निशानी है।”— मोइन मियां

“आज की लापरवाही… कल की बर्बादी” — सईद नूरी

रज़ा अकादमी के संस्थापक सईद नूरी ने भावुक अपील में कहा कि कानून अपनी जगह है, लेकिन जमात की जिम्मेदारी उससे भी बड़ी है। “वक्फ़ की हिफ़ाज़त हमारी नसों की आवाज़ है। जो ट्रस्टी अभी भी सो रहे हैं, उन्हें याद रखना चाहिए—आज की लापरवाही आने वाली पीढ़ियों पर भारी पड़ेगी।”

“कुछ लोग जानबूझकर टाल रहे हैं… ताकि अमानतें बेच सकें!” — सैयद जमील (जालना)

जालना से आए पूर्व बोर्ड सदस्य सैयद जमील साहब ने मंच से कहा, “कुछ ट्रस्टी ऐसे भी हैं जिन्हें वक्फ़ की अमानतों से कोई मतलब नहीं… उन्हें सिर्फ अपनी जेब भरनी है। इसलिए वे जानबूझकर रजिस्ट्रेशन टाल रहे हैं। यह सिर्फ अपराध नहीं—यह कौम से ग़द्दारी है।” उनके शब्द कटु थे, पर दर्द सच्चा—और यही दर्द सभा में बैठे ट्रस्टीज़ को बेचैन कर गया।

कानूनी कार्रवाई की चेतावनी — 6 महीने की जेल तक का खतरा

एडवोकेट जिया अल-मुस्तफा ने स्पष्ट किया कि समय-सीमा तक रजिस्ट्रेशन न होने पर सम्बंधित प्रॉपर्टी वक्फ़ के दायरे से बाहर मानी जा सकती है और जिम्मेदार व्यक्तियों पर जुर्माना एवं 6 महीने तक की जेल जैसी कार्रवाई संभव है। “आज दस्तावेज़ अपलोड करने से डर रहे हैं, तो कल अदालत आपके दरवाजे पर होगी,” उन्होंने चेताया।

“वक्फ़ को सबसे ज़्यादा नुकसान अपनों ने पहुंचाया” — मुफ़्ती इब्राहिम आसी

मुफ़्ती इब्राहिम आसी ने कहा कि बाहरी हस्तक्षेप से ज़्यादा नुकसान अपनों की लापरवाही ने किया। उन्होंने छोटा कब्रिस्तान का ज़िक्र करते हुए बताया कि सवा चार एकड़ क्षेत्र में 13 दरगाहें और 2 मस्जिदें मौजूद हैं—जो हमारी धरोहर हैं—मगर कुछ लोग उन्हें बेचने के सपने देख रहे हैं। सभा इस क्षण में बिल्कुल खामोश हो गई।

12 नवंबर को अंतिम समीक्षा — “अब वक़्त नहीं बचा”

बैठक के अंत में घोषणा हुई कि 12 नवंबर को अगली समीक्षा बैठक होगी, जिसमें रजिस्ट्रेशन प्रगति पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।मुख्य बिंदुस्थिति/तारीखकुल दर्ज वक्फ़ प्रॉपर्टियाँ (महाराष्ट्र)18,369सुरक्षित/रजिस्टर मानी जा रहीं~3,500रजिस्ट्रेशन की अंतिम तिथि5 दिसंबर 2025अगली समीक्षा बैठक12 नवंबर

तुरंत करने योग्य कदम (ट्रस्टीज़/मैनेजमेंट के लिए)

  • उम्मीद पोर्टल पर लॉगिन/रजिस्ट्रेशन पूरा करें और संपत्ति संबंधी सभी दस्तावेज़ (मालिकाना/नक्शा/पुराने रिकॉर्ड) अपलोड करें।
  • यदि किसी दस्तावेज़ में कमी है, तो एफिडेविट और उपलब्ध रिकॉर्ड के साथ स्पष्टीकरण संलग्न करें।
  • लंबित प्रॉपर्टियों की चेकलिस्ट बनाकर हर दिन प्रगति अपडेट करें; मीटिंग की मिनट्स सुरक्षित रखें।
  • जागरूकता के लिए मस्जिद/मदरसा स्तर पर छोटी-छोटी सभाएँ करें, ताकि समुदाय सहयोग कर सके।
  • कानूनी विवाद वाली प्रॉपर्टियों के लिए काउंसिल नियुक्त कर तारीख़वार रणनीति तय करें।

“वक्फ़ की हिफ़ाज़त हमारी ईमानदारी, हमारी जिम्मेदारी… हम उम्मीद पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन तुरंत पूरा करेंगे!”— सभा में सामूहिक प्रतिज्ञा


संपादकीय टिप्पणी

यह मुद्दा केवल काग़ज़ी प्रक्रिया नहीं है; यह हमारी सांस्कृतिक विरासत, धार्मिक धरोहर और सामुदायिक ज़िम्मेदारी से जुड़ा प्रश्न है। समय पर रजिस्ट्रेशन से न केवल संपत्तियाँ सुरक्षित रहेंगी बल्कि पारदर्शिता और जवाबदेही भी सुनिश्चित होगी।

Jamil maulana

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