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वक़्फ़ संशोधन विधेयक 2024 पर घमासान! मुस्लिम संगठनों का जबरदस्त विरोध

Ruckus over Waqf Amendment Bill 2024! Strong opposition from Muslim organizations

मुंबई: अखिल भारतीय सुन्नी जमीयतुल उलेमा के अध्यक्ष हज़रत सैयद मोइन मियां साहब, रज़ा अकादमी और कई अन्य प्रमुख धार्मिक संगठनों ने वक़्फ़ संशोधन विधेयक 2024 के संयुक्त संसदीय समिति (JPC) द्वारा पारित किए जाने पर कड़ा ऐतराज जताया है।

हज़रत मोइन मियां ने इस फैसले की कड़ी निंदा करते हुए खुलासा किया कि उन्होंने एडवोकेट रिज़वान मर्चेंट सहित कई कानूनी विशेषज्ञों के साथ पहली JPC बैठक में भाग लिया था और विधेयक के खिलाफ एक विस्तृत ज्ञापन प्रस्तुत किया था। लेकिन हमारी आपत्तियों को पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया गया! इतना ही नहीं, विपक्षी दलों द्वारा प्रस्तावित सभी संशोधनों को खारिज कर दिया गया, जबकि भाजपा सांसदों के 14 संशोधनों को बिना किसी बहस के स्वीकार कर लिया गया!

8 अगस्त 2024 को लोकसभा में पेश किए गए इस विधेयक को मुस्लिम समुदाय की धार्मिक स्वायत्तता पर हमला बताया जा रहा है। आलोचकों के अनुसार, यह विधेयक भारतीय संविधान के अनुच्छेद 25 का स्पष्ट उल्लंघन करता है, जो धार्मिक संपत्तियों के प्रबंधन का अधिकार सुनिश्चित करता है।

विधेयक के विवादास्पद प्रावधान:

  • ✔ वक़्फ़ बोर्ड और न्यायाधिकरणों को राज्य सरकारों के अधीन करना – इसे धार्मिक अधिकारों का सीधा उल्लंघन माना जा रहा है।
  • ✔ वक़्फ़ बोर्ड में गैर-मुसलमानों की अनिवार्य नियुक्ति – समुदाय के धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप के रूप में देखा जा रहा है।
  • ✔ सरकारी नियंत्रण बढ़ने का डर – वक़्फ़ संपत्तियों के राजनीतिक और व्यक्तिगत लाभ के लिए दुरुपयोग की आशंका।

अखिल भारतीय सुन्नी जमीयतुल उलेमा के सचिव मौलाना खलीलुर्रहमान नूरी ने सरकार को सख्त चेतावनी देते हुए कहा,
“हम इस विधेयक को पूरी तरह से खारिज करते हैं! सरकार को मुस्लिम समुदाय से सार्थक बातचीत करनी चाहिए, अन्यथा इसका कड़ा विरोध होगा।”

अब सवाल यह है कि सरकार अपने फैसले पर पुनर्विचार करेगी या फिर उसे देशव्यापी विरोध का सामना करना पड़ेगा!


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Imran Siddiqui

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