मराठा आरक्षण आंदोलन: मनोज जरांगे पाटील शिवनेरी किले पर नमन कर मुंबई रवाना; पुणे में यातायात बदला
मराठा समाज को आरक्षण दिलाने की मांग को नई गति देते हुए आंदोलन का नेतृत्व कर रहे
मनोज जरांगे पाटील अपने हजारों समर्थकों के साथ
मुंबई की ओर कूच कर चुके हैं। 27 अगस्त को जालना जिले के अंतरवाली सराटी से
रवाना हुआ काफिला 28 अगस्त को ऐतिहासिक शिवनेरी किले
पहुँचा, जहाँ जरांगे पाटील ने छत्रपति शिवाजी महाराज को नमन किया और अपने आंदोलन को
शांति, अनुशासन व एकजुटता के साथ आगे बढ़ाने का संकल्प दोहराया।
आधी रात करीब दो बजे पारनेर में काफिले का जंगी स्वागत किया गया। बड़ी संख्या में
मराठा समाज के युवा, महिलाएं और वरिष्ठ नागरिक मोर्चे में शामिल हैं। आंदोलनकारियों ने
दीर्घकालीन प्रदर्शन की संभावना को देखते हुए अपने साथ एक माह तक चलने लायक
अनाज और आवश्यक सामग्री भी रखी है। पूरे मार्ग पर
स्वयंसेवक चिकित्सा सहायता, पानी और भोजन की व्यवस्था संभाल रहे हैं।
मांगें: “मराठा और कुनबी एक ही”—अध्यादेश लागू कर ओबीसी में आरक्षण
जरांगे पाटील ने दोहराया कि मराठा और कुनबी समुदाय एक ही सामाजिक ताने-बाने का हिस्सा हैं,
इसलिए “सगेसोयरे अध्यादेश” की प्रभावी अंमलबजावनी की जाए और
मराठा समाज को ओबीसी वर्ग से आरक्षण दिया जाए। उनका कहना है कि कानूनी और प्रशासनिक
स्तर पर लंबित प्रक्रियाओं को शीघ्र गति दी जाए ताकि समुदाय के युवाओं को शिक्षा और
रोजगार में समयबद्ध अवसर मिल सकें।
आज़ाद मैदान में प्रदर्शन: केवल एक दिन की अनुमति, आंदोलन जारी रखने का इरादा
आंदोलन का केंद्र बिंदु 29 अगस्त को मुंबई के आज़ाद मैदान में प्रस्तावित
धरना-प्रदर्शन है। प्रशासन की ओर से कार्यक्रम के लिए फिलहाल एक दिन की अनुमति
प्रदान की गई है। हालांकि आंदोलनकारी स्पष्ट कर चुके हैं कि उनकी
लड़ाई आरक्षण के निर्णय तक जारी रहेगी। अनुशासन और शांति बनाए रखने
के लिए आयोजकों ने प्रतिभागियों से अपील की है कि वे प्रशासन के निर्देशों का पालन करें,
वरिष्ठ नागरिकों और महिलाओं की सुरक्षा को प्राथमिकता दें और किसी भी अफवाह से दूर रहें।
समूहों में यात्रा करें और किसी भी आपात स्थिति में नज़दीकी पुलिस/स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करें।
पुणे में यातायात में बदलाव: जाम से बचने के लिए रूट डायवर्जन
मोर्चे के मार्ग से जुड़े क्षेत्रों में यातायात दबाव को देखते हुए पुणे पुलिस ने
अस्थायी रूट डायवर्जन लागू किए हैं ताकि शहर में अनावश्यक जाम न लगे। प्रशासन ने नागरिकों से
वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करने और यात्रा के लिए अतिरिक्त समय निकालने की अपील की है।
- नगर–कल्याण मार्ग: यातायात को
जांबुत फाटा (क्र. 14) से मोड़कर
बोर–बेल्हे–अळकुटी–पारनेर–अहिल्यानगर मार्ग पर प्रवाहित किया गया है। - नारायणगांव–जुन्नर दिशा: वाहनों को
ओझर फाटा–कारखाना फाटा–शिरोली बुद्रुक मार्ग से डायवर्ट किया गया है।
पुलिस ने नागरिकों को अनावश्यक यात्रा से बचने, सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करने और
आपातकालीन सेवाओं के वाहनों के लिए रास्ता देने की सलाह दी है। साथ ही, मोर्चे के
प्रतिभागियों से अपील है कि वे निर्दिष्ट पार्किंग स्थलों का ही उपयोग करें और
नियम-विरुद्ध पार्किंग से परहेज़ करें।
स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा प्रबंध
भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा के लिए पुलिस बल, ट्रैफिक वार्डन और स्थानीय प्रशासनिक टीमों की
तैनाती बढ़ाई गई है। संवेदनशील चौराहों पर बैरिकेडिंग, एंबुलेंस स्टैंडबाय, और
कंट्रोल-रूम के माध्यम से रीयल-टाइम मॉनिटरिंग की व्यवस्था की गई है। प्रशासन का कहना है कि
शांतिपूर्ण और व्यवस्थित माहौल बनाए रखना सभी की साझा जिम्मेदारी है।
समुदाय की अपेक्षाएं और आगे का रास्ता
मराठा समाज के विभिन्न संगठनों का कहना है कि आरक्षण से संबंधित समाधान
संवैधानिक दायरे में, डेटा-आधारित और
समावेशी होना चाहिए जिससे किसी वर्ग के अधिकारों का हनन न हो।
आंदोलन के माध्यम से उनकी प्राथमिक अपेक्षा है कि सरकार समयबद्ध रोडमैप प्रस्तुत करे,
जिससे शिक्षा और रोजगार में वास्तविक, मापनीय सुधार हो सकें।
उधर, व्यापारी और आम नागरिक भी चाहते हैं कि संवाद और मध्यस्थता के ज़रिये
स्थिति का स्थायी समाधान निकले ताकि आर्थिक गतिविधियाँ और दैनिक जीवन सामान्य रूप से चल सकें।
सामाजिक संगठनों ने शांति, परस्पर सम्मान और सहयोग की अपील की है।

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