जालना सामूहिक दुष्कर्म मामला: 5 दोषियों को 20 साल की कड़ी सजा, जिला सत्र न्यायालय का बड़ा फैसला
जालना | संवाददाता
जालना जिले के बदनापुर थाना क्षेत्र में दर्ज सामूहिक दुष्कर्म मामले में जिला एवं सत्र न्यायालय ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए पांच दोषियों को 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने सभी दोषियों पर 60 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना अदा नहीं करने पर 6 महीने की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।
यह फैसला अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश क्रमांक-3 श्री कृपेश विजय मोरे की अदालत ने सुनाया। यह मामला वर्ष 2022 में दर्ज सामूहिक दुष्कर्म प्रकरण से संबंधित है, जिसने उस समय पूरे जिले को झकझोर दिया था।
भारतीय दंड संहिता की धारा 376 और 376(डी) (सामूहिक दुष्कर्म) के तहत मामला दर्ज किया गया था। कानून से संबंधित अधिक जानकारी भारत सरकार की आधिकारिक वेबसाइट पर देखी जा सकती है:
https://www.indiacode.nic.in/
दोषी ठहराए गए आरोपी
न्यायालय द्वारा जिन आरोपियों को दोषी ठहराया गया, उनके नाम इस प्रकार हैं:
- संदीप कारभारी कोल्हे (22 वर्ष)
- सुंदरराव किसनराव कोल्हे (40 वर्ष)
- दत्तु कुशाभाऊ खमाटे (60 वर्ष)
- बाबासाहेब संतोष कोल्हे (34 वर्ष)
- लक्ष्मण बाबूराव सोरमार (34 वर्ष)
सभी आरोपी दाभाडी गांव, तहसील बदनापुर, जिला जालना के निवासी हैं।
न्यायालय ने सभी आरोपियों को 20 वर्ष के कठोर कारावास और 60 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है।
घटना का विवरण
यह घटना 28 जुलाई 2022 की रात की है। पीड़िता अपने पति के साथ घर पर सो रही थी। रात लगभग 12:30 बजे पति की नींद खुली तो पीड़िता घर में नहीं मिली। इसके बाद परिजनों ने उसकी तलाश शुरू की।
कुछ समय बाद रिश्तेदारों से जानकारी मिली कि पीड़िता टेंभुर्णी बस स्टैंड पर मौजूद है। वहां पहुंचने पर पीड़िता अर्धचेतन अवस्था में मिली, जिसके बाद उसे घर लाया गया।
पीड़िता ने बताया कि आरोपी संदीप कारभारी कोल्हे उसे मोटरसाइकिल पर बैठाकर सिल्लोड ले जाने का बहाना बनाकर दाभाडी गांव ले गया, जहां एक पेड़ के नीचे उसके साथ जबरन दुष्कर्म किया गया।
इसके बाद आरोपी पीड़िता को दाभाडी स्थित एक ढाबे पर ले गए, जहां कमरे के अंदर अन्य आरोपियों ने भी उसकी इच्छा के विरुद्ध बारी-बारी से दुष्कर्म किया। बाद में आरोपी पीड़िता को टेंभुर्णी बस स्टैंड पर छोड़कर फरार हो गए।
पीड़िता और उसके पति ने बाद में सभी आरोपियों की पहचान की, जिसके आधार पर बदनापुर पुलिस थाने में मामला दर्ज किया गया।
अदालत में पेश हुए महत्वपूर्ण साक्ष्य
इस मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से कुल 7 गवाहों के बयान अदालत में दर्ज किए गए, जिनमें पीड़िता और उसके पति की गवाही महत्वपूर्ण रही।
मामले की जांच के दौरान पीड़िता की मानसिक स्थिति की चिकित्सकीय जांच भी कराई गई। जांच रिपोर्ट में बताया गया कि पीड़िता मानसिक बीमारी से पीड़ित है, लेकिन उसकी समझने और बयान देने की क्षमता सामान्य पाई गई।
मानसिक परीक्षण में पीड़िता का बुद्धांक (IQ) लगभग 95 पाया गया, जिसके आधार पर अदालत ने उसकी गवाही को विश्वसनीय माना।
महिला सुरक्षा और कानूनी सहायता से संबंधित जानकारी यहां देखी जा सकती है:
https://ncw.nic.in/
सरकारी पक्ष की पैरवी
इस मामले में सरकार की ओर से विशेष सरकारी अधिवक्ता एडवोकेट वर्षा लक्ष्मीकांत मुकीम तथा सरकारी अधिवक्ता शशांक ढोकरट ने अदालत में प्रभावी पैरवी की। मजबूत साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर अदालत ने सभी आरोपियों को दोषी करार दिया।
महिला सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण फैसला
जिला सत्र न्यायालय के इस फैसले को महिला सुरक्षा और कानून व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण निर्णय माना जा रहा है। स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने फैसले का स्वागत करते हुए इसे न्याय की जीत बताया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे फैसले समाज में अपराधियों के खिलाफ कड़ा संदेश देते हैं और महिलाओं के प्रति अपराधों पर अंकुश लगाने में मदद करते हैं।
मुख्य बिंदु (Key Points)
- जालना सामूहिक दुष्कर्म मामले में 5 दोषियों को सजा
- जिला सत्र न्यायालय ने सुनाया फैसला
- सभी दोषियों को 20 वर्ष का कठोर कारावास
- 60 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया गया
- जुर्माना न भरने पर अतिरिक्त सजा
- बदनापुर थाना क्षेत्र का मामला
- वर्ष 2022 की घटना में आया फैसला
- 7 गवाहों के बयान अदालत में दर्ज हुए
- पीड़िता की गवाही को अदालत ने माना विश्वसनीय
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