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परवानगी प्रक्रिया में देरी से विकास ठप, बेरोजगारी बढ़ी और राजस्व का नुकसान

Delay in permission process has stalled development, increased unemployment and loss of revenue

जालना क्रेडाई प्रतिनिधिमंडल ने संभागीय आयुक्त के समक्ष रखी समस्याएं

Jalna CREDAI Delegation Raised Issues Before Divisional Commissioner

जालना – परवानगी (Permission) प्रक्रिया में हो रही देरी के कारण निर्माण (Construction) कार्य ठप पड़ गया है, जिससे जालना का विकास (Development) रुक गया है। इसके चलते सरकार के राजस्व (Revenue) को भी नुकसान हो रहा है, और इस व्यवसाय (Business) पर निर्भर हजारों मजदूरों के सामने बेरोजगारी (Unemployment) का संकट खड़ा हो गया है। इन समस्याओं के समाधान के लिए सभी विभागों के अधिकारियों की संयुक्त बैठक (Joint Meeting) बुलाई जाए, ऐसी मांग जालना क्रेडाई (Jalna CREDAI) के प्रतिनिधिमंडल ने संभागीय आयुक्त (Divisional Commissioner) से की है।

जालना क्रेडाई के अभय कुलकर्णी, उपाध्यक्ष डॉ. विठ्ठल पवार, सचिव अविनाश भोसले, सदस्य रविंद्र हुशे और चेतन मराठे के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने 20 फरवरी को संभागीय आयुक्त को ज्ञापन (Memorandum) सौंपकर अपनी मांगें रखीं। इसमें कुल दस प्रमुख मुद्दों को उठाया गया, जिनमें परवानगी मिलने में हो रही देरी, लालफीताशाही (Bureaucratic Delays) के कारण रुके हुए लेआउट (Layouts), अनुमति प्रक्रिया में आ रही बाधाएं और संबंधित विभागों की लापरवाही जैसे विषय शामिल हैं।

सरकारी देरी से आर्थिक नुकसान

ज्ञापन में कहा गया है कि विभिन्न सरकारी विभागों (Government Departments) द्वारा अनावश्यक विलंब किया जा रहा है, जिससे निर्माण व्यवसायियों (Builders and Developers) को भारी आर्थिक नुकसान (Financial Loss) उठाना पड़ रहा है। साथ ही, शहर का विकास भी अवरुद्ध हो गया है। निर्माण क्षेत्र से जुड़े हजारों परिवारों का जीवन यापन (Livelihood) इस व्यवसाय पर निर्भर है, लेकिन लालफीताशाही के चलते निर्माण कार्य ठप होने से मजदूरों के सामने रोजगार का गंभीर संकट (Job Crisis) खड़ा हो गया है।

बिजली, तकनीकी समस्याएं और अनुमतियों में देरी

महाराष्ट्र सरकार के राजस्व विभाग (Revenue Department) के कोड पंजीकरण (Code Registration) के लिए दस्तावेज प्रस्तुत किए जाने के बावजूद समय पर कार्यवाही नहीं की जाती। महावितरण (MahaVitaran) द्वारा बिजली मीटर (Electric Meter) और ट्रांसफार्मर (Transformer) की स्थापना प्रक्रिया में अनावश्यक देरी की जा रही है, जिससे काम में रुकावट आ रही है। सेवा विनियामक आयोग (Regulatory Commission) को निर्माण व्यवसायियों के लिए उचित बिजली दरें (Electricity Tariffs) तय करनी चाहिए।

इसके अलावा, बीपीएमएस (BPMS) प्रणाली में तकनीकी खामियों (Technical Glitches) के चलते परवानगी प्रक्रिया धीमी हो रही है। ग्राम पंचायत (Gram Panchayat) क्षेत्र में निर्माण अनुमति के लिए उपविभागीय अधिकारियों (Sub-Divisional Officers) द्वारा समय पर निर्णय नहीं लिया जाता। सरकारी विभाग अनावश्यक दस्तावेजों (Unnecessary Documentation) की मांग कर प्रक्रिया को जटिल बना रहे हैं। तहसीलदारों के स्थानांतरण (Transfer of Tehsildars) से भी अनुमति प्रक्रिया प्रभावित होती है। नगररचना विभाग (Town Planning Department) में फाइलों का समय पर निपटारा नहीं किया जाता। सहनिबंधक कार्यालय (Sub-Registrar Office) में वार्षिक बाजार मूल्य निर्धारण (Annual Market Rate Fixing) में पारदर्शिता की कमी के कारण व्यवहार प्रभावित हो रहे हैं।

संयुक्त बैठक की मांग

जिला कलेक्टर (District Collector) के समक्ष कई बार पत्र व्यवहार और फॉलो-अप करने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसलिए संभागीय आयुक्त से मांग की गई है कि वे अपने स्तर पर सभी विभागों के अधिकारियों और क्रेडाई सदस्यों की संयुक्त बैठक (Joint Meeting) का आयोजन करें, ताकि निर्माण व्यवसाय से जुड़े मुद्दों का समाधान हो सके और जालना शहर के रुके हुए विकास (Stalled Development) को गति मिल सके। इससे इस व्यवसाय पर निर्भर हजारों परिवारों की आजीविका (Livelihood) बचाई जा सकेगी।


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Imran Siddiqui

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