जालना (प्रतिनिधि):
महाराष्ट्र अंधविश्वास निर्मूलन राज्य समिति की ओर से मेलघाट के आदिवासी बहुल क्षेत्रों में चलाई गई अंधविश्वास उन्मूलन और जनजागरण यात्रा 25 सितम्बर को अपने तीसरे और अंतिम चरण में सफलतापूर्वक संपन्न हुई। यह केवल एक अभियान नहीं, बल्कि समाज के लिए आशा की नई किरण थी।
इस यात्रा का उद्देश्य डंबा प्रथा जैसी कुप्रथाओं का अंत करना, अंधविश्वासों से मुक्ति दिलाना, जादूटोना विरोधी कानून की जानकारी फैलाना, सर्पदंश से बचाव की शिक्षा देना और ग्रामीणों को स्वास्थ्य के प्रति सजग करना था।
तीन चरणों में विभाजित इस जनजागरण अभियान की शुरुआत सितंबर के दूसरे सप्ताह में हुई थी। अंतिम चरण में समिति के कार्यकर्ताओं ने चिखलदरा और धारणी तहसील के दूरदराज़ पाडों तक पहुंचकर महिलाओं, बच्चों और ग्रामीणों को जागरूक किया। कुल मिलाकर 324 गांवों में प्रबोधन कार्यक्रम आयोजित हुए।
मुश्किल परिस्थितियों और दूरस्थ इलाकों की चुनौतियों के बावजूद कार्यकर्ताओं ने हिम्मत नहीं हारी। उनकी मेहनत को देखते हुए 26 सितम्बर को जालना में भावपूर्ण स्वागत किया गया। इस अवसर पर जिला प्रधान सचिव मधुकर गायकवाड और जिला पदाधिकारी माया गायकवाड ने कार्यकर्ताओं का अभिनंदन किया।
समिति की राज्य कार्यकारिणी सदस्य नंदिनी जाधव (पुणे), भगवान रणदिवे (सातारा) और अनिश पटवर्धन (दापोली) ने अंतिम चरण का नेतृत्व किया। उनके प्रयासों ने साबित कर दिया कि यदि संकल्प मजबूत हो तो बदलाव असंभव नहीं है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
Q1. डंबा प्रथा क्या है?
👉 डंबा प्रथा एक अमानवीय परंपरा है, जिसमें सामाजिक मान्यताओं और अंधविश्वासों के चलते महिलाओं पर अन्याय किया जाता था। समिति का मुख्य उद्देश्य इस प्रथा का पूरी तरह उन्मूलन करना है।
Q2. इस यात्रा का सबसे बड़ा उद्देश्य क्या था?
👉 अंधविश्वास और जादूटोने से समाज को मुक्त करना, स्वास्थ्य जागरूकता फैलाना और ग्रामीणों को वैज्ञानिक सोच की ओर प्रेरित करना।

Q3. अभियान के दौरान कितने गांवों में कार्यक्रम हुए?
👉 कुल 324 गांवों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए।
Q4. क्या इस अभियान को सरकारी सहयोग मिला?
👉 हां, महाराष्ट्र शासन के स्वास्थ्य विभाग ने इस यात्रा को महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान किया।
Q5. इस यात्रा का नेतृत्व किसने किया?
👉 अंतिम चरण का नेतृत्व नंदिनी जाधव, भगवान रणदिवे और अनिश पटवर्धन ने किया।
Q6. आगे इस तरह के अभियान कब होंगे?
👉 समिति का लक्ष्य आने वाले समय में भी महाराष्ट्र के अन्य क्षेत्रों में इसी तरह की जागरूकता यात्राएं आयोजित करना है।

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