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सुप्रीम कोर्ट ने वक्फ (संशोधन) अधिनियम 2025 की विवादित धाराएँ रोकी — याचिकाकर्ताओं को आंशिक सफलता

सुप्रीम कोर्ट ने वक्फ (संशोधन) अधिनियम 2025 की कुछ विवादित धाराएँ रोकी — याचिकाकर्ताओं को आंशिक विजय

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार, 15 सितंबर 2025 को वक्फ (संशोधन) अधिनियम 2025 के पूरे अधिनियम पर स्थगन की याचिका खारिज कर दी, परंतु अधिनियम की कई विवादास्पद धाराओं को अंतरिम रूप से रोक दिया। कोर्ट ने कहा कि संसद द्वारा पारित कानून की संवैधानिकता के पक्ष में ‘अनुमान’ रहता है और केवल अत्यंत मजबूत कारणों पर ही पूरे अधिनियम पर रोक देना सम्भव है। 0

रुकोत की गई प्रमुख धाराएँ

  • धारा 3 — वक्फ निर्माण के लिए व्यक्ति के पाँच वर्ष से इस्लाम का अभ्यास करने की शर्त: अदालत ने कहा कि जब तक केन्द्र नियम/प्रक्रिया (mechanism) नहीं बनाएगा, यह शर्त लागू नहीं होगी। 1
  • धारा 3C (उपबंध-2 का proviso) — विवादित वक्फ संपत्ति पर संबंधित सरकारी अधिकारी (जैसे जिला कलेक्टर) की जाँच के दौरान उसकी वक्फ हैसियत को स्वतः निलंबित करने का प्रावधान: अदालत ने कहा कि बिना उचित प्रक्रिया के यह स्वेच्छाचारी अधिकार दे सकता है और इसलिए रोक लगा दी। 2
  • अन्य रोक लगी धाराएँ: धारा 9, 14, 23, 36, 104, 107, 108 — ये धाराएँ भी पक्षकारों ने संवैधानिक व् अधिकार-आधारित आधारों पर चुनौती दी थीं। 3

याचिकाकर्ताओं के लिए क्यों यह महत्वपूर्ण जीत है?

याचिकाकर्ताओं ने जो मुख्य चिंताएँ उठाई — धार्मिक संस्थाओं की स्वायत्तता, वक्फ संपत्तियों के अधिकारों पर सरकारी हस्तक्षेप, तथा किसी धर्म-अनुभव का स्वकार करने की विधिक शर्त — उन चिंताओं को अदालत ने प्रथम दृष्टया (prima facie) मान्यता दी और तुरंत लागू न करने का आदेश दिया। इससे याचिकाकर्ताओं को संभावित अनावश्यक वक्फ-हानी और संपत्ति पर अस्थिरता से सुरक्षा मिली है। 4

न्यायपालिका ने क्या कहा?

पीठ (न्यायमूर्ति बी.आर. गावई व न्यायमूर्ति ए.जी. मसीह) ने स्पष्ट किया कि “किसी विधान की संवैधानिकता के पक्ष में अनुमान रहता है” और केवल ‘दुर्लभ’ परिस्थितियों में ही संपूर्ण स्थगन दिया जा सकता है। परंतु जहाँ धाराओं से संभावित अधिकार-ह्रास या स्वायत्तता पर गंभीर प्रभाव दिखाई देता है, उन्हें निलंबित करना न्यायालय समुचित समझता है। 5

राजनीतिक व संवैधानिक प्रभाव

केंद्र सरकार ने कहा कि न्यायालय ने संसद के निर्णय की स्वीकार्यता पर बल दिया, जबकि विपक्ष तथा कई मुस्लिम-संगठनों ने इस रुख का स्वागत करते हुए कहा कि संवैधानिक मूल्यों — न्याय, समानता और धार्मिक स्वतंत्रता — की रक्षा हुई है। यह मध्यवर्ती आदेश वक्फ-सम्बंधी व्यवस्थाओं पर आगे चलकर दीर्घकालिक नीतिगत विमर्श की दिशा तय कर सकता है। 6

आगे की प्रक्रिया

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यह अंतरिम आदेश अंतिम निर्णय का स्थान नहीं लेता; याचिकाकर्ता अंतिम सुनवाई में अधिनियम की समग्र संवैधानिकता चुनौती दे सकते हैं। यदि याचिकाकर्ता यह सिद्ध करने में सफल रहते हैं कि विवादित धाराएँ संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन करती हैं, तो स्थगित धाराएँ स्थायी रूप से भी निरस्त की जा सकती हैं। 7


निष्कर्ष: सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश याचिकाकर्ताओं के लिये आंशिक विजय है — इतने संवेदनशील और प्रभावशाली प्रावधानों पर रोक लगने से तत्काल प्रभाव में वक्फ समुदाय, वक्फ बोर्ड और लाभार्थियों को सुरक्षा मिली है, तथा केन्द्र को निर्देश मिला है कि नियमावली/प्रक्रिया बनाये बिना संवैधानिक रूप से विवादास्पद प्रावधान लागू न करें।

ताज़ा रिपोर्टिंग: आगामी सुनवाई और अंतिम फैसले की प्रतिलिपि उपलब्ध होते ही अपडेट दिया जाएगा।

स्रोत: Times of India, NDTV, LiveLaw, Indian Express, Economic Times।

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