महिला वकीलों के लिए आरक्षण आवश्यक: नोटरी एसोसिएशन की मांग; 1 दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई
जालना: न्यायपालिका में महिलाओं की भागीदारी बढ़ रही है, पर जालना जैसे अर्ध-शहरी और दूरदराज़ इलाकों में महिला वकीलों की संख्या अभी भी नगण्य है। यह हालात सिर्फ चिंता का विषय नहीं, बल्कि विधि क्षेत्र की सर्वसमावेशिता पर भी प्रश्न उठाती है। इसी के संदर्भ में नोटरी एसोसिएशन, जालना ने महिला वकीलों के लिए आरक्षण की मजबूत मांग की है।
“ग्रामीण व निमशहरी क्षेत्रों में महिला वकीलों को अनेक सामाजिक व व्यावसायिक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में बार काउंसिल चुनावों में महिला आरक्षण देना समय की मांग है। इससे विधि क्षेत्र में उनका आत्मविश्वास और भागीदारी बढ़ेगी।”
— एडवोकेट महेश एस. धन्नावत, कार्याध्यक्ष, नोटरी एसोसिएशन, जालना
नोटरी एसोसिएशन के राज्य अध्यक्ष सिकंदर अली ने भी इस मांग का समर्थन करते हुए कहा कि समाज के हर घटक का समान प्रतिनिधित्व आवश्यक है। उनका कहना है कि महिलाओं का प्रतिनिधित्व बढ़ने से न्यायिक प्रक्रिया अधिक संवेदनशील एवं समावेशी बनेगी।
सुप्रीम कोर्ट में 1 दिसंबर को सुनवाई
महिला वकीलों के पर्याप्त प्रतिनिधित्व के मुद्दे पर दायर अंतरिम याचिका पर 1 दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई निर्धारित है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जयमाल्या बागची की खंडपीठ ने एडवोकेट योगमाया द्वारा दायर याचिका पर नोटिस जारी किया है, जिसमें राज्य बार काउंसिल की चुनाव प्रक्रिया में महिलाओं के लिए उपयुक्त प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने की मांग की गई है।
सुप्रीम कोर्ट द्वारा घोषित राज्य बार काउंसिल चुनाव कार्यक्रम
- पहला चरण: उत्तर प्रदेश, तेलंगाना — 31 जनवरी 2026 तक
- दूसरा चरण: आंध्र प्रदेश, दिल्ली, त्रिपुरा, पुदुचेरी — 28 फरवरी 2026 तक
- तीसरा चरण: राजस्थान, पंजाब-हरियाणा, झारखंड, पश्चिम बंगाल, कर्नाटक, गुजरात — 15 मार्च 2026 तक
- चौथा चरण: मेघालय, महाराष्ट्र — 31 मार्च 2026 तक
- पाँचवाँ चरण: तमिलनाडु, केरल, असम — 30 अप्रैल 2026 तक
याचिकाकर्ताओं की प्रमुख मांगें
- राज्य बार काउंसिल की आगामी चुनावों में महिलाओं को पर्याप्त और अर्थपूर्ण प्रतिनिधित्व देने के लिए आरक्षण/कोटा या अन्य संरचनात्मक उपाय लागू करने की स्पष्ट, समयबद्ध व्यवस्था।
- एडवोकेट्स एक्ट, 1961 के तहत ‘प्रमाणशीर प्रतिनिधित्व’ की व्याख्या समानता और लैंगिक न्याय के अनुरूप की जाए।
- 2026 के सभी चरणों में महिला उम्मीदवारों के लिए कोटा/मिनिमम प्रतिनिधित्व जैसी सकारात्मक नीतियाँ लागू की जाएँ।
- बार काउंसिल ऑफ इंडिया व राज्य बार काउंसिलों को उनकी चुनाव अधिसूचनाओं व नियमों में लैंगिक समानता के प्रावधान शामिल करने के निर्देश दिये जाएँ।
कानूनी प्रतिनिधित्व: याचिकाकर्ता पक्ष की पैरवी वरिष्ठ अधिवक्ता शोभा गुप्ता और एडवोकेट दीपक प्रकाश कर रहे हैं।
मामला: योगमाया एम.जी. बनाम भारतीय संघ एवं अन्य — रिट याचिका (सिविल) क्र. 581/2024

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