“सिर्फ आरक्षण नहीं, चाहिए ठोस और समयबद्ध योजना” — एडवोकेट महेश धन्नावत का अनुसूचित जाति-जनजाति समाज के विकास पर बड़ा बयान
जालना: देश की आजादी के कई दशक बीत जाने के बाद भी अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग की सामाजिक और आर्थिक स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हो सका है। वरिष्ठ विधिज्ञ एडवोकेट महेश धन्नावत का कहना है कि आरक्षण का मूल उद्देश्य अभी तक पूरी तरह से साकार नहीं हुआ है और केवल आरक्षण के भरोसे समाज का सर्वांगीण विकास संभव नहीं है।
एडवोकेट धन्नावत ने कहा कि इसके लिए एक संगठित, पद्धतशीर (Systematic) और समयबद्ध (Time-bound) योजना की जरूरत है, जिससे आरक्षण का लाभ उन तक पहुंचे जो वास्तव में पिछड़े और वंचित हैं।
संविधान के अनुच्छेद 341 और 342 के तहत अनुसूचित जातियों और जनजातियों को आरक्षण और कल्याणकारी योजनाओं का लाभ दिया गया, परंतु यह लाभ समाज के सभी वर्गों तक समान रूप से नहीं पहुंच सका। कुछ सीमित परिवार या समूहों तक ही यह फायदा सीमित रह गया है, जबकि बड़ी संख्या में लोग अभी भी विकास की मुख्यधारा से दूर है।
हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा है कि जो लोग आरक्षण का लाभ लेकर आगे बढ़ चुके हैं, उन्हें अब आरक्षित वर्ग से बाहर निकलना चाहिए ताकि अवसर उन तक पहुंच सकें जो अब भी अत्यधिक पिछड़े हैं। न्यायालय ने अनुसूचित जाति और जनजातियों के भीतर उप-वर्गीकरण (Sub-classification) की बात भी उल्लेख की है, ताकि सबसे वंचित तबकों को प्राथमिकता के आधार पर लाभ मिल सके।
“आरक्षण कोई गरीबी उन्मूलन योजना नहीं है, बल्कि शासन और नीति निर्माण में समान प्रतिनिधित्व देने का माध्यम है।” — एडवोकेट महेश धन्नावत
एडवोकेट धन्नावत ने यह भी बताया कि आर्थिक पिछड़ेपन को दूर करने हेतु सरकार कई योजनाएं चला रही है — जैसे डॉ. आंबेडकर स्वाधार योजना, मॅट्रिकोत्तर शिष्यवृत्ती, और महात्मा फुले पिछड़ा वर्ग विकास महामंडल की कर्ज योजनाएं — परंतु इनका प्रभाव तब तक सीमित रहेगा जब तक उनकी पहुँच और निगरानी सुदृढ़ नहीं होगी।
एडवोकेट धन्नावत द्वारा सुझाए गए प्रमुख उपाय
- गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर बल: केवल शिष्यवृत्ती पर्याप्त नहीं; विद्यार्थियों को आधुनिक, प्रतिस्पर्धात्मक और रोजगारोन्मुख शिक्षा दी जानी चाहिए।
- कौशल विकास और स्वरोजगार: युवाओं को व्यवसाय और उद्यमिता के लिए प्रशिक्षित कर पूँजी व बाजार तक पहुँच प्रदान की जाए।
- स्वास्थ्य और आधारभूत सुविधाएं: अनुसूचित बस्तियों में गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं, सड़कें, स्वच्छता और पेयजल की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
- आरक्षण की समीक्षा (Exit Policy): निश्चित समयावधि में आरक्षण का लाभ लेने वाले परिवारों के सामाजिक-आर्थिक स्थिति का मूल्यांकन कर सक्षम परिवारों को आरक्षण से बाहर किया जाए।
- व्यापक जन जागरूकता: सरकारी योजनाओं की जानकारी समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने और उनके अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता है।
अंत में, एडवोकेट महेश धन्नावत ने कहा कि आरक्षण का उद्देश्य तब पूरा होगा जब कोई भी वर्ग विकास से वंचित नहीं रहेगा। इसके लिए भावनात्मक राजनीति से ऊपर उठकर ठोस नीतियां बनाना और उनका प्रभावी क्रियान्वयन करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि यदि यह नीति सफलतापूर्वक लागू की गई, तो आने वाले समय में आरक्षण की आवश्यकता स्वयं समाप्त हो जाएगी — और यही सच्चे सामाजिक न्याय की प्राप्ति होगी।

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