SDPI ने वक्फ पंजीकरण की समय-सीमा बढ़ाने और निगरानी समितियां बनाने की मांग उठाई
जालना — सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI) की जालना जिला इकाई ने बुधवार को भारत सरकार के अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय को एक महत्वपूर्ण स्मरण पत्र भेजते हुए UMEED पोर्टल पर वक्फ संपत्तियों के अनिवार्य पंजीकरण की अंतिम तिथि बढ़ाने की मांग की। यह प्रस्ताव ज़िला वक्फ अधिकारी, जालना के माध्यम से भेजा गया, जिसमें महाराष्ट्र के जिले और तहसील स्तर पर वक्फ निगरानी समितियों के गठन की आवश्यकता पर बल दिया गया है।
प्रतिनिधिमंडल में SDPI के जिला महासचिव एडवोकेट ख़ुर्रम ख़ान, जिला समिति सदस्य मसूद बागवान, तथा पार्टी कार्यकर्ता हुजैफा खान, शेख वसीम और हाफ़िज़ माआझ उपस्थित थे।
SDPI ने कहा कि वर्तमान अंतिम तिथि 5 दिसंबर 2025 व्यावहारिक नहीं है, क्योंकि देशभर में वक्फ संपत्तियों का पूर्ण और निष्पक्ष पंजीकरण इस सीमित अवधि में संभव नहीं है। पार्टी ने वक्फ (संशोधन) अधिनियम 2025 के क्रियान्वयन पर भी गंभीर सवाल उठाए। उनका कहना है कि इस कानून पर मुतवल्लियों, धार्मिक संस्थाओं और समुदाय प्रतिनिधियों से उचित संवाद नहीं किया गया, जिसके कारण संवैधानिक प्रश्न खड़े हुए हैं। यह मुद्दा सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन भी है।

SDPI के अनुसार पंजीकरण प्रक्रिया राज्य के कई क्षेत्रों में व्यावहारिक चुनौतियों का सामना कर रही है। कई मुतवल्ली बुजुर्ग हैं और डिजिटल तौर-तरीकों में सक्षम नहीं हैं। साथ ही पुरानी फाइलों, नक्शों और दस्तावेज़ों को जुटाने में समय लग रहा है। तकनीकी कर्मचारियों की कमी, स्कैनिंग सुविधाओं का अभाव और डिजिटल सहायता केंद्रों की अनुपलब्धता भी प्रक्रिया को धीमा कर रही है।
इन परिस्थितियों को देखते हुए पार्टी ने मांग की है कि समय-सीमा को कम से कम 6 से 12 महीनों तक बढ़ाया जाए, जिससे पंजीकरण कार्य निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से पूरा हो सके।
पारदर्शिता को बढ़ावा देने के लिए SDPI ने वक्फ बोर्ड और मंत्रालय से वक्फ संपत्तियों से जुड़े समस्त डेटा को सार्वजनिक करने की मांग की, ताकि अनियमितताओं पर रोक लगाई जा सके। साथ ही प्रशिक्षण कार्यक्रमों का विस्तार, डिजिटल सहायता केंद्रों की संख्या बढ़ाने और दूरस्थ क्षेत्रों में मोबाइल सहायता इकाइयाँ भेजने की आवश्यकता भी जताई।

