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पारसी टेकड़ी पर अवैध उत्खनन से बढ़ा खतरा: नंदा पवार ने प्रशासन से की सख्त कार्रवाई की मांग

पारसी टेकड़ी पर अवैध उत्खनन से बढ़ा खतरा: नंदा पवार ने प्रशासन से की सख्त कार्रवाई की मांग

पारसी टेकड़ी पर अवैध उत्खनन से बढ़ा खतरा: नंदा पवार ने प्रशासन से की सख्त कार्रवाई की मांग

जालना, 17 जुलाई 2025: जालना शहर की ऐतिहासिक और पर्यावरणीय दृष्टि से महत्वपूर्ण पारसी टेकड़ी पर हो रहे अवैध उत्खनन को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता एवं जिला महिला कांग्रेस अध्यक्ष नंदा पवार ने प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने दोषियों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई करते हुए पारसी टेकड़ी के संरक्षण की आवश्यकता जताई है।

इस संदर्भ में नंदा पवार, कांग्रेस के शहर जिला महासचिव गणेश चांदोडे, जया आठवले, राहुल रत्नपारखे आदि ने जिलाधिकारी डॉ. श्रीकृष्ण पांचाळ को एक निवेदन पत्र सौंपा, जिसमें पारसी टेकड़ी में हो रही खनन गतिविधियों को तत्काल बंद करवाने और इसे संरक्षित क्षेत्र घोषित करने की मांग की गई है।

निवेदन में कहा गया है कि पारसी टेकड़ी एक समृद्ध प्राकृतिक संपदा है, जहां कृषि विज्ञान केंद्र की मदद से जलसंवर्धन कार्य किए गए हैं और अब तक लगभग 3.5 लाख वृक्षों का रोपण किया गया है। यह क्षेत्र पशु-पक्षियों और विविध जीव-जंतुओं का प्राकृतिक आवास है।

हालांकि, इस पहाड़ी क्षेत्र का कुछ भाग महाराष्ट्र औद्योगिक विकास महामंडल (MIDC) के अधीन आता है, जिसने औद्योगिक फेस 3 के अंतर्गत भूखंडों का आवंटन करके वहां व्यवसायिक गतिविधियाँ आरंभ कर दी हैं। भूखंडधारकों ने अवैध उत्खनन करते हुए हजारों ट्रकों के माध्यम से गौण खनिज (मुरुम) निकाल लिया है, जिससे लगभग 150 से 200 फीट ऊँचाई तक की टेकड़ी का कटाव हो गया है। यह स्थिति भू-स्खलन और दुर्घटना की संभावना को जन्म दे रही है।

नंदा पवार ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वह जानबूझकर इस आपराधिक गतिविधि को नजरअंदाज कर रहा है, जबकि इस क्षेत्र को संरक्षित करना अत्यंत आवश्यक है।

निवेदन में निम्नलिखित मांगें रखी गईं:

  • पारसी टेकड़ी पर हो रहे सभी प्रकार के उत्खनन कार्यों को तत्काल बंद किया जाए।
  • पूरे क्षेत्र में किसी भी प्रकार के निर्माण कार्य पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए।
  • MIDC और संबंधित विभागों को सख्त निर्देश जारी किए जाएं।
  • अवैध खनिज ले जाने वाले भूखंडधारकों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जाए।
  • पूरे क्षेत्र को हरा-भरा वनक्षेत्र घोषित किया जाए और केवल वृक्षारोपण की अनुमति दी जाए।

नंदा पवार ने चेतावनी दी कि यदि समय रहते प्रशासन ने कठोर कदम नहीं उठाए, तो पारसी टेकड़ी का क्षरण होकर एक बड़ा प्राकृतिक और मानवीय संकट बन सकता है। उन्होंने इसे पर्यावरण के साथ किया गया एक खुला अन्याय बताया।


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