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खरीफ में भारी मार: जालना के 965 गांवों में फसल उत्पादन 50 पैसे से कम, बढ़ा कृषि संकट

खरीफ में भारी मार: जालना के 965 गांवों में फसल उत्पादन 50 पैसे से भी कम, किसानों की बढ़ी चिंता

जालना।
जालना जिले के किसानों के लिए खरीफ सीजन 2024–25 बेहद निराशाजनक और संकटपूर्ण साबित हुआ है। जिले की आठों तहसीलों के कुल 965 गांवों में खरीफ फसलों का औसत उत्पादन 50 पैसे से भी कम दर्ज किया गया है। जिला प्रशासन द्वारा जारी अंतिम उत्पादन रिपोर्ट (पैसेवारी) ने जिले में कृषि संकट की गंभीर तस्वीर सामने ला दी है। कमजोर मानसून, असमान वर्षा, प्रतिकूल मौसम परिस्थितियों और सीमित संसाधनों के कारण किसानों को अपेक्षित पैदावार नहीं मिल सकी, जिसका सीधा असर ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ने की आशंका है।

अंतिम पैसेवारी रिपोर्ट जारी

कृषि वर्ष 2024–25 के खरीफ मौसम की अंतिम उत्पादन रिपोर्ट जालना जिले में घोषित कर दी गई है। जिलाधिकारी अशिमा मित्तल ने जानकारी देते हुए बताया कि जिले के आठों तहसीलों में स्थित कुल 965 गांवों में खरीफ फसलों की पैसेवारी 50 पैसे से कम पाई गई है। यह स्थिति किसानों के लिए अत्यंत चिंताजनक है और आने वाले दिनों में राहत व सहायता उपायों की आवश्यकता को रेखांकित करती है।

खरीफ और रबी गांवों की संयुक्त समीक्षा

जिलाधिकारी के अनुसार, इस अंतिम रिपोर्ट में केवल खरीफ गांवों को ही नहीं, बल्कि उन रबी गांवों को भी शामिल किया गया है, जहां कुल कृषि क्षेत्र के दो-तिहाई से अधिक हिस्से में खरीफ फसलों की बुवाई की गई थी। जिले के कुल 971 गांवों में से 667 खरीफ गांव और 298 रबी गांव—इस प्रकार कुल 965 गांवों की संशोधित अंतिम पैसेवारी घोषित की गई है।

कुछ गांवों की पैसेवारी घोषित नहीं

परतुर तहसील का राणी वाहेगांव गांव पूरी तरह निम्न दुधना परियोजना के जलमग्न क्षेत्र में आने के कारण उसकी उत्पादन रिपोर्ट घोषित नहीं की गई है। इसी तरह मंठा तहसील के चांदेश्वर और गोपेगांव गांव भी निम्न दुधना परियोजना के जलभराव क्षेत्र में स्थित होने के कारण पैसेवारी से बाहर रखे गए हैं।
इसके अलावा मंठा तहसील के गारटेकी, सोनुनकरवाड़ी और किर्तापुर तांडा गांवों को अभी तक राजस्व दर्जा प्राप्त नहीं होने के कारण इन गांवों की भी पैसेवारी घोषित नहीं की गई। इस तरह कुल छह गांव अंतिम रिपोर्ट में शामिल नहीं किए गए हैं।

सभी घोषित गांवों में 50 पैसे से कम उत्पादन

जिला प्रशासन द्वारा जिन 965 गांवों की पैसेवारी घोषित की गई है, उन सभी में खरीफ फसलों का उत्पादन 50 पैसे से कम पाया गया है। यह आंकड़ा जिले में कृषि संकट की गहराई को दर्शाता है और किसानों की आर्थिक स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े करता है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस स्थिति का असर न केवल खरीफ किसानों पर पड़ेगा, बल्कि आगामी रबी सीजन की तैयारी और खेती में निवेश की क्षमता भी प्रभावित हो सकती है।

तहसील-वार गांवों की संख्या

अंतिम रिपोर्ट के अनुसार, तहसील-वार खरीफ फसलों की हंगामी उत्पादन रिपोर्ट वाले गांवों की संख्या इस प्रकार है—

  • जालना तहसील: 151 गांव
  • बदनापुर: 92 गांव
  • भोकरदन: 156 गांव
  • जाफराबाद: 101 गांव
  • परतुर: 98 गांव
  • मंठा: 117 गांव
  • अंबड: 138 गांव
  • घनसावंगी: 118 गांव

राहत की उम्मीद, लेकिन सवाल बरकरार

खरीफ फसलों की कमजोर पैदावार ने जिले में किसानों की चिंता बढ़ा दी है। अब किसानों की नजरें सरकार और जिला प्रशासन की ओर टिकी हैं कि इस गंभीर स्थिति को देखते हुए राहत पैकेज, मुआवजा और वैकल्पिक सहायता उपायों की घोषणा कब और किस रूप में की जाती है। साथ ही, यह रिपोर्ट भविष्य में सूखा, बीमा और कृषि सहायता से जुड़ी नीतियों के लिए भी अहम आधार मानी जा रही है।

एक समाचार ग्राफिक जिसमें जालना के 965 गांवों में खरीफ फसलों के उत्पादन की गंभीर स्थिति को दर्शाया गया है।

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