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“ईरान पर इस्राइली हमला और संघर्षविराम उल्लंघन: ट्रंप का अल्टीमेटम — ‘बम मत गिराओ!’ | ईरान की आत्मरक्षा और परमाणु नीति पर विशेष रिपोर्ट”

ईरान पर हमलों के बाद ट्रंप का इस्राइल को अल्टीमेटम

🚨 “संघर्षविराम की धज्जियाँ: ईरान पर हमलों के बाद ट्रंप का इस्राइल को अल्टीमेटम — ‘बम मत गिराओ!’”

📆 दिनांक: 24 जून 2025
🖋️ रिपोर्टर: इंटरनेशनल डेस्क, NewsNationOnline.com

✒️ प्रस्तावना

मध्यपूर्व एक बार फिर विश्व राजनीति का ज्वालामुखी बन चुका है। अमेरिका की मध्यस्थता में घोषित संघर्षविराम के कुछ ही घंटों के भीतर इस्राइल ने ईरान पर हवाई हमले कर दिए। इससे न केवल क्षेत्रीय तनाव और गहरा गया, बल्कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े हो गए।

राष्ट्रपति ट्रंप का बयान:
“ISRAEL. DO NOT DROP THOSE BOMBS. IF YOU DO IT IS A MAJOR VIOLATION. BRING YOUR PILOTS HOME, NOW!”

🕊️ संघर्षविराम — सिर्फ एक दिखावा?

23 जून की रात को अमेरिका ने एकतरफा संघर्षविराम की घोषणा की थी, जिसे ईरान ने “शांति की दिशा में पहला कदम” बताया। लेकिन 24 जून की सुबह, इस्राइली वायुसेना ने ईरान के फोर्डो, इस्फहान और नतांज़ में परमाणु स्थलों पर ताबड़तोड़ बमबारी की।

यह स्पष्ट रूप से संघर्षविराम का घोर उल्लंघन था।

ईरान की प्रतिक्रिया:

“संघर्षविराम की घोषणा एक छलावा था। इस्राइल ने जानबूझकर अमेरिका की घोषणा के बावजूद हमला कर हमारी संप्रभुता को ललकारा है।”

🛡️ आत्मरक्षा का अधिकार — ईरान का कानूनी और नैतिक आधार

ईरान ने स्पष्ट किया कि उसकी हर कार्रवाई आत्मरक्षा के सिद्धांत पर आधारित है, जो संयुक्त राष्ट्र चार्टर की धारा 51 के तहत वैध है।

ईरानी विदेश मंत्रालय: “हम युद्ध नहीं चाहते, लेकिन यदि हमारी धरती पर हमला होता है, तो जवाब ज़रूरी है। यह हमारी ज़िम्मेदारी है।”

☢️ परमाणु कार्यक्रम: ईरान का आत्मनिर्भरता की ओर सफ़र

ईरान की परमाणु ऊर्जा संस्था (AEOI) के अध्यक्ष मोहम्मद इस्लामी ने कहा:

“हमारे पास पर्याप्त समृद्ध यूरेनियम है। हम किसी भी क्षति की भरपाई कर सकते हैं। हमारा कार्यक्रम रुकेगा नहीं।”

ईरान का दावा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह से नागरिक उपयोग के लिए है — जैसे कि ऊर्जा उत्पादन और चिकित्सा अनुसंधान।

🌍 अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया: IAEA की आपात चेतावनी

संघर्ष के तुरंत बाद, अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) ने एक आपात बैठक बुलाई। IAEA प्रमुख ने कहा:

“ईरान के परमाणु स्थलों का निरीक्षण असंभव हो चुका है। यदि स्थिति न सुधरी, तो यह वैश्विक परमाणु स्थिरता के लिए एक गंभीर खतरा होगा।”

⚠️ इस्राइल की भूमिका पर सवाल

इस्राइल का दावा है कि उसने “ईरान की मिसाइल तैयारियों” को निष्क्रिय किया, लेकिन इसका कोई स्वतंत्र प्रमाण नहीं है। ईरान का आरोप है कि:

“इस्राइल को अमेरिका की छाया में खुली छूट मिली हुई है। ट्रंप की चेतावनी के बावजूद हमला हुआ, जो बताता है कि अमेरिका का नियंत्रण दिखावटी है।”

🇮🇷 ईरान की संयमित लेकिन सशक्त प्रतिक्रिया

ईरानी सशस्त्र बलों ने अब तक कोई उकसाऊ कार्रवाई नहीं की, लेकिन सीमाओं पर सतर्कता बढ़ा दी है।

IRGC कमांडर हुसैन सलामी: “हम युद्ध नहीं चाहते। लेकिन अगर हमें उकसाया गया, तो जवाब ऐसा होगा जो दुश्मनों को याद रहेगा।”

🧭 ईरान की कूटनीतिक रणनीति: टकराव नहीं, सुलह की पहल

ईरान ने संघर्षविराम की शर्तों को फिर से लागू करने के लिए कतर, ओमान और तुर्की से संपर्क किया है। विदेश मंत्री एब्बास अरबघची ने कहा:

“हम युद्ध के रास्ते पर नहीं हैं। हम सम्मानजनक संवाद चाहते हैं, लेकिन आत्मसमर्पण नहीं।”

📊 ताज़ा घटनाक्रम — एक नज़र में

मुद्दा विवरण
🔥 संघर्षविराम उल्लंघन इस्राइल ने अमेरिका की घोषणा के बाद हमला किया
📍 निशाना फोर्डो, इस्फहान, नतांज़ में परमाणु संयंत्र
💬 ट्रंप की प्रतिक्रिया इस्राइल को चेतावनी और हमले रोकने का आदेश
🛡️ ईरान का रुख आत्मरक्षा की वैधता और संयमपूर्ण रणनीति
🌐 IAEA निरीक्षण बंद, वैश्विक चिंता बढ़ी
🕊️ ईरान की मांग स्वतंत्र जांच और संघर्षविराम की बहाली

✍️ निष्कर्ष: “ईरान, एक संयमित राष्ट्र”

ईरान ने संघर्षविराम की घोषणा का स्वागत किया, लेकिन उस पर हुए हमले ने उसे मजबूर कर दिया कि वह अपने आत्मसम्मान और संप्रभुता की रक्षा करे।

ईरान युद्ध नहीं चाहता, लेकिन आत्मसमर्पण का विकल्प भी नहीं चुनता।

विश्व समुदाय को अब यह समझने की आवश्यकता है कि हर राष्ट्र को अपनी सुरक्षा और स्वाभिमान की रक्षा करने का पूरा हक है।


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Imran Siddiqui

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