अगस्त 2025 तक गाज़ा का मानवीय संकट भयावह स्तर पर पहुँच चुका है। मार्च 2025 से इज़राइल द्वारा लगाई गई नाकाबंदी ने मानवीय सहायता को लगभग पूरी तरह रोक दिया है, जिसके चलते खाद्य आपूर्ति बंद होने के कगार पर है, स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह चरमरा गई हैं, और आवश्यक दवाओं की भारी कमी हो गई है। इस संकट की सबसे बड़ी मार मासूम बच्चों पर पड़ रही है।
रिपोर्टों के अनुसार, पिछले कुछ महीनों में 1,800 से अधिक फ़िलिस्तीनी नागरिक मारे जा चुके हैं, जबकि हज़ारों लोग घायल हैं। गाज़ा के अस्पताल अपनी क्षमता से कई गुना अधिक मरीजों का इलाज कर रहे हैं और कई जगह जीवनरक्षक दवाओं का स्टॉक पूरी तरह खत्म हो चुका है।
संयुक्त राष्ट्र और कई अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने इस विनाशकारी स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए, इज़राइल से बिना शर्त मानवीय सहायता गाज़ा तक पहुँचाने की तात्कालिक अनुमति देने की अपील की है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और अन्य एजेंसियों का कहना है कि यदि जल्द ही राहत सामग्री नहीं पहुंचाई गई तो भूख और बीमारियों से मौतों का आंकड़ा और बढ़ सकता है।
कुपोषण से पीड़ित बच्चों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, जबकि पानी, बिजली और चिकित्सा सुविधाओं जैसी बुनियादी ज़रूरतें लगभग न के बराबर हैं। निरंतर जारी हिंसा ने राहत कार्यों को भी बेहद कठिन बना दिया है, जिससे गाज़ा की पूरी आबादी मदद के इंतजार में है।
पूरे 2025 के दौरान हालात लगातार बिगड़े हैं और अब गाज़ा का संकट केवल स्थानीय नहीं, बल्कि एक गंभीर अंतरराष्ट्रीय मानवीय चुनौती बन चुका है, जिसके समाधान के लिए वैश्विक समुदाय से तत्काल और ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है।

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