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सीना नदी किनारे अतिक्रमण: मिट्टी-मुरूम भराव से बनाया जा रहा रस्ता, प्रशासन बेखबर

Encroachment on the banks of the Seena River: Road is being built by filling soil and gravel, administration is unaware

पर्यावरण प्रेमियों की चिंता, नदी पुनरुद्धार पर मंडरा रहा खतरा* 

जालना: केंद्र सरकार ने देशभर में नदियों के पुनरुद्धार, संरक्षण और संवर्धन के लिए कई महत्वपूर्ण योजनाएं शुरू की हैं. लेकिन जालना शहर से बहने वाली सीना नदी, जो शहर के सौंदर्य और पर्यावरणीय संतुलन का हिस्सा है, अतिक्रमण का शिकार हो रही है. सीना नदी के किनारे मिट्टी और मुरुम भरकर एक बड़ा कच्चा रास्ता बनाया जा रहा है. प्रशासन को इसकी कोई जानकारी नहीं है, जिससे पर्यावरण प्रेमियों में चिंता बढ़ रही है.

नदी किनारे मिट्टी-मुरूम का भराव
हनुमान घाट से थाडेश्वर महादेव मंदिर तक सीना नदी के किनारे मिट्टी और मुरूम का भराव डालकर 30-40 फीट चौड़ा और आधा किलोमीटर लंबा रास्ता तैयार किया जा रहा है. यह कार्य जेसीबी और रोड रोलर की मदद से किया जा रहा है. इसके कारण नदी का पाट संकुचित हो गया है, जिससे जल प्रवाह और पर्यावरणीय संतुलन पर खतरा मंडरा रहा है. 

प्रशासन अनजान, अतिक्रमण जारी
जब नगर निगम प्रशासन से इस मामले में सवाल किया गया तो आयुक्त संतोष खांडेकर ने इस गतिविधि की जानकारी से इनकार किया. शहर के अभियंता सैय्यद सऊद और स्वच्छता निरीक्षक विलास गावंडे ने भी कहा कि यह कार्य किसके द्वारा किया जा रहा है, इसकी जानकारी नहीं है. हालांकि, संबंधित विभाग ने मामले की जांच शुरू करने और कार्य को रोकने का आश्वासन दिया है. 

2019 में हुआ था नदी का पुनरुद्धार 
2019 से समस्त महाजन ट्रस्ट मुंबई, सीना-कुंडलिका फाउंडेशन और 55 सामाजिक संगठनों के सहयोग से सीना नदी के पुनरुद्धार का कार्य शुरू किया गया था।. इस परियोजना के तहत नदी से लाखों टन कचरा और मलबा हटाया गया. 18,000 से अधिक पेड़ लगाकर नदी किनारे एक हरित क्षेत्र तैयार किया गया. इन प्रयासों से सीना नदी की पहचान पुनर्जीवित हुई थी, लेकिन वर्तमान में हो रहा अतिक्रमण उन प्रयासों पर पानी फेर सकता है.

पर्यावरणविदों की अपील
सीना-कुंडलिका फाउंडेशन के सचिव उदय शिंदे का कहना है, “नदी का संरक्षण जल स्तर को बनाए रखने के लिए अत्यधिक जरूरी है. प्रशासन को तुरंत हस्तक्षेप कर अतिक्रमण को रोकना चाहिए और नदी किनारों का सीमांकन कर उसे सुरक्षित करना चाहिए.”
सीना नदी पर हो रहे इस अतिक्रमण ने पर्यावरण प्रेमियों और नागरिकों को चिंतित कर दिया है. अगर यह कार्य तुरंत नहीं रोका गया तो शहर की जलापूर्ति और पर्यावरणीय संतुलन पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है.


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Imran Siddiqui

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