NewsNation Online

FireFly In News

ईद-उल-अज़हा की क़ुर्बानी शरीअत और क़ानून के मुताबिक़ अदा करें — मौलाना मिस्बाही की अपील

ईद-उल-अज़हा की क़ुर्बानी शरीअत के मुताबिक़ अदा करें — मौलाना मिस्बाही की अपील

🕌 ईद-उल-अज़हा की क़ुर्बानी शरीअत के मुताबिक़, अमन और सुकून के साथ अदा की जाए — मौलाना मिस्बाही की भावुक अपील

📍 जालना: ईद-उल-अज़हा जैसे मुकद्दस मौके पर गुलज़ार मस्जिद, जालना के पेश इमाम हज़रत मौलाना ग़ुलाम जिलानी मिस्बाही ने मुसलमानों से पुरख़ुलूस अपील की है कि इस साल की क़ुर्बानी पूरी होशियारी, साफ़-सफ़ाई, शरीअत और भारतीय क़ानून के मुताबिक़ अदा की जाए।

“क़ुर्बानी सिर्फ़ एक रस्म नहीं, बल्कि यह हज़रत इब्राहीम अ.स. की सुन्नत और अल्लाह की राह में अपनी सबसे अज़ीज़ चीज़ को पेश करने की मिसाल है।”

✨ क़ुर्बानी की हक़ीक़त — न अफ़वाहों में आएं, न दीन से हटें

मौलाना ने सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही उन ग़लतफहमियों पर रौशनी डाली जिनमें कहा जाता है कि क़ुर्बानी की जगह पैसे देकर ग़रीबों की मदद की जा सकती है।

“ऐसी बातें शरीअत की रौशनी में क़ाबिले-क़बूल नहीं हैं। क़ुर्बानी के दिन सिर्फ़ क़ुर्बानी ही वाजिब है — इसका कोई बदली नहीं हो सकता।”

उन्होंने जोर देकर कहा कि क़ुर्बानी एक इबादत है, सदक़ा या ख़ैरात नहीं। इसे उसी तरीक़े से अदा करना ज़रूरी है जैसा इस्लाम ने हुक्म दिया है।

🧼 क़ानून का एहतराम और साफ़-सफ़ाई का ख़ास ख़याल

मौलाना मिस्बाही ने तागीद की कि:

  • क़ुर्बानी भारत और महाराष्ट्र सरकार के क़ानूनों के मुताबिक़ होनी चाहिए।
  • सिर्फ़ वही जानवर क़ुर्बान किए जाएं जिनकी शरीअत और क़ानून में इजाज़त है।
  • सड़कों, गलियों या सार्वजनिक स्थानों पर क़ुर्बानी से परहेज़ करें।
  • साफ़-सफ़ाई, सेहत और पाकीज़गी का विशेष ध्यान रखें।
  • क़ुर्बानी की तस्वीरें या वीडियो सोशल मीडिया पर न डालें।
  • क़ानून की कोई भी ख़िलाफ़वर्जी न हो — इस्लाम हमें क़ानून की इज़्ज़त सिखाता है।
“इस्लाम अमन और अदब का दीन है। इसमें न फितना की जगह है, न ग़ैरक़ानूनी हरकतों की, और न ही किसी को तकलीफ़ देने की इजाज़त है।”

🏛️ हुकूमत से गुज़ारिश, उम्मत से ज़िम्मेदारी का तक़ाज़ा

मौलाना ने हुकूमत से अपील की कि इस्लामी जज़्बात का लिहाज़ रखते हुए क़ुर्बानी से जुड़ी हिदायतें और इजाज़तनामे जारी किए जाएं। ताकि आम लोग आसानी से दीन के अनुसार अमल कर सकें।

साथ ही उन्होंने कहा:

“हर मुसलमान की ज़िम्मेदारी है कि वो शरीअत के साथ-साथ मुल्क के क़ानून का भी पूरा एहतराम करे — यही एक सच्चे मुसलमान की पहचान है।”

🐐 नफ़ली क़ुर्बानी करने वालों से मशविरा

उन्होंने सलाह दी:

“अगर आप नफ़ली क़ुर्बानी की जगह किसी ज़रूरतमंद की मदद करना चाहते हैं, ज़रूर करें — मगर वाजिब क़ुर्बानी को हरगिज़ न छोड़ें।”

क़ुर्बानी का मक़सद सिर्फ़ अल्लाह की रज़ा हो, न कि किसी की दिल-आज़ारी, शोहरत या एहसान जताना।


Discover more from NewsNation Online

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

author avatar
Imran Siddiqui

Discover more from NewsNation Online

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading